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Bhadohi News: ज्यादा मोबाइल चलाने की आदत युवाओं की याददाश्त को कर रहा कमजोर

Wed, 23 Sep 2026 01:03 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 23 Sep 2026 01:03 AM IST
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The habit of using mobile phones excessively is weakening the memory of the youth.
मेडिकल कॉलेज में न्यूरो विभाग की ओपीडी में इलाज कराने पहुंचे युवा मरीज
जिले इन दिनों युवाओं में भूलने की बीमारी का ग्राफ बढ़ा है। वर्तमान में मेडिकल कॉलेज और तीन निजी अस्पतालों के न्यूरो विभाग में हर दिन दस से अधिक ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जिनकी उम्र 40 वर्ष से कम है। जबकि अल्जाइमर की बीमारी 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में होती है। वर्तमान में यह बीमारी युवाओं में तेजी से बढ़ रही है। इसे डॉक्टर अर्ली ऑनसेट अल्जाइमर बता रहे हैं। डाॅक्टर का कहना है कि इस बीमारी के पीछे चिकित्सक मोबाइल का अधिक प्रयोग, किताब न पढ़ना और अनियमित दिनचर्या है।
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कल्पनाथ राय मेडिकल कॉलेज के न्यूरो सर्जन डॉ. नीतीश राय ने बताया कि अल्जाइमर रोग एक प्रगतिशील मस्तिष्क रोग है, जो याददाश्त, सोचने की क्षमता और व्यवहार को प्रभावित करता है। इसे पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता है, लेकिन दिनचर्या में बदलाव से इसे कम किया जा सकता है। बताया कि हर दिन मेडिकल कॉलेज में 30 से अधिक मरीज आ रहे हैं। इसमें दस मरीजों की उम्र 20 से 40 साल के बीच है।
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वहीं, नगर के एक निजी अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉक्टर विशाल ने बताया कि मोबाइल समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का प्रयोग अर्ली ऑनसेट अल्जाइमर को बढ़ा रहा है। साथ ही शारीरिक गतिविधि की कमी भी इस समस्या को बढ़ाती है। बताया कि इस तरह के मरीजों को किताब पढ़ने, शारीरिक व्यायाम, मानसिक विश्राम और योग करना चाहिए। बताया कि उम्र बढ़ने के साथ चीजें भूलना सामान्य माना जाता है, लेकिन हर भूलने को उम्र का असर समझकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं। बार-बार हाल की घटनाएं भूलना, परिचित जगह का रास्ता भूल जाना, बातचीत के दौरान सही शब्द याद न आना या रोजमर्रा के काम करने में परेशानी होने लगे तो यह डिमेंशिया या अल्जाइमर का शुरुआती संकेत हो सकता है। डॉ. नीतीश राय ने बताया कि उनके यहां अल्जाइमर के मरीजों में सबसे अधिक संख्या बुजुर्गों की होती है। यह बीमारी आनुवंशिक होती है, जो कि अल्जाइमर रोग डिमेंशिया का सबसे सामान्य रूप है। लेकिन चिंताजनक बात है कि इसकी चपेट में अब युवा आ रहे हैं।
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कभी-कभी कोई चीज भूलना अल्जाइमर नहीं : सीएमओ
सीएमओ डॉक्टर पंकज राय ने बताया कि डिमेंशिया केवल याददाश्त को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि सोचने, निर्णय लेने, बातचीत करने और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता पर भी असर डाल सकता है। बताया कि कभी-कभी कोई चीज भूलना अल्जाइमर नहीं है। जब भूलने की समस्या लगातार बढ़ने लगे और उसका असर रोजमर्रा के जीवन पर पड़ने लगे, तो यह चिंता की बात है। सीएमओ ने बताया कि उम्र डिमेंशिया का सबसे बड़ा कारक है। यह बीमारी 65 वर्ष से अधिक उम्र में ज्यादा दिखाई देती है। हालांकि, कम उम्र में भी डिमेंशिया हो सकता है। बीपी-शुगर नियंत्रित रखना, धूम्रपान, शराब का सेवन, सामाजिक अलगाव, मधुमेह और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल जैसे कारकों के कारण अल्जाइमर होने का खतरा रहता है।
ये हैं लक्षण
हाल की बातें या घटनाएं बार-बार भूलना,
परिचित रास्ते या जगह पर भटक जाना,
सामान बार-बार खोना या गलत जगह रखना, बातचीत में सामान्य शब्द याद न आना,
ये उपाय करें
नियमित रूप से किताब पढ़े, पहेलियां हल करें
नियमित शारीरिक गतिविधियां योग करें
परिवार और मित्रों के साथ समय बिताएं
पोषक तत्वों से भरपूर आहार लें
पर्याप्त नींद लें
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