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बजट में इंट्रेस्ट सबवेंशन के लिए हों गंभीर प्रयास

Thu, 26 Feb 2015 02:15 AM IST
Interest in the budget are serious efforts to Sbvensn
Interest in the budget are serious efforts to Sbvensn Updated Thu, 26 Feb 2015 02:15 AM IST
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Interest in the budget are serious efforts to Sbvensn
 निर्यातकों को इस बात की चिंता है कि यदि आगामी वित्तीय वर्ष हेतु गंभीर प्रयास नहीं हुए तो वर्ष 2015-16 में भी इंट्रेस्ट सबवेंशन नहीं मिल पाएगा। उद्यमियों ने कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) से इसके लिए गंभीर प्रयास करने की मांग की है।
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बैंकों से कर्ज लेकर किए गए कालीन निर्यात पर ब्याज में राहत देने के लिए निर्यातकों को सरकार से तीन प्रतिशत इंट्रेस्ट सबवेंशन का प्रावधान है। इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक विभिन्न बैंकों को पत्र जारी करती है तब लाभ मिलता है। लेकिन 31 मार्च 2014 तक ही लोगों को इंट्रेस्ट सब्सिडी मिली। इसके बाद आरबीआई से इस आशय का नया आदेश नहीं मिलने से लोग लाभ से वंचित रह गए। यूबीआई के मुख्य प्रबंधक प्रशांत कुमार साहू और एसबीबीजे के प्रबंधक हेमंत कुमार प्रसाद ने बताया कि इस पूरे वर्ष किसी को इस योजना का लाभ नहीं दिया जा सका।
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उधर पहले ही उद्योग में दूसरे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहे निर्यातक इससे चिंतित हो उठे हैं। लोगों का कहना है कि चालू वित्तीय वर्ष में योजना का लाभ नहीं मिलने से उन्हें भारी नुकसान हुआ है। अब उन्हें इस बात की चिंता सता रही है कि कहीं आगामी वित्तीय वर्ष में भी तो सबवेंशन से वंचित न रह जाएं। गोपीगंज के प्रमुख निर्यातक संजय गुप्ता का कहना है कि केंद्र सरकार का बजट पेश होने वाला है। अभी प्रयास नहीं किया गया तो आगामी वित्तीय वर्ष मेें भी लाभ नहीं मिल पाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस बारे में अब तक क्या प्रयास हुए हैं इसकी भी जानकारी लोगों को नहीं है। इस बारे में सीईपीसी चेयरमैन कुलदीप राज वाटल ने कहा कि इसके लिए वस्त्र मंत्रालय और वित्त मंत्रालय में प्रतिनिधित्व दिया जा चुका है। वस्त्र मंत्री ने खुद पहल की है। कहा कि वे चाहते हैं कि कोई भी योजना केवल एक वर्ष के लिए कम से कम पांच वर्ष के लिए बने तो शायद उद्योग का कुछ लाभ हो।
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क्या है इंट्रेस्ट सबवेंशन?
फोटो-52 (यूबीआई के मुख्य प्रबंधक-पीके साहू)
भदोही। यूबीआई के मुख्य प्रबंधक प्रशांत कुमार साहू ने बताया कि कालीन निर्यातक बैंकों से प्री और पोस्ट शिपमेंट एडवांस लेते हैं जिस पर उन्हें बैंकों को ब्याज चुकाना पड़ता है। बताया कि वर्तमान में यह ब्याज दर 10 प्रतिशत के आसपास है। इसी ब्याज में निर्यातकों को केंद्र सरकार 3 प्रतिशत की राहत देती है जिसे इंट्रेस्ट सबवेंशन कहा जाता है। उन्होंने कहा कि दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि निर्यातक जो 10 प्रतिशत ब्याज बैंकों को देते हैं उसमें तीन प्रतिशत उन्हें वापस मिल जाता है।
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