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दो साल से नहीं दिया गया मानदेय, अनशन
भदोही/ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Wed, 01 Jun 2016 01:22 AM IST
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मानदेय के लिए कलेक्ट्रेट पर परिवार के साथ अनशन पर बैठे विशेष बाल श्रमिक विद्यालयों के शिक्षक और रसोइयां।
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करीब दो साल से कलेक्ट्रेट का चक्कर लगाकर थक चुके विशेष बाल श्रमिक विद्यालयों में तीन साल तक पढ़ाने वाले अनुदेशकों ने मानदेय के लिए मंगलवार से कलेक्ट्रेट परिसर में क्रमिक अनशन शुरू कर दिया। आरोप लगाया कि बजट होने के बाद भी उनका मानदेय नहीं दिया जा रहा है। चेतावनी दी कि जल्द मानदेय नहीं मिला तो वह भूख हड़ताल करने के लिए बाध्य होंगे।
अनुदेशकों ने बताया कि राष्ट्रीय बालश्रम परियोजना के तहत 2011 में जनपद के अलग-अलग हिस्सों में 35 विशेष बाल श्रमिक विद्यालय खोले गए। बच्चों को पढ़ाने के लिए करीब 105 अनुदेशक रखे गए। तीन साल के बाद 2014 में विद्यालय बंद हो गए। अनुदेशकों का नौ माह का मानदेय विभागीय स्तर से बजट न होने का हवाला देते हुए नहीं दिया गया। करीब एक साल बाद 2015 में भारत सरकार ने बजट भेज दिया, लेकिन प्रशासन की ओर से उन्हें बार-बार परेशान किया जा रहा है।
कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार कौशल मिशन के तहत बेरोजगारों को रोजगार से जोड़ रही हैं, लेकिन जिला प्रशासन बेरोजगारों को काम कराकर उनका मानदेय नहीं दे रही है। इस मौके पर अशफाक , राजन पाल, सभाजीत, बीएल सरोज, महेश मिश्रा, महेशमा बानो, रामचंद्र बिंद, जुबैदा खातून, संतोष सरोज, सुमन मिश्रा, दिवाकर, रामचंद्र आदि मौजूद रहे।
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अनुदेशकों ने बताया कि राष्ट्रीय बालश्रम परियोजना के तहत 2011 में जनपद के अलग-अलग हिस्सों में 35 विशेष बाल श्रमिक विद्यालय खोले गए। बच्चों को पढ़ाने के लिए करीब 105 अनुदेशक रखे गए। तीन साल के बाद 2014 में विद्यालय बंद हो गए। अनुदेशकों का नौ माह का मानदेय विभागीय स्तर से बजट न होने का हवाला देते हुए नहीं दिया गया। करीब एक साल बाद 2015 में भारत सरकार ने बजट भेज दिया, लेकिन प्रशासन की ओर से उन्हें बार-बार परेशान किया जा रहा है।
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कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार कौशल मिशन के तहत बेरोजगारों को रोजगार से जोड़ रही हैं, लेकिन जिला प्रशासन बेरोजगारों को काम कराकर उनका मानदेय नहीं दे रही है। इस मौके पर अशफाक , राजन पाल, सभाजीत, बीएल सरोज, महेश मिश्रा, महेशमा बानो, रामचंद्र बिंद, जुबैदा खातून, संतोष सरोज, सुमन मिश्रा, दिवाकर, रामचंद्र आदि मौजूद रहे।
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