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फाइल में बंद, 225 अवैध स्कूल अब भी संचालित
bhadohi hindi news
Updated Fri, 14 Apr 2017 01:24 AM IST
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ज्ञानपुर। सूबे के नए मुख्यंमत्री योगी आदित्यनाथ शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए जहां नए-नए आदेश जारी कर रहे हैं, वहीं जिले में शिक्षा विभाग की कार्य प्रणाली अब भी पुराने ढर्रे पर ही काम कर रही है। एक हजार से अधिक सरकारी स्कूल होने के बाद भी अवैध ढंग से संचालित 225 स्कूलों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। सबसे खास बात है कि गत शिक्षा सत्र में खंड शिक्षा अधिकारियों ने जांच के बाद ऐसे स्कूलों को बंद होने की आख्या उच्चाधिकारियों को सौंपी जबकि हकीकत में वह विद्यालय अब भी संचालित हैं।
जिले में 1113 सरकारी प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के अलावा करीब 500 मान्यता प्राप्त विद्यालय संचालित हैं। बड़ी संख्या में वैध स्कूल होने के बाद भी शिक्षा विभाग की कृपा से जिले में करीब 225 बिना मान्यता के विद्यालय चल रहे हैं। बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के बजाए कमाई का प्रमुख जरिया बन चुके स्कूल दिन ब दिन खुल रहे हैं। गली-मोहल्लों से लेकर चट्टी चौराहे पर दो कमरों में स्कूल चालू हो जा रहे हैं। विभागीय आंकड़ों पर गौर किया जाए तो भदोही ब्लॉक में 40, ज्ञानपुर ब्लॉक में 30, औराई ब्लॉक में 80, अभोली में 20, डीघ में 15, सुरियावां में 25 से अधिक बिना मान्यता के स्कूल संचालित हो रहे हैं। 2016 के शिक्षा सत्र में शासन की सख्ती के बाद खंड शिक्षा अधिकारियों ने अवैध स्कूलों के खिलाफ अभियान चलाया था, लेकिन वह भी ढाक के तीन पात वाली कहानी बन गई। प्रबंधकों की सांठगांठ से कागजों में तो स्कूल बंद हो गए लेकिन हकीकत में वह अब भी चल रहे हैं। ऐसे विद्यालयों के संचालन से परिषदीय स्कूलों में बच्चों की संख्या भी नहीं बढ़ रही है।
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जिले में 1113 सरकारी प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के अलावा करीब 500 मान्यता प्राप्त विद्यालय संचालित हैं। बड़ी संख्या में वैध स्कूल होने के बाद भी शिक्षा विभाग की कृपा से जिले में करीब 225 बिना मान्यता के विद्यालय चल रहे हैं। बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के बजाए कमाई का प्रमुख जरिया बन चुके स्कूल दिन ब दिन खुल रहे हैं। गली-मोहल्लों से लेकर चट्टी चौराहे पर दो कमरों में स्कूल चालू हो जा रहे हैं। विभागीय आंकड़ों पर गौर किया जाए तो भदोही ब्लॉक में 40, ज्ञानपुर ब्लॉक में 30, औराई ब्लॉक में 80, अभोली में 20, डीघ में 15, सुरियावां में 25 से अधिक बिना मान्यता के स्कूल संचालित हो रहे हैं। 2016 के शिक्षा सत्र में शासन की सख्ती के बाद खंड शिक्षा अधिकारियों ने अवैध स्कूलों के खिलाफ अभियान चलाया था, लेकिन वह भी ढाक के तीन पात वाली कहानी बन गई। प्रबंधकों की सांठगांठ से कागजों में तो स्कूल बंद हो गए लेकिन हकीकत में वह अब भी चल रहे हैं। ऐसे विद्यालयों के संचालन से परिषदीय स्कूलों में बच्चों की संख्या भी नहीं बढ़ रही है।
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