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आयुर्वेद एवं यूनानी का पंजीयन, चला रहे नर्सिंग होम
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ज्ञानपुर। जिले में आयुर्वेद और यूनानी पद्धति से पंजीयन कराकर कई डॉक्टर ऐलौपैथ विधा में प्रैक्टिस कर रहे हैं। ऐसे क्लीनिक पर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। घटना होने के बाद भी विभाग की नींद खुलती है, हालांकि छह महीने में सात से अधिक क्लीनिक पर कार्रवाई की गई है।
स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के लिए सरकार गंभीर है। इसके लिए तमाम सुविधाएं भी बढ़ाई जा रही हैं। इसके बाद भी जिले में मरीजों के जीवन से कुछ चिकित्सक और झोलाछाप खिलवाड़ कर रहे हैं। एलोपैथ का मानक पूरा न करने पर कुछ संचालक यूनानी और आयुर्वेदिक पद्धति का पंजीकरण कराकर धड़ल्ले से क्लीनिक और नर्सिंग होम चला रहे हैं। ग्रामीण अंचलों में ऐसे क्लीनिक की संख्या अधिक है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, जिले में एलोपैथ पद्धति के कुल 135 क्लीनिक पंजीकृत हैं। इसमें महज 86 नर्सिंग होम है। शेष प्राइवेट ओपीडी और पैथालॉजी का रजिस्ट्रेशन किया गया है। क्षेत्रीय आयुर्वेद और यूनानी अधिकारी कार्यालय से 350 से अधिक नर्सिंग होम का पंजीकरण किया गया है, लेकिन ये नर्सिंग होम एलोपैथ की प्रैक्टिस करते हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से ऐसे क्लीनिक पर कार्रवाई नहीं होती। जब किसी के साथ अनहोनी होती है और वह शिकायत करता है तब कार्रवाई संभव होती है। विभाग के अनुसार, छह महीने में सुरियावां, बीरमपुर, गोपीगंज में ऐसे सात अस्पतालों को बंद कराया गया, जबकि दर्जन भर से अधिक को नोटिस दिया गया। महीने भर पूर्व डीघ सीएचसी अधीक्षक ने सुभाषनगर के एक क्लीनिक की जांच की। उसका पंजीयन आयुर्वेद से मिला जबकि वहां एलोपैथ की दवाएं दी जाती थीं। उसके खिलाफ भी कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
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आयुर्वेद और यूनानी से पंजीयन कराने वाले क्लीनिक की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है। बीरमपुर में बच्चे की मौत के बाद सभी टीमें जांच कर रही है। रिपोर्ट आने पर कार्रवाई होगी।
- डॉ. संतोष कुमार चक, सीएमओ
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स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के लिए सरकार गंभीर है। इसके लिए तमाम सुविधाएं भी बढ़ाई जा रही हैं। इसके बाद भी जिले में मरीजों के जीवन से कुछ चिकित्सक और झोलाछाप खिलवाड़ कर रहे हैं। एलोपैथ का मानक पूरा न करने पर कुछ संचालक यूनानी और आयुर्वेदिक पद्धति का पंजीकरण कराकर धड़ल्ले से क्लीनिक और नर्सिंग होम चला रहे हैं। ग्रामीण अंचलों में ऐसे क्लीनिक की संख्या अधिक है।
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विभागीय आंकड़ों के अनुसार, जिले में एलोपैथ पद्धति के कुल 135 क्लीनिक पंजीकृत हैं। इसमें महज 86 नर्सिंग होम है। शेष प्राइवेट ओपीडी और पैथालॉजी का रजिस्ट्रेशन किया गया है। क्षेत्रीय आयुर्वेद और यूनानी अधिकारी कार्यालय से 350 से अधिक नर्सिंग होम का पंजीकरण किया गया है, लेकिन ये नर्सिंग होम एलोपैथ की प्रैक्टिस करते हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से ऐसे क्लीनिक पर कार्रवाई नहीं होती। जब किसी के साथ अनहोनी होती है और वह शिकायत करता है तब कार्रवाई संभव होती है। विभाग के अनुसार, छह महीने में सुरियावां, बीरमपुर, गोपीगंज में ऐसे सात अस्पतालों को बंद कराया गया, जबकि दर्जन भर से अधिक को नोटिस दिया गया। महीने भर पूर्व डीघ सीएचसी अधीक्षक ने सुभाषनगर के एक क्लीनिक की जांच की। उसका पंजीयन आयुर्वेद से मिला जबकि वहां एलोपैथ की दवाएं दी जाती थीं। उसके खिलाफ भी कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
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आयुर्वेद और यूनानी से पंजीयन कराने वाले क्लीनिक की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है। बीरमपुर में बच्चे की मौत के बाद सभी टीमें जांच कर रही है। रिपोर्ट आने पर कार्रवाई होगी।
- डॉ. संतोष कुमार चक, सीएमओ
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