{"_id":"6ac54b9c4e71b3bc3f0cf5d7","slug":"nazim-accused-in-the-guddu-khan-murder-case-gets-the-benefit-of-the-doubt-bhadohi-news-c-191-1-gyn1003-149649-2026-10-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bhadohi News: गुड्डू खां हत्याकांड के आरोपी नाजिम को संदेह का लाभ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bhadohi News: गुड्डू खां हत्याकांड के आरोपी नाजिम को संदेह का लाभ
विज्ञापन
अपर सत्र न्यायाधीश दुर्गेश की अदालत ने 2008 के चर्चित खुर्रम उर्फ गुड्डू खां हत्याकांड के आरोपी शानू उर्फ नाजिम निवासी भदोही को आरोपमुक्त करार दिया है।
कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में यह फैसला सुनाया है। कोर्ट के आदेश के अनुसार अभियोजन पक्ष संदेह से परे आरोप सिद्ध नहीं कर पाया।
अभियोजन के अनुसार, भदोही कोतवाली पुलिस ने एक मार्च, 2008 को मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। सिविल लाइन भदोही निवासी उजमा खां ने अपने पति की हत्या के बाद प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
उन्होंने बताया था कि उनके पति खुर्रम उर्फ गुड्डू खां अपने ऑफिस में बैठे थे। इस बीच उन्हें गोली की आवाज सुनाई थी। जिसके बाद भागकर वह नीचे पहुंची तो दो बदमाश कमरे का दरवाजा बंद कर उसमें आग लगाकर भाग गए। अपने चौकीदार की मदद से वह दरवाजा तोड़कर अंदर पहुंची तो उनके पति छटपटा रहे थे।
विज्ञापन
उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने सात अक्तूबर, 2009 में कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। कोर्ट ने मामले में सुनवाई की। 19 साल तक चले इस मामले में कुल 16 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। दोनों पक्षों की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि मृतक खुर्रम उर्फ गुड्डू खां की हत्या चिकित्सकीय साक्ष्य से सिद्ध हुई है, लेकिन आरोपी शानू की संलिप्तता केवल संदेह के आधार पर दिखाई पड़ रही है।
वहीं हत्या के पीछे उसका कोई स्पष्ट उद्देश्य भी सामने नहीं आया। कोर्ट ने यह भी कहा कि मृतक की पत्नि उजमा खां ने प्रारंभिक सूचना दी थी, लेकिन बाद में स्वयं आरोपी बनी।
कोर्ट ने यह भी कहा कि सीबीआईसीआईडी की ओर की गई विवेचना में कई महत्वपूर्ण प्रश्न अनुत्तरित रह गए। जिसमें हत्या का वास्तविक सूत्रधार कौन था, कथित शूटर की भूमिका क्या थी, और उजमा खां की बदलती भूमिका स्पष्ट नहीं हो सकी। आरोपी शानू का अन्य आरोपी अन्य व्यक्तियों से अपराध-संबंधी संपर्क भी विश्वसनीय रूप से सत्यापित नहीं हुआ। जिसको देखते हुए कोर्ट ने आरोपी शानू उर्फ नाजिम को आराेपमुक्त कर दिया। संवाद
विज्ञापन
कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में यह फैसला सुनाया है। कोर्ट के आदेश के अनुसार अभियोजन पक्ष संदेह से परे आरोप सिद्ध नहीं कर पाया।
अभियोजन के अनुसार, भदोही कोतवाली पुलिस ने एक मार्च, 2008 को मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। सिविल लाइन भदोही निवासी उजमा खां ने अपने पति की हत्या के बाद प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
विज्ञापन
उन्होंने बताया था कि उनके पति खुर्रम उर्फ गुड्डू खां अपने ऑफिस में बैठे थे। इस बीच उन्हें गोली की आवाज सुनाई थी। जिसके बाद भागकर वह नीचे पहुंची तो दो बदमाश कमरे का दरवाजा बंद कर उसमें आग लगाकर भाग गए। अपने चौकीदार की मदद से वह दरवाजा तोड़कर अंदर पहुंची तो उनके पति छटपटा रहे थे।
विज्ञापन
उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने सात अक्तूबर, 2009 में कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। कोर्ट ने मामले में सुनवाई की। 19 साल तक चले इस मामले में कुल 16 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। दोनों पक्षों की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि मृतक खुर्रम उर्फ गुड्डू खां की हत्या चिकित्सकीय साक्ष्य से सिद्ध हुई है, लेकिन आरोपी शानू की संलिप्तता केवल संदेह के आधार पर दिखाई पड़ रही है।
वहीं हत्या के पीछे उसका कोई स्पष्ट उद्देश्य भी सामने नहीं आया। कोर्ट ने यह भी कहा कि मृतक की पत्नि उजमा खां ने प्रारंभिक सूचना दी थी, लेकिन बाद में स्वयं आरोपी बनी।
कोर्ट ने यह भी कहा कि सीबीआईसीआईडी की ओर की गई विवेचना में कई महत्वपूर्ण प्रश्न अनुत्तरित रह गए। जिसमें हत्या का वास्तविक सूत्रधार कौन था, कथित शूटर की भूमिका क्या थी, और उजमा खां की बदलती भूमिका स्पष्ट नहीं हो सकी। आरोपी शानू का अन्य आरोपी अन्य व्यक्तियों से अपराध-संबंधी संपर्क भी विश्वसनीय रूप से सत्यापित नहीं हुआ। जिसको देखते हुए कोर्ट ने आरोपी शानू उर्फ नाजिम को आराेपमुक्त कर दिया। संवाद