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Bhadohi News: कालीन नगरी में काफी करीबी रहे हैं निकाय चुनाव के मुकाबले

Tue, 06 Dec 2022 07:30 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 06 Dec 2022 07:30 AM IST
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The carpet has been very close in the city as compared to the body elections
ज्ञानपुर। जिले की दो नगर पालिका और नगर पंचायत की पांच सीटों पर 2017 में हुए चुनाव के मुकाबले काफी दिलचस्प रहे थे। सभी मुकाबले इतने करीबी रहे कि आखिरी तक प्रत्याशियों को यह अनुमान नहीं हो पाया था कि किसका पलड़ा भारी होगा। 2017 के चुनाव में जिले की सात में दो पर निर्दल, दो भाजपा और तीन पर सपा की जीत हुई थी। हालांकि सभी सीटों पर कड़े मुकाबले देखने को मिले थे।
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भदोही नगर पालिका में बीजेपी के अशोक जायसवाल ने कड़े मुकाबले में सपा हसनैन अंसारी को 205 मतों से पराजित किया था। गोपीगंज नगर पालिका में भी कड़ी टक्कर देखने को मिली थी। इसमें निर्दल प्रत्याशी प्रहृलाद दास गुप्ता ने कांग्रेस के माबूद खां को 209 मतों से शिकस्त दी थी। हालांकि प्रह्लाद दास गुप्ता ने बाद में भाजपा ज्वाइन कर लिया। इसी तरह ज्ञानपुर नगर पंचायत में भाजपा के हीरालाल मौर्या ने सपा के घनश्याम दास गुप्ता को 915 मतों से हराया था। सुरियावां में सपा के गोरेलाल ने भाजपा के गुलाब को 540 मतों से पटकनी दी थी।
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घोसिया बाजार में निर्दल प्रत्याशी रजिया ने सपा के उम्मीदवार बेबी को 576 वोटों से हराया था। खमरिया में सपा के नंद मौर्य ने बसपा के महमूद आलम को 235 मत से शिकस्त थी। नंद मौर्य को भ्रष्टाचार के मामले में बर्खास्त कर दिया गया है। इस समय खमरिया नगर पंचायत की कमान प्रशासक के हाथ में हैं। नई बाजार में सपा के उम्मीदवार विजय सोनकर ने भाजपा के लालजी को केवल 36 मतों से शिकस्त दी थी। इस तरह देखा जाये तो कालीन नगर में सभी सीटों पर कड़ा मुकाबला देखने को मिला था।
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ज्ञानपुर। निकाय चुनावों की तैयारियां शुरू हो गई हैं। वार्डों के बाद अब नगर निकाय के अध्यक्ष पदों की सूची जारी की जा चुकी है। इस बार जिले की दो नगर पालिका और पांच नगर पंचायतों में से कोई भी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नहीं हुई है। सात में पांच सीट सामान्य वर्ग और दो सीट अन्य पिछड़ा वर्ग के खाते में गई है।
आरक्षण सूची जारी होते ही भावी उम्मीदवार अपनी-अपनी गोटी सेट करने में जुट गए हैं। बड़े नेताओं की गणेश परिक्रमा भी आरंभ कर दी है। टिकट के लिए सबसे अधिक भीड़ सत्ताधारी दल भाजपा के साथ समाजवादी पार्टी के यहां हैं। हालांकि चुनावी रण में बसपा, कांग्रेस और आदमी पार्टी के प्रभाव को भी कोई नहीं नकार सकता। बात करें निर्दल की तो लोकल चुनाव होने के कारण उनका भी महत्व है। अक्सर पार्टी से टिकट न मिलने से नाराज होकर बागी उम्मीदवार के तौर में चुनावी रण में उतरते हैं और बाजी मार ले जाते हैँ। जिले की सातों निकायों में सपा की अच्छी पैठ मानी जाती है। 2017 के चुनाव में उसने जिले की सात सीटों में तीन सीटों पर कब्जा जमाया था। ज्ञानपुर में वे भाजपा से शिकस्त खा गए थे। भाजपा ने भी भदोही और ज्ञानपुर की सीट पर कब्जा जमाया था।

बात करें निर्दल प्रत्याशियों की तो वे खुद के बूते पर चुनाव के मैदान में उतरे थे और घोसिया और गोपीगंज की सीट पर कब्जा जमाया था। इस तरह देखा जाये तो कालीन नगरी में भारतीय जनता पार्टी को सत्ता में रहने का कुछ फायदा दिखता है। जातीय समीकरण के आधार पर सपा की अच्छी पैठ मानी जाती है।
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