Flood in UP: भदोही में बाढ़ और कटान...बीते साल के रिकॉर्ड जलस्तर को पार कर गई गंगा, 78.20 मीटर पहुंचा पानी
Flood in UP: यूपी के भदोही जिले में गंगा में बढ़ाव के कारण कई इलाकों में कटान का दंश भी झेलना पड़ रहा है। यहां के लोग हर बाढ़ में अपनी जमीनें गंवा चुके हैं। वहीं, बाढ़ के कारण गांव के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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Flood in Bhadohi: गंगा का जलस्तर बीते साल के रिकॉर्ड को पार कर गया है। केंद्रीय जल आयोग के मीटर गेज पर रविवार की शाम पांच बजे तक गंगा का जलस्तर 78.20 मीटर पहुंचा गया। बीते साल 15 सितंबर को जलस्तर 78 मीटर तक पहुंचा था। लगातार बढ़ रहे जलस्तर के बीच तटवर्ती क्षेत्र के लोगों की धड़कनें बढ़ गई हैं।
गंगा के तटवर्ती क्षेत्र में फिलहाल अभी पूर्वा हवाओं का असर नहीं के बराबर है। इस कारण कटान का असर कम देखने को मिल रहा है। बारिश से किसानों की लगभग दो बीघा जमीन गंगा में समा गई है। कुछ क्षेत्रों में आंशिक कटान शुरू हो गया है। गंगा में बाढ़ का पानी तेजी से घाटों की ओर बढ़ रहा है। उधर, पीपा पुल वाले तीनों गंगा घाटों पर नौका संचालन बंद कर दिया गया है।
नौका संचालन बंद होने से यात्रियों को असुविधा हो रही है। सीतामढ़ी स्थित उड़िया बाबा आश्रम चार फीट तक पानी में डूब गया है। कोनिया के कटान प्रभावित गांव छेछुआ, भुर्रा, बसगोती मवैया, इटहरा आदि गांवों में गंगा तरी की जमीन पानी में डूबती जा रही हैं। जलस्तर बढ़ने से किसानों की नींद उड़ गई है।
बोली छेछुआ की महिलाएं, अधिकारी आते हैं और देखकर चले जाते हैं
रविवार को अमर उजाला की टीम छेछुआ गांव के कटान क्षेत्र में पहुंची। टीम को देख पुरुषों के साथ गांव की कई महिलाएं पहुंच गईं। कहा कि अधिकारी आते हैं देख कर चले जाते हैं। संतोषी सिंह, रीना सिंह, शालू सिंह ने कहा कि बाढ़ खेती लील गई।
अब बस्ती की ओर बाढ़ आ रही है। हम बेबस हैं कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है। छेछुआ के पूर्व ग्राम प्रधान जगदीश सिंह का कहना है कि कटान से हरिहरपुर गांव का अस्तित्व समाप्त हो गया। छेछुआ के किसानों की लगभग एक हजार बीघा जमीन गंगा में समा चुकी हैं।
दो बीघा जमीन चढ़ गई कटान की भेंट
छेछुआ गांव के प्रधान अमर बहादुर सिंह ने कहा कि छेछुआ और भुर्रा गांव के किसानों की लगभग दो हजार बीघा जमीन कटान की भेंट चढ़ गई है। तरी की जमीनों को जोड़ दें तो आंकड़ा साढ़े तीन हजार बीघे तक पहुंच जाएगा। भाजपा सरकार से बहुत उम्मीदें हैं। किसानों का कहना है कि गंगा में बाढ़ आने के समय गांव में अधिकारियों से लेकर नेताओं का आना जाना लगा रहता है। आश्वासन मिलता है, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकलता है।
गंगा का जलस्तर 78.20 मीटर तक पहुंच गया है। हालांकि गंगा अभी भी चेतावनी बिंदु से ढाई मीटर दूर हैं। वहीं, खतरे के बिंदु से करीब साढ़े तीन मीटर दूर हैं। गंगा के तटवर्ती इलाकों पर नजर रखी गई है। हर घंटे की रिपोर्ट अधिकारी ले रहे हैं। लोगों को दिक्कत होने पर तत्काल टीमें सक्रिय हो जाएंगी। - सुधीर कुमार पाल, एक्सईएन, नहर।