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अगले सत्र से चलेगा वस्त्र महाविद्यालय
ब्यूरो, भदोही, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 26 Oct 2016 01:50 AM IST
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ई- लाइब्रेरी के उद्घाटन के दौरान मंचासीन सांसद विरेंद्र सिंह मस्त
- फोटो : bhadoi
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सबकुछ ठीक रहा तो मखमली कालीनों के लिए विश्वविख्यात भदोही टेक्सटाइल का हब बन जाएगा। केंद्र सरकार ने टेक्सटाइल महाविद्यालय चलाने की स्वीकृति दे दी है, जबकि दिसंबर तक विश्वविद्यालय को हरी झंडी मिल जाएगी। विवि के लिए पिपरिस में 25 एकड़ जमीन चिन्हित कर ली गई है।
इसकी जानकारी सांसद वीरेंद्र सिंह ने मंगलवार को प्रोफेसर कालोनी में लायंस क्लब के पदाधिकारी अरविंद भट्टाचार्य के आवास पर पत्रकारों से बातचीत में दी है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन के लिए तीन अहम चीजें हैं। रोटी, कपड़ा और मकान। रोटी के लिए कई कृषि विश्वविद्यालय, मकान के लिए इंजीनियरिंग के विश्वविद्यालय हैं, लेकिन कपड़े के लिए कोई विश्वविद्यालय नहीं हैं।
पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी से इसके बारे में बातचीत की। केंद्रीय कपड़ा मंत्री ने टेक्सटाइल्स महाविद्यालय तुरंत चलाने की अनुमति दे दी, जबकि विश्वविद्यालय के लिए नवंबर तक इंतजार करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि पीजी की कक्षाएं आगामी सत्र से आईआईसीटी में चलाई जाएंगी।
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विश्वविद्यालय के लिए पिपरिस में 25 एकड़ जमीन देखी गई है। टेक्सटाइल्स विश्वविद्यालय बनने से देश ही नहीं विदेशी लोग भी यहां पढ़ने के लिए आएंगे। इससे पूर्वांचल में रोजगार सृजन के दरवाजे भी खुलेंगे।
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इसकी जानकारी सांसद वीरेंद्र सिंह ने मंगलवार को प्रोफेसर कालोनी में लायंस क्लब के पदाधिकारी अरविंद भट्टाचार्य के आवास पर पत्रकारों से बातचीत में दी है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन के लिए तीन अहम चीजें हैं। रोटी, कपड़ा और मकान। रोटी के लिए कई कृषि विश्वविद्यालय, मकान के लिए इंजीनियरिंग के विश्वविद्यालय हैं, लेकिन कपड़े के लिए कोई विश्वविद्यालय नहीं हैं।
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पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी से इसके बारे में बातचीत की। केंद्रीय कपड़ा मंत्री ने टेक्सटाइल्स महाविद्यालय तुरंत चलाने की अनुमति दे दी, जबकि विश्वविद्यालय के लिए नवंबर तक इंतजार करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि पीजी की कक्षाएं आगामी सत्र से आईआईसीटी में चलाई जाएंगी।
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विश्वविद्यालय के लिए पिपरिस में 25 एकड़ जमीन देखी गई है। टेक्सटाइल्स विश्वविद्यालय बनने से देश ही नहीं विदेशी लोग भी यहां पढ़ने के लिए आएंगे। इससे पूर्वांचल में रोजगार सृजन के दरवाजे भी खुलेंगे।