{"_id":"6859a55c3045c4c7bf00b847","slug":"now-driving-testing-tracks-will-be-built-on-ppp-modelnow-driving-testing-tracks-will-be-built-on-ppp-model-bhadohi-news-c-191-1-svns1015-127835-2025-06-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bhadohi News: अब पीपीपी मॉडल पर बनेंगे ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bhadohi News: अब पीपीपी मॉडल पर बनेंगे ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक
विज्ञापन
ज्ञानपुर। जिले में पीपीपी मॉडल पर ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक बनेगा। इसके लिए वाराणसी की एक संस्था आगे आई है। टेस्टिंग ट्रैक पर आधुनिक मशीनें होंगी। जिससे लोगों को डीएल जारी किया जाएगा। संस्था ने ज्ञानपुर में ही डेढ़ बीघे जमीन किराये पर ली है।
दोपहिया, चार पहिया और बड़े वाहनों का लाइसेंस बनवाने के लिए हर रोज एआरटीओ कार्यालय पर बड़ी संख्या में आवेदक पहुंचते हैं। ड्राइविंग टेस्ट के बाद ही वाहनों को चलाने का लाइसेंस बनाने का प्रावधान है। शासन के निर्देश पर ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक के निर्माण के लिए साल 2021 में जमीन की शुरू हुई खोज चार साल तक पूरी नहीं हो सकी। डीघ के दरवांसी, भदोही के मूंसी और पाली में जमीन चिह्नित की गई थी, लेकिन मुख्यालय से दूूरी अधिक होने और तकनीकी समस्याओं के चलते इसे निरस्त कर दिया गया। परिवहन विभाग के अनुसार, मुख्यालय से 10 किमी क्षेत्र में ही इसका निर्माण किया जाना है। सरकारी जमीन न मिलने पर अब इसे पीपीपी मॉडल पर चलाने का निर्णय लिया गया। इसे वाराणसी की एक संस्था चलाएगी। इसके लिए वह डेढ़ बीघा जमीन लीज पर ली है। टेस्टिंग ट्रैक पर वाहन चालकों का परीक्षण कंप्यूटर करेगा। ड्राइविंग टेस्टिंग आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित ट्रैक पर की जाएगी। नई व्यवस्था में लाइसेंस बनवाने के लिए गाड़ी चलाकर दिखाना पड़ेगा। वाहन को दाएं-बाएं करने के अलावा स्पीड एवं अन्य उपकरणों को ऑपरेट करने में अभ्यर्थी कितने दक्ष हैं, यह कंप्यूटर ही बताएगा।
-- -- -- -- --
इतनी जमीन की है जरूरत
नई व्यवस्था में कार्यालय भवन निर्माण के लिए 4000 वर्ग मीटर, ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक के निर्माण के लिए 1025.18 वर्ग मीटर एवं फिटनेस पिट निर्माण के लिए 308 वर्ग मीटर जमीन चाहिए। इस प्रकार कुल 5333.18 वर्ग मीटर भूमि की आवश्यकता है, लेकिन सरकारी जमीन नहीं मिल सकी।
विज्ञापन
-- -- -- -- -
कोट
चार साल पूर्व से ही टेस्टिंग ट्रैक के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। अभी तक वह नहीं मिल सकी है। अब पीपीपी मॉडल से चलाने का निर्णय लिया गया है। वाराणसी की एक संस्था इसके लिए आगे आई है। अभी भूमि चयन समेत अन्य प्रक्रिया चल रही है। - राम सिंह, एआरटीओ।
विज्ञापन
दोपहिया, चार पहिया और बड़े वाहनों का लाइसेंस बनवाने के लिए हर रोज एआरटीओ कार्यालय पर बड़ी संख्या में आवेदक पहुंचते हैं। ड्राइविंग टेस्ट के बाद ही वाहनों को चलाने का लाइसेंस बनाने का प्रावधान है। शासन के निर्देश पर ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक के निर्माण के लिए साल 2021 में जमीन की शुरू हुई खोज चार साल तक पूरी नहीं हो सकी। डीघ के दरवांसी, भदोही के मूंसी और पाली में जमीन चिह्नित की गई थी, लेकिन मुख्यालय से दूूरी अधिक होने और तकनीकी समस्याओं के चलते इसे निरस्त कर दिया गया। परिवहन विभाग के अनुसार, मुख्यालय से 10 किमी क्षेत्र में ही इसका निर्माण किया जाना है। सरकारी जमीन न मिलने पर अब इसे पीपीपी मॉडल पर चलाने का निर्णय लिया गया। इसे वाराणसी की एक संस्था चलाएगी। इसके लिए वह डेढ़ बीघा जमीन लीज पर ली है। टेस्टिंग ट्रैक पर वाहन चालकों का परीक्षण कंप्यूटर करेगा। ड्राइविंग टेस्टिंग आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित ट्रैक पर की जाएगी। नई व्यवस्था में लाइसेंस बनवाने के लिए गाड़ी चलाकर दिखाना पड़ेगा। वाहन को दाएं-बाएं करने के अलावा स्पीड एवं अन्य उपकरणों को ऑपरेट करने में अभ्यर्थी कितने दक्ष हैं, यह कंप्यूटर ही बताएगा।
विज्ञापन
इतनी जमीन की है जरूरत
नई व्यवस्था में कार्यालय भवन निर्माण के लिए 4000 वर्ग मीटर, ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक के निर्माण के लिए 1025.18 वर्ग मीटर एवं फिटनेस पिट निर्माण के लिए 308 वर्ग मीटर जमीन चाहिए। इस प्रकार कुल 5333.18 वर्ग मीटर भूमि की आवश्यकता है, लेकिन सरकारी जमीन नहीं मिल सकी।
विज्ञापन
कोट
चार साल पूर्व से ही टेस्टिंग ट्रैक के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। अभी तक वह नहीं मिल सकी है। अब पीपीपी मॉडल से चलाने का निर्णय लिया गया है। वाराणसी की एक संस्था इसके लिए आगे आई है। अभी भूमि चयन समेत अन्य प्रक्रिया चल रही है। - राम सिंह, एआरटीओ।