ज्ञानपुर। शहरी गरीबों को पक्का छत मुहैया कराने की मुहिम में गड़बड़ी सामने आने लगी है। कर्मचारियों की मनमानी से अपात्रों ने भी योजना का लाभ ले लिया है। लापरवाही का आलम यह है कि नगरों में बनने वाले आवास गांवों में पहुंच गए हैं। आईजीआरएस(इंटीग्रेटेड ग्रिवांस रेड्रेसल सिस्टम)पर शिकायत के बाद नगर पालिका परिषद गोपीगंज की जांच में कई गड़बड़ी सामने आई है। इस संबंध में ईओ ने कार्रवाई के लिए डूडा अधिकारी को पत्र लिखा है। दरअसल केंद्र सरकार की ओर से सभी को पक्का छत मुहैया कराने के लिए जून 2015 में प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू की गई थी। इसके बाद सूबे में यह योजना मई 2017 में शुरू हुई थी। तीन साल में जिले के ज्ञानपुर, भदोही, खमरिया, गोपीगंज, घोसिया, नई बाजार और सुरियावां नगर में 31 हजार 607 लाभार्थी चयनित हुए थे। लेकिन लाभार्थियों के चयन प्रक्रिया में कर्मचारियों ने जमकर धांधली और मनमानी की है। नतीजतन बड़ी संख्या में अपात्रों को भी आवास दे दिया है। ऐसा ही एक ताजा मामला गोपीगंज नगर से जुड़ा है। यहां पर लाभार्थी को नगरीय दिखाकर आवास गांव में बना दिया गया। आरटीआई कार्यकर्ता व अधिवक्ता आदर्श त्रिपाठी ने फरवरी 2021 में आईजीआरएस पर प्रार्थना पत्र देकर जांच की मांग की थी। हालांकि इसके बाद नगर पालिका परिषद गोपीगंज की ईओ अमिता सिंह की ओर से कराई गई जांच में मामला सही मिलने के बावजूद अब तक यह प्रकरण ठंडे बस्ते में है और किसी भी दोषी पर कार्रवाई नहीं की गई। इस संबंध में ईओ का कहना है कि जांच आख्या डूडा कार्यालय भेज दी गई है। वहीं डूडा अधिकारी ऊषा त्रिपाठी का कहना है कि मामला संज्ञान में है। लाभार्थी को नोटिस जारी की गई है। यह तो एक बानगी भर है। ऐसे कई अपात्रों को योजना का लाभ मिल चुका है। बताते चलें कि जिले में स्वीकृत 31, 607 लाभार्थियों में अब तक सात हजार का आवास बन चुका है।