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Bhadohi News: सुबह 8.45 तक नहीं पहुंचे थे डॉक्टर
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ज्ञानपुर। सीएमओ के निर्देश के बाद भी जिला अस्पताल में चिकित्सक समय से नहीं पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल में बृहस्पतिवार को 8.55 बजे तक अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं पहुंचा था। मरीज उनके आने का इंतजार कर रहे थे। जबकि सुबह आठ बजे से ओपीडी शुरू हो जाती है।
बृहस्पतिवार को अमर उजाला की टीम यह जानने का प्रयास की कि समय से पहुंचने के निर्देश का चिकित्सकों पर कितना असर है । लेकिन जिला अस्पताल में अमर उजाला की पड़ताल से यह पता चला कि चिकित्सकों के रवैये में कोई परिवर्तन नहीं आया है। 8.55 बजे तक अस्पताल में कोई चिकित्सक नहीं पहुंचा था ।
जिला अस्पताल में ओपीडी समय सुबह आठ से दो बजे तक है। अमर उजाला ने करीब 15 दिन पहले जिला अस्पताल की पड़ताल की थी। पड़ताल में करीब 10 बजे तक ओपीडी में 18 में 17 चिकित्सक अनुपस्थित थे। अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीज चिकित्सकों का इंतजार करते दिखे। अमर उजाला ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। जिसके बाद निवर्तमान जिलाधिकारी विशाल सिंह ने इसको नाराजगी जताई थी और सभी चिकित्सकों का वेतन रोककर स्पष्टीकरण मांगा था।
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सीएमओ डॉ. एसके चक ने भी सख्ती दिखाई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अस्पताल की ओपीडी में हर हाल में चिकित्सकों की उपस्थिति 8.30 बजे तक हो जानी चाहिए। डीएम की सख्ती और सीएमओ के निर्देश का चिकित्सकों पर कितना असर हुआ है। इसकी हकीकत जानने के लिए अमर उजाला की टीम बृहस्पतिवार को करीब 8.45 बजे ओपीडी में पहुंची। 8.45 बजे तक ओपीडी में करीब 60 से 70 मरीज पहुंचे होंगे, लेकिन चिकित्सक एक भी नहीं पहुंचे थे। टीम करीब 15 मिनट तक अस्पताल में मौजूद रही। इस दौरान 8.55 बजे एक चिकित्सक अस्पताल में पहुंचे। इस दौरान मरीज और तीमारदार चिकित्सकों का इंतजार करते दिखे।
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क्यों जरूरी है चिकित्सकों का समय से बैठना
जिला अस्पताल जनपद का सबसे बड़ा अस्पताल है। इन दिनों ओपीडी में मरीजों की भीड़ भी बढ़ी है। अस्पताल में जिले भर से मरीज और तीमारदार आते हैं। 15 से 20 किमी दूर से आने वाले मरीज भीषण गर्मी में धूप से बचने के लिए सुबह ही आ जाते हैं। जिससे कि वे समय से चिकित्सकों को दिखाकर घर पहुंच सके। इससे वे धूप और अस्पताल की भीड़ से बच जाएंगे, लेकिन चिकित्सकों की लेटलतीफी के कारण मरीज और तीमारदारों को परेशान होना पड़ता है।
सर्जन डॉ. धीरज सिंह, नेत्र के प्रदीप सिंह और डॉ. सुरेंद बिंद, फिजिशियन डॉ. प्रदीप यादव, त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय मौर्य, डॉ. विनोद कुमार यादव, आर्थो डाॅ. एसके शर्मा, डेंटल के डॉ. अरविंद प्रताप यादव, महिला डॉ. वर्तिका अग्रवाल, डॉ. लक्ष्मी देवी, नितिशा पांडेय, डॉ. निलिमा धवन, फिजियोथेरेपिस्ट आतिफ अंसारी, रेडियोलॉजिस्ट डॉ.एके पांडेय आदि डॉक्टर 8.45 बजे तक ओपीडी भवन में नहीं पहुंचे।
पेट में दर्द था, पर्चा कटवाने के बाद डॉक्टर को दिखाने ओपीडी भवन में आई। यहां कोई डॉक्टर नहीं दिखे। एक आदमी से पूछा तो कहा अभी थोड़ी देर में आ जाएंगे। सुबह घर से जल्द निकली थी कि समय से डॉक्टर को दिखाकर वापस लौट आएंगे।-- सुनीता यादव, ऊंज।
जोड़ों में दर्द है, उठने बैठने और चलने में दिक्कत होती है। हड्डी वाले डॉक्टर को दिखाने आया हूं, लेकिन ओपीडी कोई डॉक्टर नहीं है, उन्हें दिखाने के बाद दवा लूंगा। यहां समय से डॉक्टर नहीं मिलते हैं।-- रामधनी निवासी चकवा, घनश्याम।
