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Bhadohi News: इलाज का खर्च न देने पर बीमा कंपनी पर लगाया 25 हजार का जुर्माना
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जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने आईसीआईसीआई लोंबार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी को बीमार महिला को इलाज का खर्च न देने पर 25 हजार का जुर्माना लगाया है।
दो माह में रकम न देने पर कंपनी को इलाज का खर्च, क्षतिपूर्ति के साथ नौ प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज चुकाना होगा। गोपीगंज के सोनिया तालाब निवासी रागिनी मिश्रा और उनके पति अजीत कुमार पाठक ने चार अप्रैल 2025 को आयोग में परिवाद दाखिल किया। इसमें बताया कि उसने आईसीआईसीआई लोंबार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी से हेल्थ बीमा लिया है।
रागिनी के बीमार होने पर उसने इलाज पर 54 हजार 15 रुपये खर्च किए। क्लेम बीमा कंपनी में दावा किया, लेकिन बिना जांच पड़ताल के ही कंपनी की ओर से उसका क्लेम और बीमा बांड को ही रदद् कर दिया गया। परिवादी की तरफ से अप्रैल 2025 में आयोग में बीमा कंपनी के अनैतिक व्यवहार के लिए 50 हजार क्षतिपूर्ति, बांड निरस्त करने पर क्षतिपूर्ति के लिए 15 लाख और वाद व्यय 10 हजार दिलाने के लिए वाद दाखिल किया गया।
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परिवादी अजीत पाठक ने बताया कि उन्होंने 2023 में अपने दो बच्चों और पत्नी के हेल्थ सुरक्षा के लिए कंपनी से बांड लिया था।
जिसकी समय-समय पर सालाना 16 हजार 399 रूपये किस्त भी जमा किया। बताया कि पालिसी में 58 लाख का इलाज कैशलेस होने का जिक्र है।
जुलाई 2024 में उनकी पत्नी रागिनी मिश्रा की तबियत खराब हो गई। जिसका उपचार राममूर्ति अस्पताल कटका में कराया गया जहां 54 हजार से अधिक खर्च हुआ। अजीत ने व्यय खर्च के लिए क्लेम किया, लेकिन उसको निरस्त कर दिया गया।
आयोग ने इस मामले में बीमा कंपनी को नोटिस जारी किया। बीमा कंपनी ने फर्जी कागजात होने का हवाला दिया। कहा कि परिवादी ने पहले उपचार कराकर जुलाई में दिखाया। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं का बहस सुनने के बाद आयोग के अध्यक्ष संजय कुमार डे, सदस्य विजय बहादुर सिंह, दीप्ति श्रीवास्तव ने परिवाद को स्वीकार किया।
बीमा कंपनी को आदेश दिया कि परिवादी को राममूर्ति अस्पताल में कराए गए इलाज खर्च 54 हजार 15 रुपये, सेवा में कमी करने पर 25 हजार क्षतिपूर्ति और वाद-व्यय का खर्च 10 हजार का भुगतान करें। आदेश के दो माह के अंदर भुगतान न होने पर नौ प्रतिशत साधारण ब्याज के साथ क्षतिपूर्ति देनी होगी।
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दो माह में रकम न देने पर कंपनी को इलाज का खर्च, क्षतिपूर्ति के साथ नौ प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज चुकाना होगा। गोपीगंज के सोनिया तालाब निवासी रागिनी मिश्रा और उनके पति अजीत कुमार पाठक ने चार अप्रैल 2025 को आयोग में परिवाद दाखिल किया। इसमें बताया कि उसने आईसीआईसीआई लोंबार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी से हेल्थ बीमा लिया है।
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रागिनी के बीमार होने पर उसने इलाज पर 54 हजार 15 रुपये खर्च किए। क्लेम बीमा कंपनी में दावा किया, लेकिन बिना जांच पड़ताल के ही कंपनी की ओर से उसका क्लेम और बीमा बांड को ही रदद् कर दिया गया। परिवादी की तरफ से अप्रैल 2025 में आयोग में बीमा कंपनी के अनैतिक व्यवहार के लिए 50 हजार क्षतिपूर्ति, बांड निरस्त करने पर क्षतिपूर्ति के लिए 15 लाख और वाद व्यय 10 हजार दिलाने के लिए वाद दाखिल किया गया।
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परिवादी अजीत पाठक ने बताया कि उन्होंने 2023 में अपने दो बच्चों और पत्नी के हेल्थ सुरक्षा के लिए कंपनी से बांड लिया था।
जिसकी समय-समय पर सालाना 16 हजार 399 रूपये किस्त भी जमा किया। बताया कि पालिसी में 58 लाख का इलाज कैशलेस होने का जिक्र है।
जुलाई 2024 में उनकी पत्नी रागिनी मिश्रा की तबियत खराब हो गई। जिसका उपचार राममूर्ति अस्पताल कटका में कराया गया जहां 54 हजार से अधिक खर्च हुआ। अजीत ने व्यय खर्च के लिए क्लेम किया, लेकिन उसको निरस्त कर दिया गया।
आयोग ने इस मामले में बीमा कंपनी को नोटिस जारी किया। बीमा कंपनी ने फर्जी कागजात होने का हवाला दिया। कहा कि परिवादी ने पहले उपचार कराकर जुलाई में दिखाया। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं का बहस सुनने के बाद आयोग के अध्यक्ष संजय कुमार डे, सदस्य विजय बहादुर सिंह, दीप्ति श्रीवास्तव ने परिवाद को स्वीकार किया।
बीमा कंपनी को आदेश दिया कि परिवादी को राममूर्ति अस्पताल में कराए गए इलाज खर्च 54 हजार 15 रुपये, सेवा में कमी करने पर 25 हजार क्षतिपूर्ति और वाद-व्यय का खर्च 10 हजार का भुगतान करें। आदेश के दो माह के अंदर भुगतान न होने पर नौ प्रतिशत साधारण ब्याज के साथ क्षतिपूर्ति देनी होगी।