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रोडटेप की दरें घोषित करने का मिला भरोसा
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भदोही। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) ने महानिदेशक विदेश व्यापार (डीजीएफटी) वाणिज्य मंत्रालय भारत सरकार के समक्ष कालीन उद्योग की जीएसटी, रोडटेप समेत ड्रॉबैक की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है। सोमवार को नई दिल्ली में हुई वर्चुअल बैठक में सभी निर्यात संवर्धन परिषदों के पदाधिकारी शामिल हुए। चेयरमैन सीईपीसी उमर हमीद ने उद्योग की समस्याओं से अवगत कराते हुए रोडटेप में मिलने वाले सहयोग राशि की दर भी शीघ्र तय करने की मांग की। महानिदेशक ने एक सप्ताह के अंदर दरें लागू करने का भरोसा दिया है।
मार्च 2020 में शुरू हुए कोरोना के कहर के बाद से लेकर अब तक कालीन उद्यमियों के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ मिल पाना टेढ़ी खीर साबित हुआ है। ऊपर से जीएसटी की विसंगतियों ने लोगों के सामने नई नई समस्याएं खड़ी की हैं। पिछले काफी समय से कालीन निर्यातक ड्रॉ बैक को लेकर परेशान थे। निर्यातकों का कहना है कि ड्राबैक के छोटे छोटे भुगतान तो वाणिज्य मंत्रालय से हो जा रहा है लेकिन बड़ी धनराशि निर्गत नहीं करने से निर्यातकों के करोड़ों रुपये फंसे हैं। उद्यमियों का प्रतिनिधित्व कर रहे सीईपीसी चेयरमैन ने डीजीएफटी को विसंगतियों से अवगत कराया और विभाग में हेल्पलाइन सेल बनाने बनाने की वकालत की। उन्होंने डीजीएफटी को बताया कि कालीन निर्यातकों के जीएसटी रिफंड और ड्रा बैक मिलने में कठिनाई हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका एक प्रमुख कारण भ्रष्टाचार भी है, क्योंकि कार्यालयों में बैठे बाबू रिश्वत की मांग करते हैं। उन्होंने कंटेनरों की किल्लत और माल भाड़ा तीन गुना तक बढने के मामले में हस्तक्षेप की मांग की।
चेयरमैन ने बताया कि डीजीएफटी ने रोडटेप की नई दरें एक सप्ताह में घोषित करने का आश्वासन दिया। इसके अलावा जीएसटी समेत फंसे ड्रा बैक के बारे में बजट प्रावधान की समस्या बताई। वर्चुअल बैठक में दूसरे निर्यात संवर्धन परिषदों के पदाधिकारियों ने भी अपनी समस्याएं रखीं।
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मार्च 2020 में शुरू हुए कोरोना के कहर के बाद से लेकर अब तक कालीन उद्यमियों के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ मिल पाना टेढ़ी खीर साबित हुआ है। ऊपर से जीएसटी की विसंगतियों ने लोगों के सामने नई नई समस्याएं खड़ी की हैं। पिछले काफी समय से कालीन निर्यातक ड्रॉ बैक को लेकर परेशान थे। निर्यातकों का कहना है कि ड्राबैक के छोटे छोटे भुगतान तो वाणिज्य मंत्रालय से हो जा रहा है लेकिन बड़ी धनराशि निर्गत नहीं करने से निर्यातकों के करोड़ों रुपये फंसे हैं। उद्यमियों का प्रतिनिधित्व कर रहे सीईपीसी चेयरमैन ने डीजीएफटी को विसंगतियों से अवगत कराया और विभाग में हेल्पलाइन सेल बनाने बनाने की वकालत की। उन्होंने डीजीएफटी को बताया कि कालीन निर्यातकों के जीएसटी रिफंड और ड्रा बैक मिलने में कठिनाई हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका एक प्रमुख कारण भ्रष्टाचार भी है, क्योंकि कार्यालयों में बैठे बाबू रिश्वत की मांग करते हैं। उन्होंने कंटेनरों की किल्लत और माल भाड़ा तीन गुना तक बढने के मामले में हस्तक्षेप की मांग की।
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चेयरमैन ने बताया कि डीजीएफटी ने रोडटेप की नई दरें एक सप्ताह में घोषित करने का आश्वासन दिया। इसके अलावा जीएसटी समेत फंसे ड्रा बैक के बारे में बजट प्रावधान की समस्या बताई। वर्चुअल बैठक में दूसरे निर्यात संवर्धन परिषदों के पदाधिकारियों ने भी अपनी समस्याएं रखीं।
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