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Bhadohi News: नंवबर तक जिले के 146 गांवों को टीबी मुक्त बनाने का मिला लक्ष्य
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ज्ञानपुर। जिले को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। अब तक 400 गांवों को टीबी मुक्त कर दिया गया है। वहीं, शेष बचे 146 गांवों को टीबी बनाने की दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है। नवंबर तक गांवों को टीबी मुक्त बनाए जाने की दिशा में विभागीय स्तर से टीम लगाई गई है। जिले में ढाई हजार टीबी मरीज के परिजनों को टीबी निरोधक दवा दी गई है। दवा का सेवन करने से इन्हें टीबी जैसी गंभीर बीमारी नहीं होगी।
जिले में इस समय करीब 1350 टीबी मरीज उपचाराधीन है। टीबी एक जटिल बीमारी है, लेकिन मरीज अगर नियमित दवा का सेवन करता है तो वह पूरी तरह से स्वस्थ भी हो सकता है। पहले जटिल मरीजों का उपचार करने में ढाई से तीन साल का समय लगता था। इससे मरीज परेशान हो कर बीच में ही दवा बंद कर देते थे। टीबी की दवा बीपाल आने के बाद अब करीब छह महीने में जटिल टीबी के मरीज स्वस्थ्य होने लगे हैं। सूबे के मुखिया बीते महीने जनपद के भ्रमण पर आए थे। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देशित किया कि नवंबर माह से पहले टीबी मुक्त जिला किया जाए। अभियान के तहत मरीजों की पहचान की जाए।
16 गुना अधिक बीमारी का डर
टीबी निरोधक दवा के सेवन करने से मरीज के परिजन में टीबी जैसी गंभीर बीमारी नहीं होती है। टीबी के मरीजों में 16 गुना अधिक बीमारी होने का डर रहता है। इससे बचाव को लेकर इन्हें दवाई दी जा रही हैं। निरंतर इनकी मॉनीटरिंग स्वास्थ्य विभाग की तरफ से किया जाता है। जिला क्षय रोग अधिकारी ने डॉ. विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि 245 गांव टीबी मुक्त हो चुका है। जिसकी फाइन रिपोर्ट लग चुकी है। जबकि 155 गांव टीबी मुक्त हुए है, दिसंबर में इसकी फाइनल रिपोर्ट लगेगी।
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निचले स्तर तक होती है मॉनीटिरिंग
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में क्षय रोग को लेकर हर स्तर से प्रयास किया जा रहा है। जिला स्तर पर सीएमओ और जिला क्षय अधिकारी द्वारा लगातार मॉनीटरिंग की जाती है। इसके बाद हर 2 लाख पर एक सीनियर ट्यूबर सुपरवाइजर की तैनाती है। इसके अलावा जनपद में 17 लैब और छह ट्यूबरोटिक प्रोसेसिंग यूनिट बनी है। जहां गंभीर मरीजों की जांच की जाती है। वहीं, आशा और एएनएम का भी सहयोग लिया जाता है।
टीबी मुक्त जनपद की ओर हम अग्रसित है। समाजसेवी, अधिकारियों के सहयोग से मरीजों को पोषण पोटली वितरित की जा रही है। टीबी मरीजों की मॉनिटरिंग निरंतर की जाती है। -- डॉ. एसके चक, सीएमओ भदोही
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जिले में इस समय करीब 1350 टीबी मरीज उपचाराधीन है। टीबी एक जटिल बीमारी है, लेकिन मरीज अगर नियमित दवा का सेवन करता है तो वह पूरी तरह से स्वस्थ भी हो सकता है। पहले जटिल मरीजों का उपचार करने में ढाई से तीन साल का समय लगता था। इससे मरीज परेशान हो कर बीच में ही दवा बंद कर देते थे। टीबी की दवा बीपाल आने के बाद अब करीब छह महीने में जटिल टीबी के मरीज स्वस्थ्य होने लगे हैं। सूबे के मुखिया बीते महीने जनपद के भ्रमण पर आए थे। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देशित किया कि नवंबर माह से पहले टीबी मुक्त जिला किया जाए। अभियान के तहत मरीजों की पहचान की जाए।
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16 गुना अधिक बीमारी का डर
टीबी निरोधक दवा के सेवन करने से मरीज के परिजन में टीबी जैसी गंभीर बीमारी नहीं होती है। टीबी के मरीजों में 16 गुना अधिक बीमारी होने का डर रहता है। इससे बचाव को लेकर इन्हें दवाई दी जा रही हैं। निरंतर इनकी मॉनीटरिंग स्वास्थ्य विभाग की तरफ से किया जाता है। जिला क्षय रोग अधिकारी ने डॉ. विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि 245 गांव टीबी मुक्त हो चुका है। जिसकी फाइन रिपोर्ट लग चुकी है। जबकि 155 गांव टीबी मुक्त हुए है, दिसंबर में इसकी फाइनल रिपोर्ट लगेगी।
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निचले स्तर तक होती है मॉनीटिरिंग
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में क्षय रोग को लेकर हर स्तर से प्रयास किया जा रहा है। जिला स्तर पर सीएमओ और जिला क्षय अधिकारी द्वारा लगातार मॉनीटरिंग की जाती है। इसके बाद हर 2 लाख पर एक सीनियर ट्यूबर सुपरवाइजर की तैनाती है। इसके अलावा जनपद में 17 लैब और छह ट्यूबरोटिक प्रोसेसिंग यूनिट बनी है। जहां गंभीर मरीजों की जांच की जाती है। वहीं, आशा और एएनएम का भी सहयोग लिया जाता है।
टीबी मुक्त जनपद की ओर हम अग्रसित है। समाजसेवी, अधिकारियों के सहयोग से मरीजों को पोषण पोटली वितरित की जा रही है। टीबी मरीजों की मॉनिटरिंग निरंतर की जाती है। -- डॉ. एसके चक, सीएमओ भदोही