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कागजों में सिमट गई नमामि गंगे योजना
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ज्ञानपुर। गंगा को स्वच्छ और किसानों को समृद्ध बनाने के लिए सरकार की कल्याणकारी नमामि गंगे योजना कागजों तक ही सिमट कर रह गई है। बजट के अभाव में योजना रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। आलम यह है कि मार्च 2022 के बाद से बजट न मिलने से पांच हजार किसानों को अनुदान तक नहीं मिल सका, जिसका लोगों को अभी तक इंतजार है।
किसानों की आय दोगुनी करने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है। किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही आधुनिक बनाने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, लेकिन गेहूं, धान सहित अन्य फसल के बेहतर उत्पादन के लिए ज्यादातर किसान रासायनिक खाद और कीटनाशक दवाओं का अधिक इस्तेमाल करते हैं।
बारिश में पानी के साथ रासायनिक खाद और कीटनाशक गंगा में पहुंचकर जलीय जीव-जंतुओं को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे में प्रदूषण को रोकने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए नमामि गंगे योजना शुरू की गई। जिले में गंगा से सटे 47 गांवों में जैविक खेती कराई जा रही है। इसमें करीब 11 हजार किसान शामिल हैं। किसानों को कृषि उपकरण, बीज, खाद आदि पर अनुदान दिया जाता है।
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साल 2021 के समापन पर तीन करोड़ 40 लाख रुपये विभाग को स्वीकृत हुए, हालांकि मार्च 2022 में मिला, जिसे छह हजार किसानों के खाते में भेजा गया, लेकिन अब भी पांच हजार से अधिक किसान सब्सिडी का इंतजार कर रहे हैं। समय से सब्सिडी न मिलने से योजना से किसानों का मोह भंग होता जा रहा है। उप निदेशक कृषि डॉ. अश्वनी सिंह ने कहा कि सही समय से बजट न मिलने से योजना प्रभावित होती है, लेकिन जिले में योजना ठीक चल रही है। बजट के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है। जैसे ही बजट मिलेगा किसानों के खाते में भेज दिया जाएगा।
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किसानों की आय दोगुनी करने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है। किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही आधुनिक बनाने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, लेकिन गेहूं, धान सहित अन्य फसल के बेहतर उत्पादन के लिए ज्यादातर किसान रासायनिक खाद और कीटनाशक दवाओं का अधिक इस्तेमाल करते हैं।
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बारिश में पानी के साथ रासायनिक खाद और कीटनाशक गंगा में पहुंचकर जलीय जीव-जंतुओं को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे में प्रदूषण को रोकने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए नमामि गंगे योजना शुरू की गई। जिले में गंगा से सटे 47 गांवों में जैविक खेती कराई जा रही है। इसमें करीब 11 हजार किसान शामिल हैं। किसानों को कृषि उपकरण, बीज, खाद आदि पर अनुदान दिया जाता है।
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साल 2021 के समापन पर तीन करोड़ 40 लाख रुपये विभाग को स्वीकृत हुए, हालांकि मार्च 2022 में मिला, जिसे छह हजार किसानों के खाते में भेजा गया, लेकिन अब भी पांच हजार से अधिक किसान सब्सिडी का इंतजार कर रहे हैं। समय से सब्सिडी न मिलने से योजना से किसानों का मोह भंग होता जा रहा है। उप निदेशक कृषि डॉ. अश्वनी सिंह ने कहा कि सही समय से बजट न मिलने से योजना प्रभावित होती है, लेकिन जिले में योजना ठीक चल रही है। बजट के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है। जैसे ही बजट मिलेगा किसानों के खाते में भेज दिया जाएगा।