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तीन वर्ष बाद दूसरे गोशाला में संरक्षित होंगे पांच सौ गोवंश
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ज्ञानपुर। भदोही ब्लाक में लगभग तीन वर्ष से संचालित स्थायी गोशाला डुड़वा की भूमि को लेकर पशुपालन विभाग बैकफुट पर आ गया है। गोशाला के रखरखाव की जिम्मेदारी संभाल रहे समाजसेवी द्वारा उक्त भूमि निजी बताने के बाद पशुपालन विभाग गोवंशों को अन्य गोशाला में शिफ्ट करने का काम शुरू कर दिया है। उक्त गोशाला में लगभग 500 गोवंश संरक्षित थे।
जनपद में गोवंश संरक्षण समिति की ओर से 22 अस्थायी, तीन स्थायी गोशालाओं का संचालन हो रहा है। जिसमें लगभग छह हजार से अधिक गोवंश संरक्षित हैं। गोशालाओं में गायों के संरक्षण की जिम्मेदारी पंचायत विभाग की होती है। शासन स्तर से खानपान में प्रति गोवंश 30 रुपये की दर से धनराशि भी जारी की जाती है। जिले में इस मद में अब तक लगभग 12 करोड़ की धनराशि खर्च की जा चुकी है। डुडवा गोशाला के रखरखाव की जिम्मेदारी तीन वर्ष से समाजसेवी भोलानाथ शुक्ला उठाते रहे हैं। जानकारी के मुताबिक वह जमीन उन्हीं की थी। उन्होंने स्वेच्छा से गोशाला निर्माण कराया था। अब उन्होंने उक्त गोशाला की भूमि को निजी बताकर उसे खाली करने की मांग की। जिससे विभागीय परेशानी बढ़ गई।
इसके बाद पशुपालन विभाग ने पशुओं को दूसरी गोशाला में शिफ्ट करना शुरू कर दिया है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. जय सिंह ने बताया कि तीन दिन से विभागीय संसाधनों के साथ निजी वाहनों से गोवंश को दूसरे गोशाला में संरक्षित किया जा रहा है। जिलाधिकारी गौरांग राठी ने एक सप्ताह पूर्व ही समीक्षा बैठक में भदोही तहसील प्रशासन को भूमि चिन्हित कर आवंटन कराने की जिम्मेदारी सौंपी हैं। नए स्थान पर भूमि मिलते ही स्थायी गोशाला का निर्माण कराकर पशुओं को उसमें संरक्षित किया जाएगा।
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जनपद में गोवंश संरक्षण समिति की ओर से 22 अस्थायी, तीन स्थायी गोशालाओं का संचालन हो रहा है। जिसमें लगभग छह हजार से अधिक गोवंश संरक्षित हैं। गोशालाओं में गायों के संरक्षण की जिम्मेदारी पंचायत विभाग की होती है। शासन स्तर से खानपान में प्रति गोवंश 30 रुपये की दर से धनराशि भी जारी की जाती है। जिले में इस मद में अब तक लगभग 12 करोड़ की धनराशि खर्च की जा चुकी है। डुडवा गोशाला के रखरखाव की जिम्मेदारी तीन वर्ष से समाजसेवी भोलानाथ शुक्ला उठाते रहे हैं। जानकारी के मुताबिक वह जमीन उन्हीं की थी। उन्होंने स्वेच्छा से गोशाला निर्माण कराया था। अब उन्होंने उक्त गोशाला की भूमि को निजी बताकर उसे खाली करने की मांग की। जिससे विभागीय परेशानी बढ़ गई।
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इसके बाद पशुपालन विभाग ने पशुओं को दूसरी गोशाला में शिफ्ट करना शुरू कर दिया है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. जय सिंह ने बताया कि तीन दिन से विभागीय संसाधनों के साथ निजी वाहनों से गोवंश को दूसरे गोशाला में संरक्षित किया जा रहा है। जिलाधिकारी गौरांग राठी ने एक सप्ताह पूर्व ही समीक्षा बैठक में भदोही तहसील प्रशासन को भूमि चिन्हित कर आवंटन कराने की जिम्मेदारी सौंपी हैं। नए स्थान पर भूमि मिलते ही स्थायी गोशाला का निर्माण कराकर पशुओं को उसमें संरक्षित किया जाएगा।
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