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इंडिया कार्पेट एक्स्पो: नहीं आए अमेरिकी आयातक
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भदोही। नई दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे इंडिया कार्पेट एक्सपो में कालीन निर्यातकों की प्रतिक्रिया काफी सामान्य मिल रही है। फेयर में अमेरिकी टैरिफ के चलते फेयर में अमेरिकी आयातक नहीं आएं हैं। जनपद से गए निर्यातकों ने बताया कि भारतीय कालीनों के प्रमुख आयातक अमेरिकी बॉयरों की फेयर में कम भागीदारी दिखाई दे रही है। बताया कि रूस के कुछ खरीदार फेयर में दिख रहे हैं, जो बहुत सीमित मात्रा में खरीदारी करते हैं।
इंडिया कार्पेट एक्स्पो का मंगलवार को दूसरा दिन था। नईबाजार भदोही के कालीन निर्यातक वकार इस्लाम ने बताया कि अमेरिका के निर्यातक बहुत ही कम हैं। । इसके अलावा दूसरे देशों के आयातकों की भागीदारी कुछ अधिक है। कुल मिलाकर भारतीय निर्यातकों के लिए यह एक्सपो सामान्य। अन्य निर्यातकों की मानें तो फेयर की घोषणा के बाद अमेरिकी टैरिफ बढ़ाने की घोषणा का प्रतिकूल असर पड़ा है। इससे ऐन मौके पर बहुत से अमेरिकी आयातक नहीं आए। कई लोगों ने बताया कि फेयर में रूस के आयातक दिख रहे हैं। वे तैयार माल ढूंढ रहे हैं। उनकी खरीदारी सीमित मात्रा में होती है। उन्होंने कई स्टालों पर माल देखे और जानकारी प्राप्त की। निर्यातकों ने बताया कि वे लोगों के घर पर पड़े माल भी खरीद सकते हैं यदि पसंद आए।
भदोही। कालीन निर्यात संवर्धन (सीईपीसी) ने मंगलवार की शाम प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि दूसरे दिन 195 खरीदार फेयर में पहुंचे। जिसमें मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, बेल्जियम, ब्राज़ील, बुल्गारिया, कनाडा, मिश्र, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, कज़ाकिस्तान, स्विट्जर्लैंड, ताइवान, टर्की, युएसए जैसे देश शामिल है। सीईपीसी चेयरमैन कुलदीप राज वाटल ने बताया कि दूसरे दिन अरुण कुमार सिंह सांसद एवं राज्यसभा सदस्य, उप्र के एमएसएमई, खादी, ग्रामोद्योग, रेशम उत्पादन, राकेश सचान, उप्र श्रम एवं सेवायोजन, समन्वय विभाग अनिल राजभर मेले में पहुंचे और भारतीय उत्पादों और मेले की व्यवस्था की सराहना की |
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यह फेयर सामान्य है। अमरीकी निर्यातक नहीं के बराबर हैं। आने वाले समय में अमरीकी टैरिफ ही भारतीय कालीन उद्योग की दशा और दिशा तय करेगा। इसके लिए भारत सरकार को पहल करनी चाहिए। -राजीव गुप्ता निर्यातक (फोटो-21)
फेयर बहुत अच्छा भी नहीं है और खराब भी नहीं कहा जाएगा। एन मौके पर अमरीकी टैरिफ के चलते बहुत से अमरीकी आयातक नहीं आए। रूस समेत अन्य देशों के खरीदार मेले में दिखे और खरीदारी भी की। -एजाज अंसारी, निर्यातक (फोटो-22)
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इंडिया कार्पेट एक्स्पो का मंगलवार को दूसरा दिन था। नईबाजार भदोही के कालीन निर्यातक वकार इस्लाम ने बताया कि अमेरिका के निर्यातक बहुत ही कम हैं। । इसके अलावा दूसरे देशों के आयातकों की भागीदारी कुछ अधिक है। कुल मिलाकर भारतीय निर्यातकों के लिए यह एक्सपो सामान्य। अन्य निर्यातकों की मानें तो फेयर की घोषणा के बाद अमेरिकी टैरिफ बढ़ाने की घोषणा का प्रतिकूल असर पड़ा है। इससे ऐन मौके पर बहुत से अमेरिकी आयातक नहीं आए। कई लोगों ने बताया कि फेयर में रूस के आयातक दिख रहे हैं। वे तैयार माल ढूंढ रहे हैं। उनकी खरीदारी सीमित मात्रा में होती है। उन्होंने कई स्टालों पर माल देखे और जानकारी प्राप्त की। निर्यातकों ने बताया कि वे लोगों के घर पर पड़े माल भी खरीद सकते हैं यदि पसंद आए।
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भदोही। कालीन निर्यात संवर्धन (सीईपीसी) ने मंगलवार की शाम प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि दूसरे दिन 195 खरीदार फेयर में पहुंचे। जिसमें मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, बेल्जियम, ब्राज़ील, बुल्गारिया, कनाडा, मिश्र, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, कज़ाकिस्तान, स्विट्जर्लैंड, ताइवान, टर्की, युएसए जैसे देश शामिल है। सीईपीसी चेयरमैन कुलदीप राज वाटल ने बताया कि दूसरे दिन अरुण कुमार सिंह सांसद एवं राज्यसभा सदस्य, उप्र के एमएसएमई, खादी, ग्रामोद्योग, रेशम उत्पादन, राकेश सचान, उप्र श्रम एवं सेवायोजन, समन्वय विभाग अनिल राजभर मेले में पहुंचे और भारतीय उत्पादों और मेले की व्यवस्था की सराहना की |
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यह फेयर सामान्य है। अमरीकी निर्यातक नहीं के बराबर हैं। आने वाले समय में अमरीकी टैरिफ ही भारतीय कालीन उद्योग की दशा और दिशा तय करेगा। इसके लिए भारत सरकार को पहल करनी चाहिए। -राजीव गुप्ता निर्यातक (फोटो-21)
फेयर बहुत अच्छा भी नहीं है और खराब भी नहीं कहा जाएगा। एन मौके पर अमरीकी टैरिफ के चलते बहुत से अमरीकी आयातक नहीं आए। रूस समेत अन्य देशों के खरीदार मेले में दिखे और खरीदारी भी की। -एजाज अंसारी, निर्यातक (फोटो-22)