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बूंदाबांदी से भीगे खेत-खलिहान, उमस बढ़ी
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ज्ञानपुर। अप्रैल की तरह मई में भी मौसम हर रोज बदल रहा है। सोमवार को भोर में एक बार फिर मौसम के अंगड़ाई ली और बूंदाबांदी से किसानों की चिंता बढ़ी दी। उमस से लोगों का घरों में रहना मुश्किल हो गया है। कच्चे मार्गों पर कीचड़ से आवागमन प्रभावित हुआ है।
खेत-खलिहान के भीगने से भूसा और खेतों में 10 फीसद तक अधर में लटकी गेहूं फसल की कटाई-मड़ाई को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। अप्रैल में आधा दर्जन बार मौसम के उतार-चढ़ाव लेने का परिणाम यह रहा है कि आंधी के साथ गत दिनों हुई झमाझम बारिश से सभी वर्ग को बरसात का मौसम आने का संकेत दे दिया। सुबह से शुरू होने वाली चक्रवाती हवा, बारिश शाम तक समाप्त होते ही यह अनुमान लगाया जाने लगा। मौसम विशेषज्ञ भी किसानों को खेतीबारी में तेजी दिखाने, गरीब, मजदूर परिवारों के टूट-फूटे मड़हे-छप्पर को दुरुस्त कर लेने की सलाह दे रहे हैं। हवा और बूंदाबांदी के बीच कुछ किसान खेतों में डटे रहे।
आसमान में बादलों की दस्तक देर शाम तक दूर नहीं हो सका था। बादलों की उठापटक से खुले आसमान तले लोगों को थोड़ी राहत हवा से मिली लेेकिन घरों के अंदर बैठ पाना मुश्किल था। बीच-बीच होने वाली बिजली की कटौती कोढ़ में खाज का काम करने में कमी नहीं छोड़ा। किसान मो.नसीम, सुशील सिंह, रुपेश पांडेय, मुकेश पंडित, राजकुमार आदि ने बताया कि मड़ाई कार्य पूरा होने के बाद भी भूसा के बर्बाद होने का डर लगा हुआ है। किसान रमेश कुमार, भोनू, योगेंद्र कुमार, सुनील सिंह ने कहा कि बीघे-दो बीघे की खेती निबटाना शेष है लेकिन मौसम के आगे किसी की नहीं चल सकती।
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खेत-खलिहान के भीगने से भूसा और खेतों में 10 फीसद तक अधर में लटकी गेहूं फसल की कटाई-मड़ाई को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। अप्रैल में आधा दर्जन बार मौसम के उतार-चढ़ाव लेने का परिणाम यह रहा है कि आंधी के साथ गत दिनों हुई झमाझम बारिश से सभी वर्ग को बरसात का मौसम आने का संकेत दे दिया। सुबह से शुरू होने वाली चक्रवाती हवा, बारिश शाम तक समाप्त होते ही यह अनुमान लगाया जाने लगा। मौसम विशेषज्ञ भी किसानों को खेतीबारी में तेजी दिखाने, गरीब, मजदूर परिवारों के टूट-फूटे मड़हे-छप्पर को दुरुस्त कर लेने की सलाह दे रहे हैं। हवा और बूंदाबांदी के बीच कुछ किसान खेतों में डटे रहे।
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आसमान में बादलों की दस्तक देर शाम तक दूर नहीं हो सका था। बादलों की उठापटक से खुले आसमान तले लोगों को थोड़ी राहत हवा से मिली लेेकिन घरों के अंदर बैठ पाना मुश्किल था। बीच-बीच होने वाली बिजली की कटौती कोढ़ में खाज का काम करने में कमी नहीं छोड़ा। किसान मो.नसीम, सुशील सिंह, रुपेश पांडेय, मुकेश पंडित, राजकुमार आदि ने बताया कि मड़ाई कार्य पूरा होने के बाद भी भूसा के बर्बाद होने का डर लगा हुआ है। किसान रमेश कुमार, भोनू, योगेंद्र कुमार, सुनील सिंह ने कहा कि बीघे-दो बीघे की खेती निबटाना शेष है लेकिन मौसम के आगे किसी की नहीं चल सकती।
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