ज्ञानपुर। कालीन नगरी में जागरण (जगरन) मंगलवार को परंपरागत तरीके से मनाया गया। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर नगरीय बाजारों में जलेबा की खूब बिक्री हुई। इसके साथ ही अनरसा, जलेबी, भूना चना, फल आदि की दुकानों पर भी भीड़ रही। रात जागरण के बाद बुधवार को कजली का पर्व मनाया जाएगा। कजली पर्व जागरण के ठीक अगले दिन बुधवार को मनाया जाएगा। इसमें तैयार जरई को जलाशयों में डूबोने के बाद उसे भाइयों के कान पर रख कर बहनें उनकी सुख समृद्धि की कामना करती हैं। इसके बाद पकवान बनाने और कजली गाने का सिलसिला शुरू होता है, जो देर रात तक चलता है। सावन माह की समाप्ति के बाद भादों की शुरूआत होते ही त्योहारों की झड़ी लग गई है। हालांकि त्योहारों को लेकर पहले जैसा उत्साह, आपसी लगाव व उमंग लोगों में नहीं दिख रहा है। महंगाई के कारण खानापूर्ति करके ही लोग त्यौहारों को मना रहे हैं। हालांकि बच्चों व महिलाओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। बता दें कि परंपराओं के अनुसार लोग बहन-बेटियों के यहां रक्षा बंधन के तीसरे दिन जगरन पहुंचाते हैं। इस दौरान साड़ी, फल, अनरसा, जलेबी, भूना चना बहन बेटियों उपहार में देते हैं। कजरी के दिन सुहागिन और कुंआरी कन्याएं व्रत रखती हैं और शाम को चंद्र दर्शन के बाद व्रत तोड़ती हैं। दुकानों पर जलेबी 100 से 120 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक्री कर दुकानदार आमदनी करते रहे। छोटे-बड़े बाजारों में तिल रखने की जगह न होने से जाम की स्थिति बनी रही। ज्ञानपुर, गोपीगंज, सुरियावां, मोढ़, कस्तूरीपुर, चौरी, औराई समेत अन्य बाजारों में जलेबी की जमकर खरीदारी हुई।