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कहीं लटके हैं तार तो कहीं बांस-बल्ली के सहारे बिजली आपूर्ति
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सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर बिजली व्यवस्था में सुधार की कोशिश कर रही है, वहीं कालीन नगरी में बिजली व्यवस्था की स्थिति यह है कि गांवों में बिजली आपूर्ति बांस बल्ली के सहारे हो रही है। लटकते तारों से भी लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। बिजली के खंभे और तार जर्जर हो चुके हैं।
ज्ञानपुर में विद्युत निगम के उपकेंद्र के पास से होकर पुरानी देहाती की ओर जाने वाली गली में लटके केबल हादसे को दावत दे रहे हैं। आलम यह है कि जमीन से करीब छह फीट की ऊंचाई पर ही ये तार लटके हुए हैं। कई बार तो सामान लेकर उस गली से आवागमन करने के दौरान लोग तारों में फंस भी जाते हैं। इसके बावजूद विभागीय प्रशासन इस समस्या के प्रति उदासीन बना हुआ है। उधर, जिले में कई ऐसे गांव हैं, जहां बांस-बल्ली के सहारे बिजली पहुंच रही है। ज्ञानपुर में पुलिस लाइन के सामने जीआईसी स्टेडियम के पास बिजली का खंभा, सूखे पेड़ से सटा हुआ है। उसी के पास खंभे में बंधे केबल मकड़ी के जाल की तरह हैं। यहां शार्ट सर्किट की आशंका बनी रहती है। कई जगह लोगों की सुरक्षा की दृष्टिकोण से मेन तार में जो बांस की फट्टियां लगाई गई हैं, उनमें से अधिकांश टूटी हैं व सड़ गई हैं। इसके चलते तार ढीले होकर लटक रहे हैं। डीघ ब्लॉक के दरवांसी गांव में बांस के ऊपर लकड़ी जोड़कर उस पर केबल बांधा गया है। सुफीनगर रोड से नई बस्ती तक करीब 300 मीटर दूरी तक इसी तरह से दोनों पटरी पर करंट दौड़ाया गया है। ग्रामीण बताते हैं कि कई बार शार्ट सर्किट से तार टूट भी चुका है। अधिशासी अभियंता अमर सिंह का कहना है कि बांस के सहारे हो रहे बिजली आपूर्ति से संबंधित गांव चिह्नित किए गए हैं। चुनाव बाद खंभा लगाने का कार्य किया जाएगा। साथ ही जो भी कमियां हैं, उन्हें भी जल्द ही दूर कराया जाएगा।
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ज्ञानपुर में विद्युत निगम के उपकेंद्र के पास से होकर पुरानी देहाती की ओर जाने वाली गली में लटके केबल हादसे को दावत दे रहे हैं। आलम यह है कि जमीन से करीब छह फीट की ऊंचाई पर ही ये तार लटके हुए हैं। कई बार तो सामान लेकर उस गली से आवागमन करने के दौरान लोग तारों में फंस भी जाते हैं। इसके बावजूद विभागीय प्रशासन इस समस्या के प्रति उदासीन बना हुआ है। उधर, जिले में कई ऐसे गांव हैं, जहां बांस-बल्ली के सहारे बिजली पहुंच रही है। ज्ञानपुर में पुलिस लाइन के सामने जीआईसी स्टेडियम के पास बिजली का खंभा, सूखे पेड़ से सटा हुआ है। उसी के पास खंभे में बंधे केबल मकड़ी के जाल की तरह हैं। यहां शार्ट सर्किट की आशंका बनी रहती है। कई जगह लोगों की सुरक्षा की दृष्टिकोण से मेन तार में जो बांस की फट्टियां लगाई गई हैं, उनमें से अधिकांश टूटी हैं व सड़ गई हैं। इसके चलते तार ढीले होकर लटक रहे हैं। डीघ ब्लॉक के दरवांसी गांव में बांस के ऊपर लकड़ी जोड़कर उस पर केबल बांधा गया है। सुफीनगर रोड से नई बस्ती तक करीब 300 मीटर दूरी तक इसी तरह से दोनों पटरी पर करंट दौड़ाया गया है। ग्रामीण बताते हैं कि कई बार शार्ट सर्किट से तार टूट भी चुका है। अधिशासी अभियंता अमर सिंह का कहना है कि बांस के सहारे हो रहे बिजली आपूर्ति से संबंधित गांव चिह्नित किए गए हैं। चुनाव बाद खंभा लगाने का कार्य किया जाएगा। साथ ही जो भी कमियां हैं, उन्हें भी जल्द ही दूर कराया जाएगा।
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