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अध्यक्षी को लेकर कालीन नगरी में बढ़ी सियासी सरगर्मी
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जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही दावेदार सक्रिय हो उठे हैं। अध्यक्ष पद को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। सपा महीने भर पहले पत्ता खोल चुकी है तो भाजपा में घमासान मचा हुआ है।
30 जून 1994 को बने जनपद में जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्र और सपा का कब्जा रहा है। वर्ष 2009 से 2012 तक बसपा की श्यामला सरोज अध्यक्ष रहीं। रिश्तेदार की जमीन पर कब्जा करने के मामले में एक साल पूर्व विधायक विजय मिश्र पर मुकदमा दर्ज हुआ और वे अब आगरा जेल में हैं। उनके जेल में रहने से पक्ष-विपक्ष सभी अपने-अपने हिसाब से गोटी सेट करने में लगे हैं। सपा ने जहां महीने भर पूर्व मुलायम सिंह यादव के करीबी रहे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पारसनाथ मौर्य की नतोहू श्यामा कुमारी मौर्य को अध्यक्ष का प्रत्याशी बनाया है तो भाजपा अभी तक अपना अध्यक्ष पद का उम्मीदवार तय नहीं कर सकी है। वहीं बसपा अध्यक्ष पद को लेकर बैकफुट पर है। पार्टी विरोधी गतिविधि के कारण भाजपा विधायक रविंद्रनाथ त्रिपाठी के भाई अनिरुद्ध त्रिपाठी छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित हो चुके हैं, हालांकि अब भी वे पार्टी के सिंबल के लिए प्रयासरत हैं। अनिरुद्ध की दावेदारी ने अध्यक्षी चुनाव को काफी दिलचस्प बना दिया है। 26 सीटों वाले जिला पंचायत में बहुमत के लिए 14 वोट चाहिए। सपा का दावा है कि वह बहुमत के करीब है, हालांकि अध्यक्ष पद के चुनाव में सबकुछ अंदरखाने से सेट होता है। सभी दावेदार सदस्यों को अपने पाले में लाने के लिए हरसंभव प्रयास में लगे हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष विनय श्रीवास्तव ने कहा कि अध्यक्ष पद के दावेदारों की सूची प्रदेश नेतृत्व के पास भेजी गई है। वहां से उम्मीदवारों का नाम तय होगा। जबकि सपा जिलाध्यक्ष विकास यादव ने कहा कि भाजपा को जनता नकार चुकी है। सपा जिलाध्यक्ष ने कहा अध्यक्ष चुनाव में पार्टी मजबूत स्थिति में है। उन्होंने कहा कि इस बार भी जिला पंचायत सदन में सपा का ही अध्यक्ष होगा।
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30 जून 1994 को बने जनपद में जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्र और सपा का कब्जा रहा है। वर्ष 2009 से 2012 तक बसपा की श्यामला सरोज अध्यक्ष रहीं। रिश्तेदार की जमीन पर कब्जा करने के मामले में एक साल पूर्व विधायक विजय मिश्र पर मुकदमा दर्ज हुआ और वे अब आगरा जेल में हैं। उनके जेल में रहने से पक्ष-विपक्ष सभी अपने-अपने हिसाब से गोटी सेट करने में लगे हैं। सपा ने जहां महीने भर पूर्व मुलायम सिंह यादव के करीबी रहे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पारसनाथ मौर्य की नतोहू श्यामा कुमारी मौर्य को अध्यक्ष का प्रत्याशी बनाया है तो भाजपा अभी तक अपना अध्यक्ष पद का उम्मीदवार तय नहीं कर सकी है। वहीं बसपा अध्यक्ष पद को लेकर बैकफुट पर है। पार्टी विरोधी गतिविधि के कारण भाजपा विधायक रविंद्रनाथ त्रिपाठी के भाई अनिरुद्ध त्रिपाठी छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित हो चुके हैं, हालांकि अब भी वे पार्टी के सिंबल के लिए प्रयासरत हैं। अनिरुद्ध की दावेदारी ने अध्यक्षी चुनाव को काफी दिलचस्प बना दिया है। 26 सीटों वाले जिला पंचायत में बहुमत के लिए 14 वोट चाहिए। सपा का दावा है कि वह बहुमत के करीब है, हालांकि अध्यक्ष पद के चुनाव में सबकुछ अंदरखाने से सेट होता है। सभी दावेदार सदस्यों को अपने पाले में लाने के लिए हरसंभव प्रयास में लगे हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष विनय श्रीवास्तव ने कहा कि अध्यक्ष पद के दावेदारों की सूची प्रदेश नेतृत्व के पास भेजी गई है। वहां से उम्मीदवारों का नाम तय होगा। जबकि सपा जिलाध्यक्ष विकास यादव ने कहा कि भाजपा को जनता नकार चुकी है। सपा जिलाध्यक्ष ने कहा अध्यक्ष चुनाव में पार्टी मजबूत स्थिति में है। उन्होंने कहा कि इस बार भी जिला पंचायत सदन में सपा का ही अध्यक्ष होगा।
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