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Bhadohi News: अल्लाह की रजा में पूरी रात अकीदतमंदों ने की तिलावत

Wed, 08 Mar 2023 08:11 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 08 Mar 2023 08:11 PM IST
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In Allah's will, devotees recited the whole night
चार मुकद्दस की रातों के तीसरी रात शब-ए-बारात जिले में अकीदत मंदों ने तिलावत के साथ मनाई। आकर्षक विद्युत लाइटों से जगमग रहे इबादतगाह से लेकर घरों तक कुरआन की आयतें गूंजतीं रही। होलिका दहन और शब-ए-बारात एक ही रात होने पर पुलिस प्रशासन का चक्रमण तब तक जारी रहा जब होलिका का दहन हुआ और इबादतगाहों से तिलावत करने वाले भोर में अपने घरों को पहुंचे। मान्यता है कि इस्लाम धर्म में शब-ए-बारात की रात में की गई इबादत का सबाब बहुत ज्यादा मिलता है। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक माह-ए-शाबान को बेहद पाक और मुबारक महीना भी माना जाता है। लफ्जों में शब और बारात से मिलकर शब-ए-बारात बना है। शब से मतलब रात से है और बारात का मतलब बरी यानि गुनाहों से बरी होने वाली रात से है। उलमा-ए-करीम कहते हैं कि शब-ए बारात की रात ऐसी रात है जो सभी गुनाहों से माफी दिलाती है। इस पाक रात के दिन जो भी सच्चे दिल से अल्लाह की इबादत करता हैं। उसके सामने अपने गुनाहों से तौबा करता है और परवरदिगार उसे माफी अता करता है। यही वजह है कि समुदाय के लोग इसके लिए खास तैयारियां करते हैं। इस दिन सिर्फ खुदा की इबादत नहीं की जाती बल्कि वो अपने जो अल्लाह को प्यारे हो गए हैं, उनकी कब्र पर जाकर पूरी रात दुआ की जाती है। फूल, अगरबत्ती के जरिए उनको याद करते हैं। कब्रों पर चिराग जलाते हैं और दुनिया को अलविदा कह गए अपनों के लिए मगफिरत की दुआएं पढ़ी जाती हैं। माना जाता है कि रहमत की इस रात में अल्लाह पाक कब्र के सभी मुर्दों को आजाद कर देता है। उनके व अपने इस रात वापस अपने घर का रुख कर सकते हैं इसलिए शब-ए -बारात की रात मीठा बनाने का रिवाज है। ज्ञानपुर नगर, माधोसिंह, खमरिया, उगापुर, चौरी, दुर्गागंज, सुरियावां, सूफीनगर, गोधना, दरवांसी, वहिदानगर, सुभाषनगर, बिछिया, सुंदरपुर, नागमलपुर, कसिदहां, मैलौना, कोइरौना, कटरा, सीतामढ़ी, भदोही नगर, नईबाजार, सरोई, औराई, घोसिया, लालानगर, जंगीगंज के मस्जिदों, कब्रिस्तानों में पहुंचे लोग अपने पूर्वजों को याद किया। उसके बाद इबादत गाह में पूरी रात कुरआन-ए-पाक की तिलावत कर गुनाहों से माफी और अच्छे कार्यों के लिए दुआ मांगी। घरों में महिलाओं ने नमाज अता कर तिलावत-ए-कुरआन को महत्व दिया। मीठे पकवानों से पूर्वजों के नाम फातिहा पढ़कर नवाजा। युवा वर्ग बुजुर्गानेदीन के आस्ताने पर हाजिरी लगाकर शिरनी, चादर चढ़ाई।
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