जिला अस्पताल में निरंतर ड्यूटी के प्रति डाॅक्टर लापरवाही बरत रहे हैं। इस संदर्भ में डीएम साहब को अवगत कराया जाएगा। उनके दिशा निर्देश पर चिकित्सकों पर कार्रवाई तय की जाएगी।-- डाॅ. एसके चक, सीएमओ, भदोही।
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बृहस्पतिवार को अमर उजाला की टीम यह जानने का प्रयास की कि समय से पहुंचने के निर्देश का चिकित्सकों पर कितना असर है । लेकिन जिला अस्पताल में अमर उजाला की पड़ताल से यह पता चला कि चिकित्सकों के रवैये में कोई परिवर्तन नहीं आया है। 8.55 बजे तक अस्पताल में कोई चिकित्सक नहीं पहुंचा था ।
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जिला अस्पताल में ओपीडी समय सुबह आठ से दो बजे तक है। अमर उजाला ने करीब 15 दिन पहले जिला अस्पताल की पड़ताल की थी। पड़ताल में करीब 10 बजे तक ओपीडी में 18 में 17 चिकित्सक अनुपस्थित थे। अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीज चिकित्सकों का इंतजार करते दिखे। अमर उजाला ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। जिसके बाद निवर्तमान जिलाधिकारी विशाल सिंह ने इसको नाराजगी जताई थी और सभी चिकित्सकों का वेतन रोककर स्पष्टीकरण मांगा था।
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सीएमओ डॉ. एसके चक ने भी सख्ती दिखाई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अस्पताल की ओपीडी में हर हाल में चिकित्सकों की उपस्थिति 8.30 बजे तक हो जानी चाहिए। डीएम की सख्ती और सीएमओ के निर्देश का चिकित्सकों पर कितना असर हुआ है। इसकी हकीकत जानने के लिए अमर उजाला की टीम बृहस्पतिवार को करीब 8.45 बजे ओपीडी में पहुंची। 8.45 बजे तक ओपीडी में करीब 60 से 70 मरीज पहुंचे होंगे, लेकिन चिकित्सक एक भी नहीं पहुंचे थे। टीम करीब 15 मिनट तक अस्पताल में मौजूद रही। इस दौरान 8.55 बजे एक चिकित्सक अस्पताल में पहुंचे। इस दौरान मरीज और तीमारदार चिकित्सकों का इंतजार करते दिखे।
क्यों जरूरी है चिकित्सकों का समय से बैठना
जिला अस्पताल जनपद का सबसे बड़ा अस्पताल है। इन दिनों ओपीडी में मरीजों की भीड़ भी बढ़ी है। अस्पताल में जिले भर से मरीज और तीमारदार आते हैं। 15 से 20 किमी दूर से आने वाले मरीज भीषण गर्मी में धूप से बचने के लिए सुबह ही आ जाते हैं। जिससे कि वे समय से चिकित्सकों को दिखाकर घर पहुंच सके। इससे वे धूप और अस्पताल की भीड़ से बच जाएंगे, लेकिन चिकित्सकों की लेटलतीफी के कारण मरीज और तीमारदारों को परेशान होना पड़ता है।
सर्जन डॉ. धीरज सिंह, नेत्र के प्रदीप सिंह और डॉ. सुरेंद बिंद, फिजिशियन डॉ. प्रदीप यादव, त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय मौर्य, डॉ. विनोद कुमार यादव, आर्थो डाॅ. एसके शर्मा, डेंटल के डॉ. अरविंद प्रताप यादव, महिला डॉ. वर्तिका अग्रवाल, डॉ. लक्ष्मी देवी, नितिशा पांडेय, डॉ. निलिमा धवन, फिजियोथेरेपिस्ट आतिफ अंसारी, रेडियोलॉजिस्ट डॉ.एके पांडेय आदि डॉक्टर 8.45 बजे तक ओपीडी भवन में नहीं पहुंचे।
पेट में दर्द था, पर्चा कटवाने के बाद डॉक्टर को दिखाने ओपीडी भवन में आई। यहां कोई डॉक्टर नहीं दिखे। एक आदमी से पूछा तो कहा अभी थोड़ी देर में आ जाएंगे। सुबह घर से जल्द निकली थी कि समय से डॉक्टर को दिखाकर वापस लौट आएंगे।
जोड़ों में दर्द है, उठने बैठने और चलने में दिक्कत होती है। हड्डी वाले डॉक्टर को दिखाने आया हूं, लेकिन ओपीडी कोई डॉक्टर नहीं है, उन्हें दिखाने के बाद दवा लूंगा। यहां समय से डॉक्टर नहीं मिलते हैं।
जिला अस्पताल में निरंतर ड्यूटी के प्रति डाॅक्टर लापरवाही बरत रहे हैं। इस संदर्भ में डीएम साहब को अवगत कराया जाएगा। उनके दिशा निर्देश पर चिकित्सकों पर कार्रवाई तय की जाएगी।