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चंगुल में फंसाकर अभिभावकों का कर रहे शोषण
ब्यूरो/ अमर उजाला ,भदोही
Updated Fri, 01 Apr 2016 07:15 PM IST
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स्कूल
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फीस और किताब के नाम पर अभिभावकों का शोषण कर रहे कान्वेंट स्कूलों के मायाजाल में एक बार फंसे तो निकलना मुश्किल हो जाता है। बच्चों के एडमिशन के समय मोटी रकम देने के बाद अगर दूसरे सत्र में उसका दाखिला किसी दूसरे स्कूल में कराना चाहते हैं तो जून तक की फीस यहां भरिए और टीसी के लिए स्कूल के चक्कर काटिए सो अलग। उसके बाद जिस स्कूल में जाएंगे, वहां भी आपको अप्रैल से जून तक की फीस भरनी होगी।
शिक्षा को व्यवसाय बना चुके प्रबंधकों की मनमानी के आगे प्रशासन से लेकर शिक्षा विभाग भी घुटने टेकता नजर आ रहा है। अप्रैल में शिक्षा सत्र शुरू होने के साथ ही कान्वेंट स्कूलों में अभिभावकों के शोषण का जो दौर शुरू होता है, वह साल भर चलता रहता है। किताब, फीस के अलावा प्रबंधक समय-समय पर कथित आयोजन के बहाने अभिभावकों की जेब हल्की करने में नहीं सकुचाते। बच्चों का एडमिशन कराए हैं तो पैसा देना होगा, अन्यथा तगादा बच्चों को सुनना पड़ता है। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो भदोही नगर में 10, गोपीगंज में सात, औराई में तीन, घोसिया में दो, सुरियावां में तीन, ज्ञानपुर में पांच समेत करीब 30 ऐसे विद्यालय हैं, जहां सरकार की नियमावली के विपरीत अपने मुताबिक कायदे-कानून चलते हैं। अभिभावक शशिभूषण पांडेय का कहना है कि ज्ञानपुर नगर स्थित एक कान्वेंट स्कूल से बच्चे का नाम कटवाने गए तो जून तक की फीस मांगी गई। फीस न जमा करने पर टीसी न देने की बात कही गई। इसी तरह पिछले दिनों घोसिया के एक विद्यालय में छात्र को तीन माह की अतिरिक्त फीस जमा न करने पर स्कूल से परीक्षा से वंचित करने तक की धमकी दे दी गई थी। इस मसले को लेकर काफी हंगामा मचा था।
इनसेट
सप्ताह में तीन यूनिफार्म का कैसा फंडा
ज्ञानपुर। बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का दंभ करने वाले कान्वेंट स्कूलों में हर तरफ से अभिभावकों की जेब पर चोट की जाती है। कापी, किताब, फीस के अलावा अतिरिक्त गतिविधियां और यूनिफार्म के बहाने भी अभिभावकों का शोषण होता है। स्कूलों में सप्ताह में तीन से चार यूनिफार्म कोड को लागू किया गया है। सोमवार, मंगलवार को अलग यूनिफार्म, बृहस्पतिवार को अलग, शनिवार को अलग रंग के यूनिफार्म तय किए गए हैं। सभी यूनिफार्म आपको बाहर नहीं मिलेंगे। स्कूल के अंदर ही अभिभावक यह व्यवस्था मिलेगी।
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इनसेट डीएम साहब चाहें तो कुछ होगा
ज्ञानपुर। शिक्षा विभाग के एक आला अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कान्वेंट स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर लगाम कसने के लिए जिलाधिकारी कुछ करें तो बात बनें। डीएम के स्तर से ऐसे स्कूलों के खिलाफ जांच कमेटी बनाकर एक निर्धारित फीस तय करने की जरूरत है।
इनसेट
क्या कहते हैं शिक्षा अधिकारी
ज्ञानपुर। जिला विद्यालय निरीक्षक संतोष कुमार मिश्र का कहना है कि मान्यता लेते समय नि:शुल्क शिक्षा देने की बात प्रबंधकों की ओर से लिखित में कही जाती है। शिक्षकों के मानदेय और स्कूल के रखरखाव को लेकर बच्चों से निर्धारित फीस ली जानी चाहिए। हालांकि बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. सत्य प्रकाश त्रिपाठी कान्वेंट स्कूलों की मनमानी फीस वसूली के सवाल पर बचते नजर आए।
इनसेट
कान्वेंट स्कूलों में कितनी फीस ली जा रही है प्रशासन के पास लेखाजोखा नहीं है। मनमानी फीस वसूलने वाले स्कूलों के खिलाफ अभिभावक आवाज उठाएं। शिकायत करने पर संबंधित स्कूल के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।
प्रकाश बिंदु जिलाधिकारी
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अभिभावकों की बातें-
अभिभावक कैलाश यादव ने कहा कि कान्वेंट स्कूलों में मनमानी फीस ली जा रही है। अप्रैल में दो बच्चों की फीस और कापी-किताब मिलाकर 23 हजार रुपये खर्च करना पड़ा। लगातार उसी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों से भी एडमिशन की फीस ली जा रही है।
अभिभावक लालू प्रसाद ने कहा कि कान्वेंट स्कूल शिक्षा देने के नाम पर शोषण कर रहे हैं। मनमानी फीस वसूली से सामान्य अभिभावक को अपने बच्चों को अंग्रेजी स्कूल में पढ़ाना मुश्किल हो गया है।
अभिभावक रमेश चंद्र का कहना है कि स्कूल से बच्चों को निकालने में दिक्कत हो रही है। फीस अधिक होने से वह उनका नाम कटाकर अन्यत्र लिखाना चाह रहे हैं, लेकिन स्कूल की ओर से टीसी नहीं दी जा रही है।
