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Bhadohi News: लगातार मौसम बदलने से बच्चों में बढ़ा निमोनिया का खतरा
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जिला अस्पताल में बच्चें का इलाज करते चिकित्सक। संवाद
ज्ञानपुर। इन दिनों मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। इसका असर अब नौनिहालों की सेहत पर दिखाई देने लगा है। सुबह और रात में ठंड का अहसास होने लगा है। वहीं दिन में तीखी धूप के कारण छोटे बच्चे सर्दी, खांसी और बुखार की चपेट में आ रहे हैं। नवजात शिशुओं से लेकर पांच साल तक के बच्चों में निमोनिया का खतरा भी बढ़ा है। ऐसे में बच्चों के सेहत केे प्रति इस मौसम में सतर्क रहने की जरूरत है।
जिला अस्पताल में रोजाना 10 से 12 बच्चे निमोनिया के लक्षण वाले पहुंच रहे हैं। इसके आधार पर डॉक्टर उन्हें दवाएं दे रहे हैं। ऐसे मौसम में अभिभावकों को सतर्क रहने की जरूरत है। जिला अस्पताल में हर दिन 700 से 800 की ओपीडी होती है। इसमें से 50 से 60 ओपीडी बाल रोग विभाग में होती है। इसमें 10-12 बच्चे ऐसे आते हैं, जिनमें निमोनिया के लक्षण दिखते हैं।
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी बिंद ने बदलते मौसम में बच्चों की देखभाल में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि सर्दी की शुरुआत के साथ ही मौसम का बदलता मिजाज बच्चों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। ऐसे मौसम में लोगों को दिन में तेज धूप का अहसास होने लगा है। अभिभावक बच्चों को सामान्य कपड़ों में रखते हैं, जबकि सुबह और रात में ठंड पड़ रही है।
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ऐसे में तापमान में उतार-चढ़ाव के बीच बच्चे ठंड लगने और बीमार पड़ने लगे हैं। नवजात शिशुओं और कम उम्र के बच्चों की देखभाल में लापरवाही भारी पड़ सकती है। बच्चों को पंखे, कूलर और एसी की सीधी हवा में सुलाने से बचाना चाहिए। दिन में धूप निकलने पर भी बच्चों को अचानक ठंडे वातावरण में न ले जाएं।
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जिला अस्पताल में रोजाना 10 से 12 बच्चे निमोनिया के लक्षण वाले पहुंच रहे हैं। इसके आधार पर डॉक्टर उन्हें दवाएं दे रहे हैं। ऐसे मौसम में अभिभावकों को सतर्क रहने की जरूरत है। जिला अस्पताल में हर दिन 700 से 800 की ओपीडी होती है। इसमें से 50 से 60 ओपीडी बाल रोग विभाग में होती है। इसमें 10-12 बच्चे ऐसे आते हैं, जिनमें निमोनिया के लक्षण दिखते हैं।
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जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी बिंद ने बदलते मौसम में बच्चों की देखभाल में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि सर्दी की शुरुआत के साथ ही मौसम का बदलता मिजाज बच्चों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। ऐसे मौसम में लोगों को दिन में तेज धूप का अहसास होने लगा है। अभिभावक बच्चों को सामान्य कपड़ों में रखते हैं, जबकि सुबह और रात में ठंड पड़ रही है।
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ऐसे में तापमान में उतार-चढ़ाव के बीच बच्चे ठंड लगने और बीमार पड़ने लगे हैं। नवजात शिशुओं और कम उम्र के बच्चों की देखभाल में लापरवाही भारी पड़ सकती है। बच्चों को पंखे, कूलर और एसी की सीधी हवा में सुलाने से बचाना चाहिए। दिन में धूप निकलने पर भी बच्चों को अचानक ठंडे वातावरण में न ले जाएं।