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मिनी सचिवालय में ताला, झोले में गांव की सरकार

Tue, 01 Feb 2022 12:06 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 01 Feb 2022 12:06 AM IST
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The lock on the mini secretariat, the government of the village in the bag
जिला मुख्यालय से सटे सरपतहां गांव के पंचायत भवन पर लटका ताला। संवाद - फोटो : BHADOHI
गांव के लोगों को आय, जाति या अन्य प्रमाणपत्र बनवाने के लिए तहसील या जिला मुख्यालय का चक्कर न लगाना पड़े, इसके लिए शासन ने हर ग्राम पंचायत में पंचायत भवन का निर्माण कराया है। प्रति पंचायत भवन पर 10 से 12 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। पंचायत सहायक भी नियुक्त किए गए हैं लेकिन इसका लाभ आम लोगों को नहीं मिल रहा है। हालत यह है कि अधिकतर पंचायत भवनों (मिनी सचिवालय) पर ताले लटक रहे हैं। ग्राम प्रधान अपने साथ झोले में मुहर और अन्य कागजात रखते हैं और जरूरत पड़ने पर किसी प्रमाणपत्र जारी कर देते हैं।
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सरकार की मंशा पंचायत भवन को मिनी सचिवालय के रूप में विकसित करना है, जहां ग्रामीणों की फरियाद सुनकर उनकी समस्याएं दूर की जा सकें। ग्राम पंचायत के कार्यों को आसान बनाने के लिए पंचायत सहायकों की नियुक्ति भी की गई। इसके बाद भी पंचायत भवनों की स्थिति यथावत ही है। अमर उजाला ने सोमवार को जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों की पड़ताल की तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। जहां से विकास विभाग की योजनाएं चलती हैं वहीं के पंचायत भवनों में ताला लटकता मिला। वहां के ग्राम प्रधानों से जब इसके बारे में पूछा गया तो पहले तो इधर-उधर की बात करके मामले को टालने की कोशिश की। वहीं कुछ जगह तो पंचायत भवन होने के बावजूद उसमें अस्पताल संचालित किया जा रहा है। स्थिति यह है कि ग्राम प्रधान मुहर और कागजात अपने साथ झोले में लिए घूमते हैं या घर बैठ कर काम करते हैं। जरूरत पड़ने पर किसी के कागजात को प्रमाणित करते हैं या प्रमाणपत्र जार करते हैं। एक तरह से गांव की सरकार पंचायत भवन में नहीं बल्कि झोले में है। ऐसी स्थिति 80 फीसदी ग्राम पंचायतों की है। जबकि गांव की सरकार झोले में है।
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जहां बैठते हैं अधिकारी, वहीं की दशा खराब
जिले के ग्रामीण क्षेत्र की बात दूर है। विकास विभाग से लेकर पंचायती राज विभाग के अधिकारी जहां बैठते हैं उसी ग्राम पंचायत की दशा खराब है। यहां सरपतहां गांव में कलेक्ट्रेट है। इस ग्राम पंचायत में बने पंचायत भवन में ताला बंद मिला। वहां के प्रधान गुलाबधर गौतम ने कहा कि पंचायत भवन खुलता है। वह दो-तीन दिन से बाहर गए थे। जब पंचायत सहायक और सचिव को लेकर सवाल किया गया तो बात टालने लगे। बताया कि पंचायत सहायक की तैनाती है। सचिव ज्ञानपुर से ही काम कर देते हैं। यहीं हाल वहां का है जहां से पंचायत भवनों की मानीटरिंग की जाती है। विकास भवन कंसापुर-भिदिउरा में है। कंसापुर के पंचायत भवन में भी ताला बंद मिला। वहां के प्रधान कोमल ने कहा कि वह कहीं गए थे, इसलिए पंचायत भवन बंद था। पंचायत भवन खुलता है। पंचायत सहायक के सवाल पर वह टालने लगे। कहा कि सचिव से बात की गई है। माधोसिंह के पंचायत भवन में यूनानी अस्पताल चलता है। वहां के प्रधान पति कहते हैं कि जब बैठक करनी होती है तो उसी में होती है। यही हाल अभोली ब्लाक के मसूधी ग्राम पंचायत की है। यहां के भी पंचायत भवन में ताला बंद मिला।
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