फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bhadohi News ›   Turtles are smuggled to China via Chandauli

Bhadohi News: चंदौली के रास्ते चीन तक होती है कछुओं की तस्करी

Sat, 11 Nov 2023 01:08 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 11 Nov 2023 01:08 AM IST
विज्ञापन
Turtles are smuggled to China via Chandauli
पीडीडीयू नगर। ठंड की शुरुआत होते ही कछुओं की की मांग पहाड़ी क्षेत्राें में बढ़ गई है। तस्करों की सक्रियता बढ़ गई है। जिले से ट्रेनों के जरिये तस्करी बढ़ गई है। बिजनौर, देहरादून, बंगाल, त्रिपुरा, नेपाल, भूटान, म्यांमार और चीन तक कछुओं की तस्करी हो रही है। ट्रेन तस्करों का सबसे मुफीद साधन है। वह बिहार के सीमावर्ती जिलों से ट्रकों के माध्यम से कछुओं को लेकर जंक्शन पहुंचते है। तस्कर ट्रेन में सीट के नीचे बोरे में छिपाकर कछुए को रख देते हैं और दूसरी बोगी में सवार होकर कछुओं पर नजर रखते है। यही कारण है कि कछुआ बरामद होने पर तस्कर गिरफ्तार नहीं हो पाते है। जानकारी के मुताबिक ठंड में बंगाल, त्रिपुरा पूर्वोत्तर राज्यों के साथ ही चीन, म्यांमार, भूटान आदि देशों के लोग कछुआ चाव से खाते हैं। कछुए का नर्म मांस गर्म और शक्ति वर्धक माना जाता है। कछुए के मांस का उपयोग शक्ति वर्धक दवाइयों में भी किया जाता है। यही कारण है कि ठंड की शुरूआत होते ही कछुओं की तस्करी बढ़ जाती है। जीआरपी के मुताबिक एक वर्ष में पीडीडीयू जंक्शन पर विभिन्न ट्रेनों से 315 कछुए बरामद हुए। मालूम हो कि वाराणसी एसटीएफ ने तीन फरवरी 2020 को नौबतपुर से एक ट्रक कछुआ बरामद किया था। एसटीएफ की जांच में ट्रक में कीटनाशक के बीच 19 बोरों में रखे 678 कछुए बरामद हुए। साथ ही गौतमबुद्ध नगर जनपद के दनकौर थाना के छिती गांव निवासी तस्कर राजकुमार तथा परवेश को गिरफ्तार कर लिया। तस्कर ने कछुओं की तस्करी की कहानी सुनकर सुनकर सभी हैरान हो गए। तस्कर ने बताया कि पहले कछुओं को कोलकत्ता ले जाते हैं। वहां से नेपाल, भूटान, म्यांमार और चीन तक कछुओं की सप्लाई होती है। दवाओं के साथ ही इसके मांस को लोग खाते हैं। प्रशासन कछुआ तस्करों की चेन तोड़ने में नाकाम है।
विज्ञापन

कोट-
ट्रेनों से हो रही कछुआ की तस्करी को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान बरामद कछुआ को वन विभाग को सुपुर्द कर दिया जाता है।
विज्ञापन

सुरेश कुमार सिंह, जीआरपी निरीक्षक, पीडीडीयू जीआरपी

---------------------------
विज्ञापन
विज्ञापन

पीडीडीयू जंक्शन पर बरामद हुए 315 कछुए
जीआरपी के मुताबिक, एक वर्ष में पीडीडीयू जंक्शन पर 315 कछुए बरामद हुए हैं। इसी वर्ष दो नवंबर को 23 कछुआ बरामद हुए जबकि 17 सितंबर को तीन कछुआ बरामद हुए थे। 14 फरवरी को नार्थ ईस्ट एक्सप्रेस ट्रेन से आरपीएफ ने 21 बैग और बोरी में भरे 157 कछुए बरामद किए थे। 14 महिलाएं गिरफ्तार हुई थीं। 23 नवंबर 2022 को जीआरपी ने दून एक्सप्रेस से 61 कछुए बरामद किए। 16 फरवरी 2022 को जीआरपी ने 71 कछुआ बरामद किए थे।

लुप्तप्राय की श्रेणी में हैं कछुआ
वन विभाग के मुताबिक गंगेज साॅफ्टेशेल नर्म चर्म वाले कछुए लुप्तप्राय जीव की श्रेणी में आते हैं। बब्बर शेर और बाघ को भी इसी श्रेणी में रखा गया है। इनको पकडऩे या मारने पर कठोर कार्रवाई का प्रावधान है।

------------------------
दो सौ में पकड़े जाते हैं कछुए, विदेश में बिकते हैं पचास हजार में
पहाड़ी इलाके बिजनौर, देहरादून के साथ ही मैदानी इलाके अमेठी, सुल्तानपुर सहित अन्य इलाकों से तालाब, गंगा नदी और जलाशयों से कछुए पकड़े जाते हैं। सूत्रों की माने तो कछुआ पकड़ने वालों को प्रति कछुआ दो सौ से तीन सौ रुपये दिए जाते हैं। तस्कर कछुओं को एकत्र कर इन्हें पश्चिम बंगाल भेजते हैं। तस्कर को प्रति कछुआ सौ से दो सौ रुपये दिए जाते हैं। बंगाल में कछुआ एक से दस हजार रुपये तक मांस के हिसाब बिकता है। वहीं चीन, म्यानमार, भूटान, नेपाल सहित अन्य देशों में कुछओं को उनके प्रजाति के हिसाब से पचास हजार रुपये तक में लोग खरीदते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed