फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bhadohi News ›   Infectious diseases increased, immunity decreased

Bhadohi News: संक्रामक बीमारियां बढ़ीं, रोग प्रतिरोधक क्षमता घटी

Sat, 25 Oct 2025 12:22 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 25 Oct 2025 12:22 AM IST
विज्ञापन
Infectious diseases increased, immunity decreased
ज्ञानपुर जिला अस्पताल के ओपीडी पर लगी मरीजों की भीड़। संवाद
ज्ञानपुर। दिवाली पर पटाखों की आतिशबाजी से कालीन नगरी की हवा प्रदूषित हो गई है। शुक्रवार को एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 160 पर रहा। प्रदूषण बढ़ने के चलते लोगों की सेहत पर इसका असर पड़ा है। बीते साल के मुकाबले सरकारी अस्पतालों में 20 से 25 फीसदी मरीज बढ़े हैं। ऐसे मौसम में संक्रामक बीमारियां तेजी से पांव पसार रही हैं। इसकी चपेट में बच्चे, युवा और बुजुर्ग आ रहे हैं। पटाखों के धुआं से दमा के मरीजों की सांसत बढ़ी है। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. प्रदीप यादव ने बताया कि बच्चों में 70 फीसदी निमोनिया और 20 फीसदी डायरिया होने का डर रहता है। किशोर, बुजुर्गों में संक्रामक बीमारी होती है। जैसे सर्दी-जुकाम, वायरल बुखार, गले में खरास आदि। गत वर्ष अक्तूबर में औसतन हर रोज जिला अस्पताल में करीब 800, एमबीएस में 750 की ओपीडी होती थी। इसके अलावा सभी सीएचसी पर 200 से 250 और पीएचसी पर औसतन 40 से 50 लोगों की ओपीडी होती थी। इस बार 20 से 25 फीसदी मरीज इन स्वास्थ्य केंद्रों पर बढ़े हैं। दिवाली से पूर्व ओपीडी में दमा के मरीज दो से तीन की संख्या में आते थे लेकिन दिवाली के बाद से ओपीडी में 15 से 20 मरीज ही पहुंच रहे हैं। करियांव पीएचसी प्रभारी डॉ. प्रियरंजन तिवारी ने बताया कि कोविड के बाद लोग एहतियात बरतना भूल गए हैं। यह संक्रामक बीमारी से ग्रसित होने की मुख्य वजह है। ऐसे मौसम में मास्क लगाया जाए तो कई बीमारियों से बचा जा सकता है। ऐसे मौसम में बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा परेशानी होती है। इनकी प्रतिरोधक क्षमता कम होने से बीमारियों की चपेट में आते हैं। भदोही एमबीएस के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश रावत
विज्ञापन

ने बताया कि इन दिनों पांच साल तक के 70 फीसदी बच्चे निमोनिया से ग्रसित हैं। क्योंकि बच्चों में पहले जुकाम होता है। लापरवाही बरतने पर वह निमोनिया में तब्दील हो जाता है। साफ-सफाई न होने से बच्चों में इन्फेक्शन फैल जाता है, जो डायरिया में तब्दील हो जाता है। 20 फीसदी बच्चे डायरिया और 10 फीसदी बच्चे अन्य बीमारियों से ग्रसित हैं। करियांव पीएचसी प्रभारी डॉ. प्रियरंजन तिवारी ने बताया कि मौसम ठंडा हुआ है। इन दिनों ओपीडी में इन्फेक्शन, दमा, एलर्जी, वायरल बुखार के मरीज अधिक आ रहे हैं। ओपीडी में हर दिन 10 से 15 दमा के मरीज पहुंच रहे हैं। गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियां पैर पसारती हैं। इससे बचाव के लिए साफ-सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखें। बीमारी से ग्रसित होने पर बच्चे और बुजुर्गों की प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है। जिला चिकित्सालय में अस्थमा के एक्सपर्ट डॉक्टर नहीं हैं। मरीज आमतौर पर फिजीशियन डॉ. प्रदीप यादव से दवा लेते हैं। उन्होंने बताया कि दिवाली के बाद से अस्पताल में अस्थमा के मरीजों की संख्या में वृद्धि हुईं है। हर रोज 15 से 20 मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। ऐसे मरीज इन दिनों सुबह-शाम टहलने से बचें और दवा अपने पास रखें। कहा कि अस्थमा के मरीजों को अकेले सफर करने से बचना चाहिए। मौसम साफ होने के बाद ही मार्निंग वॉक पर निकलें।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article