गोपीगंज। पूर्वोत्तर रेलवे का विशेष फाटक नंबर 38 ए सोमवार को लगभग आठ घंटे बंद रहने के कारण राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वाहन चालकों का रास्ता बदलकर गंतव्य तक जाना पड़ा। लोगों में इस बात की नाराजगी रही कि वाराणसी रेल मंडल के तहत आने वाले बनारस-प्रयागराज रेल खंड पर लगभग आठ सौ करोड़ रुपये खर्च कर दोहरीकरण-विद्युतीकरण समेत अन्य कार्य कराए जा रहे हैं, लेकिन जनहित के मामलों में रेल अधिकारी फाटकों को बंद करने से पहले पूर्व में जानकारी तक नहीं देते हैं। मात्र सुरक्षा बलों के भरोसे कभी ट्रैक का नवीनीकरण तो कभी स्लीपर लगाने का कार्य शुरू कर दिया जाना लोगों की परेशानी का कारण बनता है। सोमवार को सुबह मंडी परिषद ककराही से मिर्जापुर, सोनभद्र, विंध्याचल, चील्ह घाट, मवैया, पड़री आदि स्थानों पर जाने वाले संतोष, अभिषेक, अरुणेश, धनंजय, करुणा शंकर, ममता देवी, शिवदेई ने बताया कि बिना किसी सूचना के उक्त रेल फाटक को बंद कराकर ट्रैक को बदला जा रहा था। ऐसी स्थिति में उन्हें पैदल भी पार कर पाना मुश्किल हो रहा था। बाइक साइकिल, चार पहिया वाहन चालकों को पूर्वी-पश्चिमी छोर के चार-पांच किलोमीटर का चक्कर लगाकर ही मिर्जापुर की ओर रवाना होना पड़ा। जबकि उक्त फाटक मार्ग भदोही जिले के साथ ही दक्षिणी छोर के गैर प्रांतीय महानगरों को जोड़ता है और सुबह से देर रात तक वाहनों की आवाजाही लगी रहती है। मंडी परिषद होने के चलते व्यापारी सामान भी दूरदराज क्षेत्र से लोड कर आते हैं। ऐसी स्थिति में पूर्व सूचना के बगैर आठ घंटे तक रेल फाटक बंद रखना समस्या का कारण बनता है। मुख्य रेल पथ निरीक्षक एके सिंह ने बताया कि सिविल पुलिस के साथ आरपीएफ को सूचना देकर ही ट्रैक बदलने के लिए सुबह नौ से शाम पांच बजे तक ब्लॉक लिया गया था। शाम पांच बजे तक कार्य पूरा होने पर आवागमन सुचारु कर दिया गया।