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उठान की रफ्तार धीमी, 34415.34 एमटी पहुंची धान की खरीद

Wed, 05 Jan 2022 11:18 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 05 Jan 2022 11:18 PM IST
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The pace of lifting slowed, the purchase of paddy reached 34415.34 MT
ज्ञानपुर। चार दिवसीय हड़ताल समाप्त होते ही 30 केंद्रों पर विपणन विभाग ने बुधवार तक 5886 किसानों से कुल 34415.34 एमटी धान की खरीद कर लिया है, लेकिन मिलरों तक धान की उठान की गति धीमी हो जाने से केंद्रों पर जगह का अभाव प्रभारियों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। वहीं लगभग 50 किसानों का समर्थन मूल्य का भुगतान तकनीकी पेंच के कारण फंस जाने से वह बैंक और केंद्र का चक्कर लगाने के लिए विवश हैं।
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बुधवार को राजकीय क्रय केंद्र की पड़ताल करने पर मौजूद मिले किसान रामाश्रय, कड़ेदीन, शिवनाथ, बालनाथ ने बताया कि आफ और ऑनलाइन टोकन व्यवस्था के चलते लगभग 10-15 दिनों से ऊपज का तौल कराना चाहते हैं जो संभव नहीं हो पा रहा था। काफी उठापटक के बाद नंबर लगा है। तौल कराकर ही वापस होंगे। केंद्र प्रभारी एसके पांडेय ने कहा कि केंद्र पर अब तक 40 हजार एमटी की खरीद 800 किसानों से हुई। 10 किसानों का भुगतान आधार में गड़बड़ी एनपीसीआई पोर्टल पर ईकेवाईसी न होने से नहीं हो सका है। किसानों को आधार की गड़बड़ी को दूर कराने, पोर्टल पर ईकेवीसी कराने का निर्देश दिया गया है। क्रय केंद्र ककराही-मंडी परिषद में लगभग 150 क्विंटल धान की खरीद बुधवार को कराकर प्रभारी आरती शुक्ला ने बताया कि अब तक 285 किसानों से लगभग 15000 क्विंटल की खरीद की जा चुकी है। 10 किसानों का भुगतान तकनीकी समस्या के कारण नहीं हो पा रहा है। तकनीकी समस्या दूर होने पर भुगतान ऑनलाइन खाते में हो जाएगा। जगह और बोरे की कमी के सवाल पर डिप्टी आरएमओ देवेंद्र सिंह ने कहा कि अब तक 60 फीसदी धान का उठान मिलरों तक कराकर बोरे की कमी को पूरा कराया जा रहा है। मिलर निर्धारित क्षमता से अधिक का उठान करने से हाथ खींच रहे हैं। जो बोरे केंद्रों पर उपलब्ध हैं वह सिर्फ धान की कुटाई के बाद चावल भरने तक सीमित हैं। यदि कोई केंद्र और संस्था भुगतान कर बोरे की डिमांड करते हैं तभी दिए जाने का प्रावधान है।
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मानकों को लेकर फंसता हैं पेंच
ज्ञानपुर। एफसीआई के गोदाम पर चावल उतरने के दौरान मानकों को लेकर अक्सर पेंच फंसता है। इस वजह से मिलर परेशान होते हैं। नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कुछ मिलरों ने बताया कि जब चावल गोदाम पर उतरने पहुंचता है तो मानक फेल बता दिया जाता है। जबकि केंद्र प्रभारी धान की खरीद 17 फीसदी, मिलर्स को 16 फीसदी का मानक तय कर खरीदारी और लदाई कराते हैं। एक वाहन का चावल फेल होने पर मिलर्स को लगभग 40 हजार का घाटा सहना पड़ रहा है। डिप्टी आरएमओ देवेंद्र सिंह ने कहा कि खरीदारी समेत उठान तक की पूरी निगरानी की जा रही है। एफसीआई की कार्यप्रणाली में सुधार लाने के लिए उच्चाधिकारियों को लिखापढ़ी कर दी गई है।
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