हेराफेरी करता था लेखपाल: दो लोगों के खिलाफ FIR, DM ने निलंबित करने के दिए निर्देश; जांच में खुली पोल
नियत प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र से इस मामले की जांच की मांग की। जांच में पाया गया कि गलत चौहद्दी और गलत रकबा दिखाकर नक्शा पास कराया गया है। जिसके बाद स्वीकृत नक्शा को निरस्त कर दिया।
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तहसीलों में भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़ा थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला ज्ञानपुर के लखनो गांव से जुड़ा है। यहां लेखपाल ने चौहद्दी और नवैयत बदलकर नक्शा पास करा लिया गया। जांच में गड़बड़ी मिलने पर नक्शा को निरस्त कर दिया गया।
एसपी अभिमन्यु मांगलिक के निर्देश पर लेखपाल गरिमा सचान एवं दीपक कुमार शुक्ला के खिलाफ बीती रात कुटरचना, धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया। गोपीगंज के बड़ागांव निवासी कौशल कुमार दूबे ने तहरीर में बताया कि लखनों में उसकी आराजी नंबर 863 में जमीन है।
विपक्षी दीपक कुमार शुक्ला ने फर्जी एवं कुटरचित कागजात तैयार करा लिया। उसके बाद उसकी जमीन की चौहद्दी को गलत दिखाकर 52.5 वर्गमीटर से अधिक भूमि 110 वर्ग मीटर पर रिपोर्ट लगाकर नक्शा पास करा लिया। इसमें लेखपाल गरिमा सचान ने भी फर्जी ढंग से रिपोर्ट लगाया।
शिकायत के बाद भी पुलिस मामले में कार्रवाई नहीं की। एसपी के निर्देश पर गुरुवार की रात में पुलिस ने क्षेत्रीय लेखपाल गरिमा सचान और दीपक कुमार शुक्ला के खिलाफ कुटरचना, धोखाधड़ी समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया।
पीड़ित ने बताया कि उक्त प्रकरण में डीएम ने लेखपाल को निलंबित करने का निर्देश दिया है, लेकिन अभी तक तहसील स्तरीय अधिकारियों की तरफ से कार्रवाई नहीं की गई। प्रभारी निरीक्षक विष्णुप्रभा सिंह ने कहा कि उच्चाधिकारियों के निर्देश पर मुकदमा दर्ज किया गया है।
तहसीलों का भ्रष्टाचार से गहरा नाता
शासन-प्रशासन का जीरो टोलेरेंस का दावा तहसीलों में आते ही खोखला हो जाता है। संपूर्ण समाधान दिवस से लेकर समाधान दिवस में आने वाले अधिकतर मामले राजस्व विभाग से रहते हैं। सालों से चक्कर लगाने के बाद फरियादी को न्याय नहीं मिल पाता।
लेखपाल या कर्मचारियों से तालमेल रखने वालों का कठिन कार्य भी चंद घंटे में हो जाता है। तहसीलों में रिश्वत के मामले लगातार आते रहते हैं। पिछले दो सालों में करीब पांच लेखपाल रिश्वत लेते हुए एंटी करप्शन के हाथ आ चुके हैं। जिन पर निलंबन की कार्रवाई की गई, बाद में वह उसी हलके में पहुंच गए।