ज्ञानपुर। टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के आह्वान पर सोमवार को शिक्षकों ने टीईटी अनिवार्यता के विरोध में काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य किया।
इस दौरान शिक्षकों ने अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, व्हाट्सएप और ट्विटर पर साझा किया। संगठन के अखिलेश यादव, अरुण पांडेय ने कहा कि साल 2011 के बाद टीईटी की अनिवार्यता अनुचित है। उन्होंने तर्क दिया कि जब उनकी नियुक्ति हुई थी, तब के विज्ञापन में निर्धारित योग्यताएं उन्होंने पूरी की थी। 15 से 20 वर्षों की सेवा के बाद टीईटी की अनिवार्यता थोपना गलत है। कहा कि शिक्षकों के जीवन के इस पड़ाव में 50, 55, 57 वर्ष की उम्र वालों को याद करने की क्षमता नैसर्गिक रूप से स्वत: कम हो जाती हैं। ऐसे में तैयारी करना कठिन कार्य है।