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भूस्वामियों के कब्जे से बीडा ने खाली कराई अधिग्रहीत भूमि
अमर उजाला ब्यूरो , भदोही
Updated Fri, 29 Jul 2016 02:05 AM IST
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रजपूरा में जमीन पर बीडा द्वारा खाली कराई जा रही भूमि के दौरान मौके पर मैजूद पुलिस और तमाशबीन
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भदोही नगर स्थित निर्यात भवन की तर्ज पर नगर में एक और निर्यात भवन की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो गया है। भदोही औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) के अधिकारियों ने गुरुवार को रजपूरा में अधिगृहित लगभग 1 बीघा 13 बिस्वा 17 धूर भूमि को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में भूस्वामी के कब्जे से खाली करा लिया। इस दौरान कुछ महिलाओं ने प्रतिरोध किया लेकिन पुलिस बल ने उन्हेें किनारे कर दिया।
भूमि अधिग्रहण की पत्रावली के साथ बीडा अधिकारी, तहसील प्रशासन और भारी पुलिस बल दोपहर बाद 3 बजे रजपूरा पहुंची और अधिगृहित भूमि पर निर्मित दो कमरों को जेसीबी की मदद से ध्वस्त कर दिया। इस बारे में बीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी, इंद्रमोहन दूबे ने बताया कि इस भूमि सहित वहां कुल 5048 वर्ग मीटर जमीन पर 37 करोड़ की लागत से एक और निर्यात भवन बनाने का प्रस्ताव है। इसका डिजाइन और मानचित्र बनकर तैयार होने के साथ साथ शासन द्वारा 3 करोड़ की प्रथम किश्त भी स्वीकृत कर दी गई है। बताया कि इस निर्यात भवन में वाणिज्यिक के साथ साथ आवासीय योजना को भी शामिल किया गया है। हलांकि पहले वाणिज्यिक योजना को मुर्त रूप दिया जाएगा। बताया कि निर्माण प्रारंभ करने के लिए बीएचयू से साध्यता (फीजबिलिटी) प्रमाण पत्र मिलते ही निर्माण प्रारंभ करा दिया जाएगा।
मौके पर मौजूद बीडा के अधिशासी अभियंता, राम अजोर यादव ने बताया कि उक्त भूमि को शासन द्वारा 1990 में ही बीडा के पक्ष में अधिसूचित कर दिया था लेकिन भूस्वामी की ओर से कानूनी लड़ाई पर अंतिम मुहर लगने के बाद यह कार्रवाई की गई है। यह भी बताया कि अधिगृहित भूमि का मुआवजा 35 लाख 13 हजार 814 रुपये भी भूस्वामी को 1993 में ही जारी कर दिए गए थे।
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बावजूद इसके उन्होंने चेक न लेकर उच्च न्यायालय सहित उच्चतम न्यायालय में अपनी बात रखी लेकिन बार बार बीडा के पक्ष में फैसला आया।
इस बीच मौके पर मिलेे अधिगृहित भूस्वामी उमराई देवी के पुत्र हरिश्चंद्र ने बताया कि अभी उनके मुआवजे का मामला हल नहीं हो सका है। न्यायालय से तीन माह में जिलाधिकारी के माध्यम से इस मामले का समाधान करने का आदेश मिला है। हम लोग चाहते थे कि मुआवजे का मामला हल हो जाने तक बीडा हमें समय दे लेकिन नहीं दिया गया।
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भूमि अधिग्रहण की पत्रावली के साथ बीडा अधिकारी, तहसील प्रशासन और भारी पुलिस बल दोपहर बाद 3 बजे रजपूरा पहुंची और अधिगृहित भूमि पर निर्मित दो कमरों को जेसीबी की मदद से ध्वस्त कर दिया। इस बारे में बीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी, इंद्रमोहन दूबे ने बताया कि इस भूमि सहित वहां कुल 5048 वर्ग मीटर जमीन पर 37 करोड़ की लागत से एक और निर्यात भवन बनाने का प्रस्ताव है। इसका डिजाइन और मानचित्र बनकर तैयार होने के साथ साथ शासन द्वारा 3 करोड़ की प्रथम किश्त भी स्वीकृत कर दी गई है। बताया कि इस निर्यात भवन में वाणिज्यिक के साथ साथ आवासीय योजना को भी शामिल किया गया है। हलांकि पहले वाणिज्यिक योजना को मुर्त रूप दिया जाएगा। बताया कि निर्माण प्रारंभ करने के लिए बीएचयू से साध्यता (फीजबिलिटी) प्रमाण पत्र मिलते ही निर्माण प्रारंभ करा दिया जाएगा।
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मौके पर मौजूद बीडा के अधिशासी अभियंता, राम अजोर यादव ने बताया कि उक्त भूमि को शासन द्वारा 1990 में ही बीडा के पक्ष में अधिसूचित कर दिया था लेकिन भूस्वामी की ओर से कानूनी लड़ाई पर अंतिम मुहर लगने के बाद यह कार्रवाई की गई है। यह भी बताया कि अधिगृहित भूमि का मुआवजा 35 लाख 13 हजार 814 रुपये भी भूस्वामी को 1993 में ही जारी कर दिए गए थे।
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बावजूद इसके उन्होंने चेक न लेकर उच्च न्यायालय सहित उच्चतम न्यायालय में अपनी बात रखी लेकिन बार बार बीडा के पक्ष में फैसला आया।
इस बीच मौके पर मिलेे अधिगृहित भूस्वामी उमराई देवी के पुत्र हरिश्चंद्र ने बताया कि अभी उनके मुआवजे का मामला हल नहीं हो सका है। न्यायालय से तीन माह में जिलाधिकारी के माध्यम से इस मामले का समाधान करने का आदेश मिला है। हम लोग चाहते थे कि मुआवजे का मामला हल हो जाने तक बीडा हमें समय दे लेकिन नहीं दिया गया।