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अहंकारियों का संहार करते थे परशुराम
ब्यूरो, भदोही, अमर उजाला
Updated Tue, 21 Apr 2015 11:42 PM IST
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भगवान परशुराम की जयंती मंगलवार को जिले के विभिन्न हिस्सों में मनाई गई। प्रभु के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया गया।
हरिहरनाथ मंदिर के समीप स्थित परशुराम चबूतरा पर मंगलवार को भगवान परशुराम की जयंती मनाई गई। पं. त्यागी जी महाराज ने वैदिक रीति रिवाज से भगवान की पूजा की। गिरजाशंकर तिवारी, ब्रह्मजीत शुक्ला, रामेश्वर उपाध्याय, डॉ. अशोक पाठक आदि मौजूद रहे। वहिदानगर संवाददाता के अनुसार, परशुराम जन कल्याण समिति की ओर से अखिलेश्वरनाथ मंदिर पर परशुराम की जयंती मनाई गई।
श्रवण मिश्रा, शशिकांत दूबे, संतोष पांडेय, शिव कुमार पांडेय आदि रहे। घोसिया संवाददाता के अनुसार, माधोसिंह बाजार में सपानेत्री ओंतिका मिश्रा के नेतृत्व में भगवान परशुराम की जयंती मनाई गई। धर्मेंद्र, बद्रीनाथ पांडेय, गजेंद्र दूबे, रजनीश तिवारी, दिलीप दूबे आदि मौजूद रहे। गायत्री परिवार की ओर से मंगलवार को विचार क्रांति अभियान के तहत भगवान परशुराम की जयंती पर्व का आयोजन किया गया। बीएचयू के डॉ.आरके शुक्ला ने कहा कि परशुराम महान पितृभक्त, आज्ञाकारी और देवपुरूष थे। वर्तमान में इसी तरह के दैवीय पुरुषों की आवश्यकता है। अनुराग सिंह ने कहा कि त्रेता में शक्ति से मस्तिष्क का परिवर्तन किया गया। परशुराम के चित्र की स्थापना, संगीत, गायत्री यज्ञ, संकल्प कार्यक्रम भी हुआ। कार्यक्रम भमौरा, परशुरामपुर, जगन्नाथपुर, ज्ञानपुर,हरीपट्टी, दीनानाथपुर, आदि स्थानों पर संपन्न हुआ।
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हरिहरनाथ मंदिर के समीप स्थित परशुराम चबूतरा पर मंगलवार को भगवान परशुराम की जयंती मनाई गई। पं. त्यागी जी महाराज ने वैदिक रीति रिवाज से भगवान की पूजा की। गिरजाशंकर तिवारी, ब्रह्मजीत शुक्ला, रामेश्वर उपाध्याय, डॉ. अशोक पाठक आदि मौजूद रहे। वहिदानगर संवाददाता के अनुसार, परशुराम जन कल्याण समिति की ओर से अखिलेश्वरनाथ मंदिर पर परशुराम की जयंती मनाई गई।
श्रवण मिश्रा, शशिकांत दूबे, संतोष पांडेय, शिव कुमार पांडेय आदि रहे। घोसिया संवाददाता के अनुसार, माधोसिंह बाजार में सपानेत्री ओंतिका मिश्रा के नेतृत्व में भगवान परशुराम की जयंती मनाई गई। धर्मेंद्र, बद्रीनाथ पांडेय, गजेंद्र दूबे, रजनीश तिवारी, दिलीप दूबे आदि मौजूद रहे। गायत्री परिवार की ओर से मंगलवार को विचार क्रांति अभियान के तहत भगवान परशुराम की जयंती पर्व का आयोजन किया गया। बीएचयू के डॉ.आरके शुक्ला ने कहा कि परशुराम महान पितृभक्त, आज्ञाकारी और देवपुरूष थे। वर्तमान में इसी तरह के दैवीय पुरुषों की आवश्यकता है। अनुराग सिंह ने कहा कि त्रेता में शक्ति से मस्तिष्क का परिवर्तन किया गया। परशुराम के चित्र की स्थापना, संगीत, गायत्री यज्ञ, संकल्प कार्यक्रम भी हुआ। कार्यक्रम भमौरा, परशुरामपुर, जगन्नाथपुर, ज्ञानपुर,हरीपट्टी, दीनानाथपुर, आदि स्थानों पर संपन्न हुआ।
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