अभिभावक रामचरण ने कहा कि दो बच्चों का प्रवेश पहली और दूसरी कक्षा में कराने पर लगभग 20 हजार रुपये खर्च आ रहा है। स्कूल से किताब और कापी दोनों लेना जरूरी कर दिया गया है। इससे मुश्किलें बढ़ गईं हैं।
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शिक्षा को व्यवसाय बना चुके प्रबंधकों की मनमानी के आगे प्रशासन से लेकर शिक्षा विभाग भी घुटने टेकता नजर आ रहा है। अप्रैल में शिक्षा सत्र शुरू होने के साथ ही कान्वेंट स्कूलों में अभिभावकों के शोषण का जो दौर शुरू होता है, वह साल भर चलता रहता है। किताब, फीस के अलावा प्रबंधक समय-समय पर कथित आयोजन के बहाने अभिभावकों की जेब हल्की करने में नहीं सकुचाते। बच्चों का एडमिशन कराए हैं तो पैसा देना होगा, अन्यथा तगादा बच्चों को सुनना पड़ता है। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो भदोही नगर में 10, गोपीगंज में सात, औराई में तीन, घोसिया में दो, सुरियावां में तीन, ज्ञानपुर में पांच समेत करीब 30 ऐसे विद्यालय हैं, जहां सरकार की नियमावली के विपरीत अपने मुताबिक कायदे-कानून चलते हैं। अभिभावक शशिभूषण पांडेय का कहना है कि ज्ञानपुर नगर स्थित एक कान्वेंट स्कूल से बच्चे का नाम कटवाने गए तो जून तक की फीस मांगी गई। फीस न जमा करने पर टीसी न देने की बात कही गई। इसी तरह पिछले दिनों घोसिया के एक विद्यालय में छात्र को तीन माह की अतिरिक्त फीस जमा न करने पर स्कूल से परीक्षा से वंचित करने तक की धमकी दे दी गई थी। इस मसले को लेकर काफी हंगामा मचा था।
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सप्ताह में तीन यूनिफार्म का कैसा फंडा
ज्ञानपुर। बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का दंभ करने वाले कान्वेंट स्कूलों में हर तरफ से अभिभावकों की जेब पर चोट की जाती है। कापी, किताब, फीस के अलावा अतिरिक्त गतिविधियां और यूनिफार्म के बहाने भी अभिभावकों का शोषण होता है। स्कूलों में सप्ताह में तीन से चार यूनिफार्म कोड को लागू किया गया है। सोमवार, मंगलवार को अलग यूनिफार्म, बृहस्पतिवार को अलग, शनिवार को अलग रंग के यूनिफार्म तय किए गए हैं। सभी यूनिफार्म आपको बाहर नहीं मिलेंगे। स्कूल के अंदर ही अभिभावक यह व्यवस्था मिलेगी।
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इनसेट डीएम साहब चाहें तो कुछ होगा
ज्ञानपुर। शिक्षा विभाग के एक आला अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कान्वेंट स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर लगाम कसने के लिए जिलाधिकारी कुछ करें तो बात बनें। डीएम के स्तर से ऐसे स्कूलों के खिलाफ जांच कमेटी बनाकर एक निर्धारित फीस तय करने की जरूरत है।
इनसेट
क्या कहते हैं शिक्षा अधिकारी
ज्ञानपुर। जिला विद्यालय निरीक्षक संतोष कुमार मिश्र का कहना है कि मान्यता लेते समय नि:शुल्क शिक्षा देने की बात प्रबंधकों की ओर से लिखित में कही जाती है। शिक्षकों के मानदेय और स्कूल के रखरखाव को लेकर बच्चों से निर्धारित फीस ली जानी चाहिए। हालांकि बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. सत्य प्रकाश त्रिपाठी कान्वेंट स्कूलों की मनमानी फीस वसूली के सवाल पर बचते नजर आए।
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कान्वेंट स्कूलों में कितनी फीस ली जा रही है प्रशासन के पास लेखाजोखा नहीं है। मनमानी फीस वसूलने वाले स्कूलों के खिलाफ अभिभावक आवाज उठाएं। शिकायत करने पर संबंधित स्कूल के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।
प्रकाश बिंदु जिलाधिकारी
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अभिभावकों की बातें-
अभिभावक कैलाश यादव ने कहा कि कान्वेंट स्कूलों में मनमानी फीस ली जा रही है। अप्रैल में दो बच्चों की फीस और कापी-किताब मिलाकर 23 हजार रुपये खर्च करना पड़ा। लगातार उसी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों से भी एडमिशन की फीस ली जा रही है।
अभिभावक लालू प्रसाद ने कहा कि कान्वेंट स्कूल शिक्षा देने के नाम पर शोषण कर रहे हैं। मनमानी फीस वसूली से सामान्य अभिभावक को अपने बच्चों को अंग्रेजी स्कूल में पढ़ाना मुश्किल हो गया है।
अभिभावक रमेश चंद्र का कहना है कि स्कूल से बच्चों को निकालने में दिक्कत हो रही है। फीस अधिक होने से वह उनका नाम कटाकर अन्यत्र लिखाना चाह रहे हैं, लेकिन स्कूल की ओर से टीसी नहीं दी जा रही है।
अभिभावक रामचरण ने कहा कि दो बच्चों का प्रवेश पहली और दूसरी कक्षा में कराने पर लगभग 20 हजार रुपये खर्च आ रहा है। स्कूल से किताब और कापी दोनों लेना जरूरी कर दिया गया है। इससे मुश्किलें बढ़ गईं हैं।