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शहर से लेकर देहात तक की सड़कें कीचड़ से सनीं
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कालीन नगरी में शनिवार को देर रात से शुरू हुई बारिश रविवार को पूरे दिन रुक - रुक कर होती रही। इस दौरान तेज हवा चलने से जहां ठंड बढ़ गई है, वहीं फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। इससे दलहनी और तिलहनी फसलों की बुआई करने वाले किसानों की चिंता बढ़ गई है। शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक की सड़कें भी कीचड़ से सनी रहीं। इसके चलते लोगों को आवागमन में समस्याओं का सामना करना पड़ा।
पश्चिमी विक्षोभ के कारण जनवरी माह से पूर्व मौसम बदलने लगा था। इस बीच चार से पांच जनवरी तक आसमान में बादलों ने दस्तक दे दिया। छह और सात जनवरी को बूंदाबांदी संग बारिश हुई। शनिवार को दिन में सिर्फ बादल छाए रहे, लेकिन रात में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं और बारिश शुरू हो गई। अभोली के कुछ क्षेत्रों में ओले भी गिरे। रविवार को पूरे दिन रुक - रुक कर बारिश होती रही। इससे गेहूं, आलू, सरसों, दलहनी फसलों में पानी लग गया है। तेज हवा चलने से सरसों और दलहनी फसलों के फूल भी गिर गए। विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम इसी तरह बना रहा तो दलहनी- तिलहनी फसलें 40 से 50 फीसदी तक प्रभावित हो जाएंगी। बारिश के कारण ज्ञानपुर, सुरियावां, गोपीगंज, सीतामढ़ी, सुभाषनगर, भदोही, मोढ़ सहित अन्य बाजारों से लेकर ग्रामीण अंचलों की सड़कें कीचड़ से सन गईं। इससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। बारिश संग हवा चलने से गलन में भी इजाफा हो गया है. मौसम विशेषज्ञ सर्वेश बरनवाल का कहना है कि बादलों संग हल्की बूंदाबांदी आगे भी होगी। उन्होंने बताया कि 10 मिमी तक बारिश दर्ज की गई। जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार ने बताया हवा चलने से सरसों की फूल झड़ गई। अगर ऐसे ही मौसम आगे भी बना रहा तो दलहनी-तिलहनी फसल प्रभावित होगी। आलू में झुलसा रोग से बचाव के लिए किसान बारिश बंद होने पर मैंकोजेब का छिड़काव करें। उन्होंने बताया कि जिले में 14 हेक्टेयर में सरसों और छह हेक्टेयर में दलहनी खेती की गई है।
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पश्चिमी विक्षोभ के कारण जनवरी माह से पूर्व मौसम बदलने लगा था। इस बीच चार से पांच जनवरी तक आसमान में बादलों ने दस्तक दे दिया। छह और सात जनवरी को बूंदाबांदी संग बारिश हुई। शनिवार को दिन में सिर्फ बादल छाए रहे, लेकिन रात में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं और बारिश शुरू हो गई। अभोली के कुछ क्षेत्रों में ओले भी गिरे। रविवार को पूरे दिन रुक - रुक कर बारिश होती रही। इससे गेहूं, आलू, सरसों, दलहनी फसलों में पानी लग गया है। तेज हवा चलने से सरसों और दलहनी फसलों के फूल भी गिर गए। विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम इसी तरह बना रहा तो दलहनी- तिलहनी फसलें 40 से 50 फीसदी तक प्रभावित हो जाएंगी। बारिश के कारण ज्ञानपुर, सुरियावां, गोपीगंज, सीतामढ़ी, सुभाषनगर, भदोही, मोढ़ सहित अन्य बाजारों से लेकर ग्रामीण अंचलों की सड़कें कीचड़ से सन गईं। इससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। बारिश संग हवा चलने से गलन में भी इजाफा हो गया है. मौसम विशेषज्ञ सर्वेश बरनवाल का कहना है कि बादलों संग हल्की बूंदाबांदी आगे भी होगी। उन्होंने बताया कि 10 मिमी तक बारिश दर्ज की गई। जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार ने बताया हवा चलने से सरसों की फूल झड़ गई। अगर ऐसे ही मौसम आगे भी बना रहा तो दलहनी-तिलहनी फसल प्रभावित होगी। आलू में झुलसा रोग से बचाव के लिए किसान बारिश बंद होने पर मैंकोजेब का छिड़काव करें। उन्होंने बताया कि जिले में 14 हेक्टेयर में सरसों और छह हेक्टेयर में दलहनी खेती की गई है।
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