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भदोही में जुलाई से शुरू होगा पहला ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन, मौसम से होने वाले नुकसान से बच पाएंगे जिले के किसान
Thu, 29 Apr 2021 08:31 PM IST
गीतार्जुन गौतम
अमर उजाला नेटवर्क, भदोही
अमर उजाला नेटवर्क, भदोही
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Thu, 29 Apr 2021 08:31 PM IST
सार
खेतीबारी से लेकर फसल प्रबंधन का भी मिलेगा फायदा
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- फोटो : pexel
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विस्तार
भदोही के ज्ञानपुर में मौसम की सही जानकारी न होने से हर साल किसानों को ओलावृष्टि, शीतलहर, चक्रवात आदि से काफी नुकसान उठाना पड़ता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। जिले में पहला आटोमेटिक वेदर स्टेशन बेजवां में स्थापित होने जा रहा है। जुलाई से इसके चालू हो जाने की संभावना है।
जलवायु परिवर्तन के चलते चक्रवात, ओलावृष्टि, सूखा-बाढ़, गर्म मौसम लू-पाला, शीतलहर आदि की जानकारी देने के लिए जिले में पहला ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन (हवामान स्वचालित केंद्र) जल्दी ही काम करने लगेगा। भारत मौसम विज्ञान विभाग, नई दिल्ली और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के संयुक्त प्रयास से कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां में इसकी स्थापना का काम चल रहा है।
कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के मौसम विशेषज्ञ सर्वेश बरनवाल का कहना है कि आटोमेटिक वेदर स्टेशन से लिए गए मौसम के वास्तविक आंकड़े के आधार पर फसल का प्रबंधन किया जा सकेगा। फसल की उच्चतम वृद्धि व विकास की अवस्था का इसके द्वारा अध्ययन कर भविष्य की फसलों के उच्चतम पैदावार के लिए किया जाएगा। केंद्र के जरिए मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर किसानों को एडवायजरी जारी की जाएगी। जिसके अनुरूप खेती व फसल का प्रबंधन कर किसान नुकसान से बच सकेंगे। जुलाई से इसके शुरू होने की संभावना है।
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जलवायु परिवर्तन के चलते चक्रवात, ओलावृष्टि, सूखा-बाढ़, गर्म मौसम लू-पाला, शीतलहर आदि की जानकारी देने के लिए जिले में पहला ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन (हवामान स्वचालित केंद्र) जल्दी ही काम करने लगेगा। भारत मौसम विज्ञान विभाग, नई दिल्ली और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के संयुक्त प्रयास से कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां में इसकी स्थापना का काम चल रहा है।
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कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के मौसम विशेषज्ञ सर्वेश बरनवाल का कहना है कि आटोमेटिक वेदर स्टेशन से लिए गए मौसम के वास्तविक आंकड़े के आधार पर फसल का प्रबंधन किया जा सकेगा। फसल की उच्चतम वृद्धि व विकास की अवस्था का इसके द्वारा अध्ययन कर भविष्य की फसलों के उच्चतम पैदावार के लिए किया जाएगा। केंद्र के जरिए मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर किसानों को एडवायजरी जारी की जाएगी। जिसके अनुरूप खेती व फसल का प्रबंधन कर किसान नुकसान से बच सकेंगे। जुलाई से इसके शुरू होने की संभावना है।
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