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पूर्व माध्यमिक स्कूल की छत ढह गई
अमर उजाला ब्यूरो , भदोही
Updated Sat, 20 Aug 2016 01:24 AM IST
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चौरी क्षेत्र के भुलईपुर कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय की ढही छत।
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क्षेत्र के भुलईपुर स्थित कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय के भवन की छत बृहस्पतिवार की देर रात भरभराकर ढह गई। हादसा दिन में होता तो कई मासूमों की जान जा सकती थी। जानकारी मिलने पर गांव के प्रधान समेत तमाम लोग पहुंच गए। छत ढहने से एक तरफ की पूरी दीवार ध्वस्त हो गई। जबकि दो तरफ की दीवारें गिरने के कगार पर पहुंच गई है जो कभी भी गिर सकती हैं। विद्यालय की छत ढहने की खबर पर यहां पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों की रूह कांप उठी।
मालूम हो कि इस विद्यालय का निर्माण 2001 में विभाग की ओर से कराया गया था। इसका उसी साल प्रदेश सरकार में तत्कालीन मंत्री रहे रंगनाथ मिश्र ने उद्धाटन किया था। उसके कुछ साल बाद ही छत समेत दीवार में दरारें पड़ गई थीं। इसकी कई बार ग्रामीणों के अलावा प्रधानाध्यापक ने भी विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत कराकर मरम्मत कराने की मांग की थी। लेकिन, इस पर प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई।
ग्रामीणों के अनुसार विद्यालय के निर्माण में जमकर अनियमितता बरती गई थी। छत निर्माण में आरसीसी और आरबी तकनीकी से न बनाकर सिर्फ ईंटें बिछाकर ढाली गई। इससे भवन की छत से लेकर दीवारे तक कमजोर हो गईं थीं। जानकारी पाकर पहुंचे प्रधानाध्यापक आशीष सिंह ने बताया कि जर्जर भवन की शिकायत उन्होंने कई बार उच्चाधिकारियों को लिखित और मौखिक रूप से किया था। लेकिन, गंभीरता से नहीं लिया गया। यदि यही छत दिन में ढहती तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती। उधर शाम को बीएसए प्रकाश नारायण श्रीवास्तव भी ढहे विद्यालय को देखने पहुंचे और पूछताछ कर लौट गए। कार्यदायी संस्था के खिलाफ कार्रवाई के बाबत पूछने के लिए उन्हें फोन लगाने पर रिसीव नहीं हुआ।
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मालूम हो कि इस विद्यालय का निर्माण 2001 में विभाग की ओर से कराया गया था। इसका उसी साल प्रदेश सरकार में तत्कालीन मंत्री रहे रंगनाथ मिश्र ने उद्धाटन किया था। उसके कुछ साल बाद ही छत समेत दीवार में दरारें पड़ गई थीं। इसकी कई बार ग्रामीणों के अलावा प्रधानाध्यापक ने भी विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत कराकर मरम्मत कराने की मांग की थी। लेकिन, इस पर प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई।
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ग्रामीणों के अनुसार विद्यालय के निर्माण में जमकर अनियमितता बरती गई थी। छत निर्माण में आरसीसी और आरबी तकनीकी से न बनाकर सिर्फ ईंटें बिछाकर ढाली गई। इससे भवन की छत से लेकर दीवारे तक कमजोर हो गईं थीं। जानकारी पाकर पहुंचे प्रधानाध्यापक आशीष सिंह ने बताया कि जर्जर भवन की शिकायत उन्होंने कई बार उच्चाधिकारियों को लिखित और मौखिक रूप से किया था। लेकिन, गंभीरता से नहीं लिया गया। यदि यही छत दिन में ढहती तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती। उधर शाम को बीएसए प्रकाश नारायण श्रीवास्तव भी ढहे विद्यालय को देखने पहुंचे और पूछताछ कर लौट गए। कार्यदायी संस्था के खिलाफ कार्रवाई के बाबत पूछने के लिए उन्हें फोन लगाने पर रिसीव नहीं हुआ।
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