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उफनती गंगा से भुर्रा में कटान तेज
अमर उजाला ब्यूरो , भदोही
Updated Sun, 17 Jul 2016 01:04 AM IST
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कोनिया क्ष्रेत्र के भुर्रा गांव में करार काटती गंगा।
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बाढ़ के लिहाज से संवेदनशील माने जाने वाले कोनिया क्षेत्र के छेछ़ुआ में गंगा में तीव्र बहाव और भुर्रा गांव में उफनती जलधार करार को तेजी से काटने लगी है। भुर्रा में तेज कटान का व्यापक असर एक-दो दिन बाद दिखेगा। शनिवार को गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी तो नहीं हुई, लेकिन करार पर हिलोरें मार रहा बाढ़ का पानी तटवर्ती इलाके के ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ाता रहा। शनिवार को गंगा का जलस्तर 75.160 मीटर दर्ज किया गया।
मौजूदा सीजन में बेहद कम समय में तेजी से चढ़ा गंगा का जलस्तर बाढ़ प्रभावित कोनिया क्षेत्र में फिर कृषि भूमि के लिए ग्रहण साबित होने जा रहा है। इससे कटान प्रभावित इलाके के रहवासियों की मुश्किलें बढ़ा रही हैं, छेछुआ और भुर्रा गांव में गंगा का तेज प्रवाह किसानों के लिए खतरा बन चला है। इससे ग्रामीण सकते में हैं। भुर्रा के ग्राम प्रधान गोरखनाथ ने कहा कि गंगा ने फिर रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। चार दशक से कटान ने किसानों को बर्बाद कर दिया। गांव के जयराज सिंह, प्रेम बहादुर सिंह आदि ने कहा कि बड़े पैमाने पर उनकी उपजाऊ भूमि गंगा में समा चुकी है, लेकिन सरकारी स्तर पर कटान रोकने के लिए कारगर पहल नहीं की गई। बाढ़ आते ही राजनीतिक लोग रोटियां सेकने आ जाते हैं। ग्रामीणों ने कहा कि सही मायने में देखा जाए तो गंगा की जलधार के खिसकने के चलते उनकी जमीन इलाहाबाद जिले के बामपुर, बाधपुर और चेहरा आदि गांवों में चली गई और वहां के किसान उस पर खेती कर रहे हैं। लेकिन, उनकी समस्याओं की ओर कोई ध्यान देने वाला नहीं है।
थे।
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मौजूदा सीजन में बेहद कम समय में तेजी से चढ़ा गंगा का जलस्तर बाढ़ प्रभावित कोनिया क्षेत्र में फिर कृषि भूमि के लिए ग्रहण साबित होने जा रहा है। इससे कटान प्रभावित इलाके के रहवासियों की मुश्किलें बढ़ा रही हैं, छेछुआ और भुर्रा गांव में गंगा का तेज प्रवाह किसानों के लिए खतरा बन चला है। इससे ग्रामीण सकते में हैं। भुर्रा के ग्राम प्रधान गोरखनाथ ने कहा कि गंगा ने फिर रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। चार दशक से कटान ने किसानों को बर्बाद कर दिया। गांव के जयराज सिंह, प्रेम बहादुर सिंह आदि ने कहा कि बड़े पैमाने पर उनकी उपजाऊ भूमि गंगा में समा चुकी है, लेकिन सरकारी स्तर पर कटान रोकने के लिए कारगर पहल नहीं की गई। बाढ़ आते ही राजनीतिक लोग रोटियां सेकने आ जाते हैं। ग्रामीणों ने कहा कि सही मायने में देखा जाए तो गंगा की जलधार के खिसकने के चलते उनकी जमीन इलाहाबाद जिले के बामपुर, बाधपुर और चेहरा आदि गांवों में चली गई और वहां के किसान उस पर खेती कर रहे हैं। लेकिन, उनकी समस्याओं की ओर कोई ध्यान देने वाला नहीं है।
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