फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bhadohi News ›   Goat husbandry will increase the source of income, careful selection in breed selection

बकरी पालन से बढ़ेगी आय की स्रोत,नस्ल चयन में बरते सावधानी

Thu, 20 May 2021 04:55 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 20 May 2021 04:55 PM IST
विज्ञापन
Goat husbandry will increase the source of income, careful selection in breed selection
ज्ञानपुर। कोरोना संक्रमण की महामारी ने देशव्यापी आर्थिक संकट खड़ा कर आम परिवारों को विषम परिस्थितियों से गुजरने के लिए विवश कर रहा है। ऐसे संकट में बकरी का पालन कर प्रवासियों समेत आम पशुपालन आय की स्रोत बढ़ा सकते हैं। पालन करते समय नस्ल के चयन में विशेष सावधानियां बरतने से लागत से कई गुना आय अर्जित किया जा सकेगा।
विज्ञापन

इस संबंध में केवीके बेजवां के पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डा.गोविंद चौधरी ने बताया कि महामारी के कारण कोने-कोने से लाखों मजदूरों का पलायन एक-दूसरे स्थान की ओर देखा जा रहा है। देश में लगभग 3.3 अरब श्रमिक हैं इसमें दो अरब नौकरी पेश और संगठित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्र में है। असंगठित क्षेत्र वाले मजदूरों की रोजी-रोटी पर आफत आई है जिससे बेरोजगारी का सामना मजदूर कर रहे हैं। ऐसे संकट से उबरने के लिए पशुपालन रोजगार का एक बड़ा माध्यम साबित होगा। प्रमाण भी है कि सूखे और महामारी में पशुपालन की ओर लोगों रुझान बढ़ना स्वाभाविक है। क्योंकि इसमें कम लागत होने के साथ आजीविका का विकल्प मिलता है। बकरी का पालन शुरू करने से पहले नस्लों के बारे में जागरूक होना जरूरी है। नस्ल का चयन कर जमुनापारी, बरबरी, सिरोही, विट्ठल तोतापरी, ब्लैक बंगाल, जौनपुरी बकरियों का पालन अधिक आय देता है। झाड़ियों के पत्ते, जंगली घास, पौधों की पत्तियां, खरपतवार आदि सेवन करती है। ध्यान रहे कि बकरियां मौसम के अनुकूल हैं इन्हें ठंड के मौसम में धूप के निकलने और बरसात के दिनों में दलदल वाले स्थानों पर चराने से परहेज करना चाहिए। अगर चराने के लिए जगह पर्याप्त है तो दाना देने की जरूरत नहीं पड़ती लेकिन ज्यादा वजन, उत्पादन लेने के लिए कुछ दानों का मिश्रण देना चाहिए। खनिज मिश्रण-77 देने से लगभग 25 फीसद वजन और मेमनों के विकास में तेजी, प्रजनन समस्या में कम आती है। संक्रामक बीमारियां जैसे बकरी प्ले, इंटेरो टॉक्सेमिया, खुरपका-मुंहपका, निमोनिया काफी घातक होते है। बचाव के लि ए टीकाकरण अवश्य कराए। टीके की दवा बाजार, सरकारी पशु अस्पताल पर आसानी से मिलती है। केंचुआनासी दवा वर्ष में दो बार निश्चित रूप से दी जाए इससे न सिर्फ स्वास्थ्य मजबूत रहता है बल्कि वृद्धि दर बेहतर रहती है। पालन में छोटे भूमिहीन किसानों-बेरोजगार, नवयुवक आगे आकर रोजगार को एक नई दिशा दे सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed