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बजट के अभाव में टूटी उम्मीदें, स्टेशनरी को तरसे नौनिहाल

Fri, 13 May 2022 10:51 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 13 May 2022 10:51 PM IST
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Hopes broken due to lack of budget, stationery yearned
ज्ञानपुर/चौरी। नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 1225 गरीब बच्चे स्टेशनरी को तरस गए हैं। शिक्षा विभाग की उदासीनता के कारण दो साल से उन्हें स्टेशनरी के लिए मिलने वाले पांच-पांच हजार रुपये नहीं मिल सके हैं। जिससे अभिभावक चिंतित हो गए हैं। धनराशि न मिलने के पीछे विभागीय अधिकारी बजट का अभाव बताते हैं। गरीब परिवार के बच्चे आर्थिक तंगी के कारण अपने सपने को पूरा नहीं कर पाते। इसे देखते हुए शासन स्तर से आरटीई के तहत प्राइवेट स्कूलों में 25 फीसद सीटों पर गरीब बच्चों को प्रवेश लेने की व्यवस्था सुनिश्चित की है। शैक्षणिक सत्र 2020-21 और 2021-22 में 1225 बच्चों ने अलग-अलग कान्वेंट स्कूलों में प्रवेश लिया। शासन की ओर से प्राइवेट स्कूलों को फीस तो मुहैया हो गई लेकिन पढ़ने के लिए किताब सहित अन्य जरूरी सामानों को खरीदने के लिए मिलने वाले पांच-पांच हजार रुपये दो साल से नहीं मिले। जिससे कर्ज आदि लेकर कुछ अभिभावकों ने बच्चों की स्टेशनरी खरीद ली, लेकिन कुछ बच्चों ने सहयोगियों के किताबों से अपनी पढ़ाई पूरी की। दो साल से पैसा न मिलने से अभिभावक परेशान हैं। वेदमनपुर के सर्वेश दुबे के दो बच्चे प्राइवेट स्कूल में पढ़ते हैं लेकिन दो वर्ष से इनको स्टेशनरी के लिए आने वाला पैसा नहीं मिला। इसके लिए वह लगातार विभाग का चक्कर भी लगा रहे हैं। वेदमनपुर के हसन अंसारी ने भी 2021 में अपनी बेटी का प्रवेश कराया, लेकिन स्टेशनरी का पैसा नहीं आया। चौरी खास के अनिल चौरसिया के दो बच्चों का भी पैसा नहीं मिला है।
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