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Bhadohi News: गिराई सर्विसलेन पर जलभराव से मिलेगी मुक्ति, तालाब से जुड़ेगा नाला
Thu, 21 Dec 2023 12:33 AM IST
वाराणसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भदोही
संवाद न्यूज एजेंसी, भदोही
Updated Thu, 21 Dec 2023 12:33 AM IST
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ज्ञानपुर। वाराणसी-प्रयागराज हाईवे के गिराई सर्विसलेन पर सालभर होने वाले जलभराव के स्थायी समाधान के लिए हाईवे प्राधिकरण सर्विसलेन के नाले को गहरपुर स्थित तालाब से जोड़ेगा। इसके लिए हाईवे प्राधिकरण की रखरखाव संस्था की ओर से सर्वे किया जा रहा है। इससे एक तरफ जहां गिराई में जलभराव की समस्या का समाधान होगा। वहीं दूसरी तरफ हाईवे प्राधिकरण का हर साल नुकसान होने वाले करोड़ों के राजस्व की बचत भी होगी।
वाराणसी-प्रयागराज हाईवे के गिराई सर्विसलेन के पास जलभराव की समस्या बनी रहती है। हल्की बारिश होने के बाद ही सर्विसलेन के नाले का पानी ओवरफ्लो कर जाता है। जिसके बाद पूरा पानी सर्विसलेन की सड़क पर फैल जाता है। सर्विसलेन पर गिराई के सामने पूरे साल यह समस्या बनी रहती है। खासकर मानसून सीजन में यह समस्या विकराल हो जाती है। जब बारिश का पानी पास में मौजूद गिराई पावर हाउस के परिसर में प्रवेश करने लगता है। इससे खतरे की आशंका बढ़ जाती है। जिलाधिकारी गौरांग राठी को जब इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने तत्काल हाईवे प्राधिकरण को तलब किया। जिसके बाद हाईवे प्राधिकरण सर्विसलेन के नाले की सफाई का कार्य कराया, लेकिन उसके दूसरे दिन ही फिर से नाला ओवरफ्लो हो जाता। इसके बाद प्राधिकरण ने इसकी जानकारी जिलाधिकारी को दी। जिलाधिकारी ने समस्या के स्थायी समाधान के लिए तहसील, नगर पालिका प्रशासन के साथ प्राधिकरण की संयुक्त टीम गठित की। टीम ने मौके पर आंकलन कर परिस्थिति को जाना। जहां नाले में आने वाले पानी का अंदाजा नहीं लगाया जा सका। बहरहाल टीम ने समस्या के स्थायी समाधान के लिए सर्विसलेन के नाले को नजदीकी तालाब से जोड़ने को लेकर सर्वे कर रहा है। सर्वे कार्य पूरा होने के बाद प्राधिकरण की मंजूरी ली जाएगी। इसके बाद समस्या का स्थायी समाधान हो सकेगा। हाईवे की रखरखाव संस्था के सीनियर इंजीनियर विपुल चौहान ने बताया कि सर्विसलेन के नाले को गिराई सर्विसलेन के बगल में स्थित एक पुराने तालाब में जोड़ने की तैयारी चल रही है। इसके लिए सर्वे कार्य चल रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद प्राधिकरण की मंजूरी मिलते ही कार्य को पूरा कराया जाएगा।
हर साल प्राधिकरण को करोड़ों का नुकसान
गिराई सर्विसलेन पर होने वाले जलभराव के कारण हर साल प्राधिकरण को करोड़ों की चपत लगती है। खासकर मानसून सीजन में जब हर दिन बारिश होता है तो जलभराव की समस्या बनी रहती है। ऐसे में प्राधिकरण हर दिन टैंकर लगाकर पानी निकालता है और उसे झिरिया तालाब में छोड़ता है। इस कार्य में प्राधिकरण का हर दिन दो लाख रुपये खर्च होता है। इस लिहाज से देखा जाए तो प्राधिकरण को हर साल करोड़ों की चपत लगती है।
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वाराणसी-प्रयागराज हाईवे के गिराई सर्विसलेन के पास जलभराव की समस्या बनी रहती है। हल्की बारिश होने के बाद ही सर्विसलेन के नाले का पानी ओवरफ्लो कर जाता है। जिसके बाद पूरा पानी सर्विसलेन की सड़क पर फैल जाता है। सर्विसलेन पर गिराई के सामने पूरे साल यह समस्या बनी रहती है। खासकर मानसून सीजन में यह समस्या विकराल हो जाती है। जब बारिश का पानी पास में मौजूद गिराई पावर हाउस के परिसर में प्रवेश करने लगता है। इससे खतरे की आशंका बढ़ जाती है। जिलाधिकारी गौरांग राठी को जब इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने तत्काल हाईवे प्राधिकरण को तलब किया। जिसके बाद हाईवे प्राधिकरण सर्विसलेन के नाले की सफाई का कार्य कराया, लेकिन उसके दूसरे दिन ही फिर से नाला ओवरफ्लो हो जाता। इसके बाद प्राधिकरण ने इसकी जानकारी जिलाधिकारी को दी। जिलाधिकारी ने समस्या के स्थायी समाधान के लिए तहसील, नगर पालिका प्रशासन के साथ प्राधिकरण की संयुक्त टीम गठित की। टीम ने मौके पर आंकलन कर परिस्थिति को जाना। जहां नाले में आने वाले पानी का अंदाजा नहीं लगाया जा सका। बहरहाल टीम ने समस्या के स्थायी समाधान के लिए सर्विसलेन के नाले को नजदीकी तालाब से जोड़ने को लेकर सर्वे कर रहा है। सर्वे कार्य पूरा होने के बाद प्राधिकरण की मंजूरी ली जाएगी। इसके बाद समस्या का स्थायी समाधान हो सकेगा। हाईवे की रखरखाव संस्था के सीनियर इंजीनियर विपुल चौहान ने बताया कि सर्विसलेन के नाले को गिराई सर्विसलेन के बगल में स्थित एक पुराने तालाब में जोड़ने की तैयारी चल रही है। इसके लिए सर्वे कार्य चल रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद प्राधिकरण की मंजूरी मिलते ही कार्य को पूरा कराया जाएगा।
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हर साल प्राधिकरण को करोड़ों का नुकसान
गिराई सर्विसलेन पर होने वाले जलभराव के कारण हर साल प्राधिकरण को करोड़ों की चपत लगती है। खासकर मानसून सीजन में जब हर दिन बारिश होता है तो जलभराव की समस्या बनी रहती है। ऐसे में प्राधिकरण हर दिन टैंकर लगाकर पानी निकालता है और उसे झिरिया तालाब में छोड़ता है। इस कार्य में प्राधिकरण का हर दिन दो लाख रुपये खर्च होता है। इस लिहाज से देखा जाए तो प्राधिकरण को हर साल करोड़ों की चपत लगती है।
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