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स्टेशनों पर शो पीस बने शीतल पेयजल बूथ
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प्रचंड गर्मी में स्टेशनों पर शीतल पेयजल स्टैंड शो पीस नजर आ रहे हैं। कई महीने से उत्तर और पूर्वोत्तर के स्टेशनों पर तकनीकी गड़बड़ी से बंद पड़े फ्रीजर नहीं बदले जा सके हैं। इनके बदले जाने के आसार भी नजर नहीं आ रहे हैं।
पूर्वोत्तर रेलवे के माधोसिंह-रामबाग रेलखंड स्थित ज्ञानपुर रोड स्टेशन से यात्रा करने वाले यात्री राकेश, सिद्धेश, अनूप, ओमकार ने बताया कि दो वर्ष तक वैश्विक महामारी के नाम पर ट्रेनों का परिचालन बंद रहा। अनलॉक में चलाई जा रही विशेष और ग्रीष्म कालीन ट्रेनों में यह स्थिति है कि यात्रियों को खड़े होकर आना-जाना पड़ रहा है। उमस भरी गर्मी का सीजन होने से स्टेशनों पर बैठ कर ट्रेन का इंतजार करते तमाम यात्रियों के हलक सूख जा रहे हैं। रेलखंड का आधुनिकीकरण होने पर लोगों की उम्मीद थी कि व्यवस्था में बदलाव होेने के साथ ही यात्री सुविधाओं में भी इजाफा होगा, लेकिन खास तौर से पेयजल की समस्या अधिकांश स्टेशनों पर जस की तस बनी हुई है। प्लेटफार्म नंबर एक के पश्चिमी छोर पर लगा शीतल पेयजल स्टैंड सिर्फ दिखावे के लिए है। यह शीतल पेयजल स्टैंड कई माह से खराब पड़ा है। प्लेटफार्मर नंबर दो पर हजारों रुपये खर्च कर तीन माह पूर्व लगी कई पेयजल टोटियां रखरखाव के अभाव में टूट चुकी हैं। इसके चलते यात्रियों को स्टेशन व ट्रेनों के अंदर प्यास बुझाने के लिए पानी की बोतल पर धनराशि खर्च करनी पड़ रही है। पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल के जनसंपर्क अधिकारी अशोक कुमार का कहना है कि तीन दिन में स्टेशनों पर पेयजल व्यवस्था चुस्त दुरुस्त मिलेगी।
उधर, आधुनिकीकरण की भेंट चढ़ चुके पूर्वोत्तर रेलवे के कर्मचारी विहीन हाल्ट बदहाल हैं। जंगीगंज हाल्ट पर मौजूद यात्री रमेश कुमार ने बताया कि एकमात्र टिकट एजेंट सुबह-शाम टिकट बिक्री के बाद चले जाते हैं। उसके बाद लगभग एक किलोमीटर के दायरे में फैले हाल्ट पर सन्नाटा रहता है। यही स्थिति अहिमनपुर, सरायजगदीश, अलमऊ, बहेड़वा की है। यहां यात्रियों के लिए पेयजल, शौचालय, फुट ओवरब्रिज तक की सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल के जन संपर्क अधिकारी वाराणसी अशोक कुमार ने कहा कि हाल्ट के रूप में विकसित स्टेशनों का रखरखाव पूर्वी-पश्चिमी छोर के स्टेशन से होती है। शिकायत पर कर्मचारी आकर हर तरह की समस्याओं की रिपोर्ट मंडल प्रशासन को सौंपते हैं। फुट ओवरब्रिज का निर्माण आने वाले समय में होगा।
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पूर्वोत्तर रेलवे के माधोसिंह-रामबाग रेलखंड स्थित ज्ञानपुर रोड स्टेशन से यात्रा करने वाले यात्री राकेश, सिद्धेश, अनूप, ओमकार ने बताया कि दो वर्ष तक वैश्विक महामारी के नाम पर ट्रेनों का परिचालन बंद रहा। अनलॉक में चलाई जा रही विशेष और ग्रीष्म कालीन ट्रेनों में यह स्थिति है कि यात्रियों को खड़े होकर आना-जाना पड़ रहा है। उमस भरी गर्मी का सीजन होने से स्टेशनों पर बैठ कर ट्रेन का इंतजार करते तमाम यात्रियों के हलक सूख जा रहे हैं। रेलखंड का आधुनिकीकरण होने पर लोगों की उम्मीद थी कि व्यवस्था में बदलाव होेने के साथ ही यात्री सुविधाओं में भी इजाफा होगा, लेकिन खास तौर से पेयजल की समस्या अधिकांश स्टेशनों पर जस की तस बनी हुई है। प्लेटफार्म नंबर एक के पश्चिमी छोर पर लगा शीतल पेयजल स्टैंड सिर्फ दिखावे के लिए है। यह शीतल पेयजल स्टैंड कई माह से खराब पड़ा है। प्लेटफार्मर नंबर दो पर हजारों रुपये खर्च कर तीन माह पूर्व लगी कई पेयजल टोटियां रखरखाव के अभाव में टूट चुकी हैं। इसके चलते यात्रियों को स्टेशन व ट्रेनों के अंदर प्यास बुझाने के लिए पानी की बोतल पर धनराशि खर्च करनी पड़ रही है। पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल के जनसंपर्क अधिकारी अशोक कुमार का कहना है कि तीन दिन में स्टेशनों पर पेयजल व्यवस्था चुस्त दुरुस्त मिलेगी।
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उधर, आधुनिकीकरण की भेंट चढ़ चुके पूर्वोत्तर रेलवे के कर्मचारी विहीन हाल्ट बदहाल हैं। जंगीगंज हाल्ट पर मौजूद यात्री रमेश कुमार ने बताया कि एकमात्र टिकट एजेंट सुबह-शाम टिकट बिक्री के बाद चले जाते हैं। उसके बाद लगभग एक किलोमीटर के दायरे में फैले हाल्ट पर सन्नाटा रहता है। यही स्थिति अहिमनपुर, सरायजगदीश, अलमऊ, बहेड़वा की है। यहां यात्रियों के लिए पेयजल, शौचालय, फुट ओवरब्रिज तक की सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल के जन संपर्क अधिकारी वाराणसी अशोक कुमार ने कहा कि हाल्ट के रूप में विकसित स्टेशनों का रखरखाव पूर्वी-पश्चिमी छोर के स्टेशन से होती है। शिकायत पर कर्मचारी आकर हर तरह की समस्याओं की रिपोर्ट मंडल प्रशासन को सौंपते हैं। फुट ओवरब्रिज का निर्माण आने वाले समय में होगा।
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