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दो अरब से सुधारेंगे प्राथमिक शिक्षा
ब्यूरो/ अमर उजाला ,भदोही
Updated Sat, 26 Mar 2016 06:49 PM IST
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प्राथमिक शिक्षा की स्थिति को और बेहतर बनाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने एक अरब 99 करोड़ 89 लाख का प्रस्ताव शासन को भेजा है। इसमें शिक्षकों के वेतन से लेकर यूनीफार्म, नि:शुल्क किताब सहित कई मदों में होने वाले खर्च का प्रस्ताव बनाया गया है। शिक्षा का 80 फीसदी बजट सिर्फ शिक्षकों और अनुदेशकों के वेतन पर खर्च होता है।
मध्याह्न भोजन के अलावा प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में ज्यादातर व्यवस्थाएं सर्व शिक्षा अभियान के तहत चल रहीं हैं। हर साल नए वित्तीय वर्ष के पहले बेसिक शिक्षा विभाग अपनी जरूरत के हिसाब से निदेशालय को बजट का प्रस्ताव भेजता है। करीब दो से तीन महीने तक परीक्षण के बाद निदेशालय स्तर से योजनाओं के मद में पैसा भेजा जाता है। वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए बेसिक शिक्षा की ओर से जो प्रस्ताव तैयार किया गया है, वह एक अरब 99 करोड़ 89 लाख है। इसमें एक अरब 70 करोड़ सिर्फ शिक्षकों के वेतन, पेंशन समेत अन्य सुविधाओं के लिए रखा गया है। इसी तरह यूनिफार्म के लिए छह करोड़ प्रस्तावित है, जो गत वर्ष से एक करोड़ घट गया है। पिछले साल के मुकाबले छात्र संख्या नौ हजार कम होने के कारण विभागीय स्तर से यह कदम उठाया गया है। नि:शुल्क पुस्तक के लिए दो करोड़ तय है। हालांकि विभागीय अधिकारी बताते हैं कि विभाग के प्रस्ताव में कटौती की जाती है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. सत्य प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि नए वित्तीय वर्ष का प्रस्ताव भेजा गया है। शासन और निदेशालय स्तर से आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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मध्याह्न भोजन के अलावा प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में ज्यादातर व्यवस्थाएं सर्व शिक्षा अभियान के तहत चल रहीं हैं। हर साल नए वित्तीय वर्ष के पहले बेसिक शिक्षा विभाग अपनी जरूरत के हिसाब से निदेशालय को बजट का प्रस्ताव भेजता है। करीब दो से तीन महीने तक परीक्षण के बाद निदेशालय स्तर से योजनाओं के मद में पैसा भेजा जाता है। वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए बेसिक शिक्षा की ओर से जो प्रस्ताव तैयार किया गया है, वह एक अरब 99 करोड़ 89 लाख है। इसमें एक अरब 70 करोड़ सिर्फ शिक्षकों के वेतन, पेंशन समेत अन्य सुविधाओं के लिए रखा गया है। इसी तरह यूनिफार्म के लिए छह करोड़ प्रस्तावित है, जो गत वर्ष से एक करोड़ घट गया है। पिछले साल के मुकाबले छात्र संख्या नौ हजार कम होने के कारण विभागीय स्तर से यह कदम उठाया गया है। नि:शुल्क पुस्तक के लिए दो करोड़ तय है। हालांकि विभागीय अधिकारी बताते हैं कि विभाग के प्रस्ताव में कटौती की जाती है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. सत्य प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि नए वित्तीय वर्ष का प्रस्ताव भेजा गया है। शासन और निदेशालय स्तर से आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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