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जुलाई से शुरू होगा पहला ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन

Fri, 30 Apr 2021 12:10 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 30 Apr 2021 12:10 AM IST
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First automatic weather station will start from July
ज्ञानपुर। मौसम की समुचित जानकारी न होने से हर साल किसानों को ओलावृष्टि, शीतलहर, चक्रवात आदि से काफी नुकसान उठाना पड़ता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। जिले में पहला आटोमेटिक वेदर स्टेशन बेजवां में स्थापित होने जा रहा है। जुलाई से इसके शुरू होने की संभावना है। इससे मौसम से होने वाले नुकसान से किसान बच सकेंगे।
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जलवायु परिवर्तन के चलते चक्रवात तो कभी ओलावृष्टि, सूखा-बाढ़, गर्म मौसम लू-पाला, शीतलहर आदि की जानकारी समय से न मिल पाने से फसल को नुकसान पहुंचता है। दिन-रात कड़ी मेहनत करने के बाद भी किसानों को उपज का वास्तविक लाभ नहीं मिल पाता था। किसान मौसम के अनुरूप खेती कर सकेंगे। उन्हें किसी भी फसल की बोआई, कटाई, मड़ाई से लेकर अन्य प्रबंधन करने के लिए सटीक समय की जानकारी मिलेगी। इसके लिए जिले में जल्द ही पहला ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन (हवामान स्वचालित केंद्र) स्थापित हो जाएगा। भारत मौसम विज्ञान विभाग, नई दिल्ली और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के संयुक्त प्रयास से कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां में इसकी स्थापना का काम शुरू कर दिया गया है। इसकी स्थापना मौसम के प्रतिकूल प्रभाव से सुरक्षा और अनुकूल मौसम का लाभ उठाकर कृषि उत्पादन में वृद्धि के उद्देश्य से की जा रही है। कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के मौसम विशेषज्ञ सर्वेश बरनवाल का कहना है कि आटोमेटिक वेदर स्टेशन से लिए गए आंकड़ों के जरिए फसल का प्रबंधन मौसम के वास्तविक आंकड़े के आधार पर किया जा सकेगा। फसल की उच्चतम वृद्धि व विकास की अवस्था को इसके द्वारा अध्ययन कर भविष्य की फसलों के उच्चतम पैदावार के लिए किया जाएगा। केंद्र के जरिए मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर किसानों को एडवायजरी जारी की जाएगी। जिसके अनुरूप खेती व फसल का प्रबंधन कर किसान नुकसान से बच सकेंगे। जुलाई से इसके शुरू होने की संभावना है।
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मौसम की सही जानकारी न होने का प्रभाव
ज्ञानपुर। कृषि प्रबंधन को प्रभावित करने में लागत, संसाधनों के उपयोग, श्रमिकों की उपलब्धता, खाद व रसायन, सिंचाई जल की उपलब्धता, सरकारी नीतियां आदि तो शामिल हैं ही, उत्पादन प्रभावित होने के इन सभी कारकों से ऊपर मौसम भी कारक है। मौसमी कारक फसल उत्पादन को लगभग दो तिहाई तक प्रभावित करती है। सतत उत्पादन लेने के लिए मौसमी कारकों की जानकारी होना अत्यंत जरूरी है। जिले में ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन की स्थापना के बाद मौसम की जानकारी मिलना आसान हो जाएगा। इससे दिन व रात का तापमान मिलना शुरू हो जाएगा। वायुमंडलीय दबाव का पता चल सकेगा। अधिकतम व न्यूनतम आद्रता (नमी) का पता चल सकेगा। इसके अलावा हवा की गति, दिशा व बारिश आदि के बारे में भी जानकारी मिल सकेगी।
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