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Bhadohi News: एक साल में 1538 महिलाओं ने निजी अस्पतालों में कराया अल्ट्रासाउंड

Sun, 16 Mar 2025 11:51 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 16 Mar 2025 11:51 PM IST
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In one year, 1538 women got ultrasound done in private hospitals
जिले के सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड की सुविधा न मिलने के कारण महिलाएं निजी अस्पतालों में पहुंच रही हैं।
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निजी अस्पतालों में भी प्रसूताओं का निशुल्क अल्ट्रासाउंड किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक एक साल में 1538 महिलाओं ने निजी अस्पतालों में निशुल्क अल्ट्रासाउंड कराया।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से अप्रैल 2024 से लेकर अब तक 4046 क्यूआर कोड जारी किए गए। इसमें केवल 1538 महिलाओं ने अल्ट्रासाउंड कराया। अल्ट्रासाउंड का खर्च सरकार वहन करती है।
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जिले में सरकारी अस्पतालों में प्रसव का ग्राफ बढ़ाने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अब तक सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं है। केवल एमबीएस अस्पताल को छोड़ दिया जाए तो किसी भी सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा मरीजों को नहीं मिल रही है। ऐसे में विभाग की ओर से निजी अस्पतालों में प्रसूताओं के लिए निशुल्क अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था की गई है।
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अप्रैल 2024 से शुरू हुई व्यवस्था के बाद अब तक 1538 महिलाओं ने निशुल्क अल्ट्रासाउंड का लाभ लिया है।
वहीं विभाग की ओर से 4046 क्यूआर कोड जारी हुए हैं। क्यूआर कोड अधिक जारी होने के सवाल पर विभाग का कहना है कि अधिकतर महिलाएं चिकित्सक की ओर से अल्ट्रासाउंड के लिए लिखने के बाद तत्काल किसी निजी सेंटर पर जाकर अल्ट्रासाउंड करा लेती हैं। इसके कारण क्यूआर कोड की संख्या अधिक और निजी अस्पताल में निशुल्क अल्ट्रासाउंड कराने वाली संख्या में अंतर है।
महीने में चार दिन करा सकते हैं निशुल्क अल्ट्रासाउंड
हर निजी अस्पताल में प्रसूताओं को महीने में चार निर्धारित तारीख 01, 09, 16 और 24 तारीख को निशुल्क अल्ट्रासाउंड की सुविधा मिलती है। संबंधित स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक प्रसूताओं को अल्ट्रासाउंड के लिए लिखने के बाद वे निजी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड का लाभ ले सकती हैं। इसके लिए विभाग की ओर से क्यूआर कोड भी जारी किया जाता है। सीएमओ डॉ. एसके चक ने बताया कि

प्रसूताओं को लेकर शासन की ओर से प्रयास हो रहे हैं। उनके इलाज में किसी तरह की लापरवाही न हो। इसके लिए यह व्यवस्था की गई है। निजी अस्पताल संचालकों को सख्ती से इसका पालन करने का निर्देश दिया गया है। गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा विभागीय प्राथमिकता में शामिल रहा है।
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