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एनएचएआई पर बने नाले के दुर्गंध से लोग परेशान
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ज्ञानपुर। राष्ट्रीय राजमार्ग-19 के किनारे बना नाला इन दिनों शौचालय टैंक का काम कर रहा है। इससे निकलने वाले दुर्गंध के कारण लोग नाक पर रुमाल रखकर राजमार्ग पर आवागमन करने को विवश हैं। पूर्वी सीमा बाबूसराय और पश्चिमी सीमा ऊंज को जोड़ने के लिए तीन वर्ष में 2447 करोड़ रुपये सिक्स लेन समेत ओवरब्रिज, अंडरपास, डिवाइडर और नाला के नाम पर खर्च कर दिए गए, लेकिन इतने रुपये खर्च होने के बावजूद भी कार्यदायी संस्था के लोग खुद इसका सही उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।
दरअसल, जिले के होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग के 38 किलोमीटर के दायरे में एक नगर पालिका परिषद, दो नगर पंचायतें और कई ग्राम पंचायतों की सीमाएं लगती हैं। ऐसे में निर्माण कार्य पूरा होने के बाद एनएचएआई इसके रखरखाव की जिम्मेदारी उक्त संस्थाओं को सौंपकर जिला प्रशासन को अवगत करा चुकी है। उधर, ग्रामीण क्षेत्रों से होकर एक-दूसरे की सीमाओं को जोड़ने वाले राजमार्ग के किनारे रहने वालों ने खुले नाला से घरों के शौचालयों की पाइप लाइन जोड़ दी है। यहां तक कि लोग घरों से निकलने वाले कूड़ा भी उसमें फेंक रहे हैं। इसके चलते जंगीगंज बाजार, सरायजगदीश, गिराई, माधोसिंह, नटवां, लालानगर, महाराजगंज, बाबूसराय, गोधना-सूफीनगर, ऊंज, वहिदानगर, नवधन, जयरामपुर-घोसिया के सामने नाला से निकलने वाले दुर्गंध के कारण लोग परेशान हो रहे हैं।
राजमार्ग होने से लोग मुंबई, दिल्ली, गुजरात, सूरत, अहमदाबाद, कानपुर, नोएडा, गाजियाबाद, बरेली, प्रयागराज आदि महानगरों से यात्रा शुरू कर पूर्वी छोर तक पहुंचने में जल्दबाजी दिखाते हैं। जरूरत पड़ने पर वाहनों को रोककर कुछ देर के लिए खड़ा भी हो जाते हैं। बाइक चालक सुरेंद्र कुमार, राजीव सिंह, कुणाल, विमलेश आदि ने महामारी के दौर में बीमारी का कारण बन रहे नाले की सफाई को समय की मांग बताया। इस संबंध में एनएचएआई के परियोजना निदेशक एके राय का कहना है कि नाले की सफाई की जिम्मेदारी संबंधित पंचायतों व निकायों की है। अभी तक यह जानकारी नहीं थी कि लोगों ने घरों के शौचालयों की पाइप लाइन नाले से जोड़ दी है। अभियान चलाकर जांच कराई जाएगी। जिन लोगों ने ऐसा किया होगा, उन पर कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में डीएम आर्यका अखौरी से मिलकर विचार-विमर्श भी करेंगे।
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दरअसल, जिले के होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग के 38 किलोमीटर के दायरे में एक नगर पालिका परिषद, दो नगर पंचायतें और कई ग्राम पंचायतों की सीमाएं लगती हैं। ऐसे में निर्माण कार्य पूरा होने के बाद एनएचएआई इसके रखरखाव की जिम्मेदारी उक्त संस्थाओं को सौंपकर जिला प्रशासन को अवगत करा चुकी है। उधर, ग्रामीण क्षेत्रों से होकर एक-दूसरे की सीमाओं को जोड़ने वाले राजमार्ग के किनारे रहने वालों ने खुले नाला से घरों के शौचालयों की पाइप लाइन जोड़ दी है। यहां तक कि लोग घरों से निकलने वाले कूड़ा भी उसमें फेंक रहे हैं। इसके चलते जंगीगंज बाजार, सरायजगदीश, गिराई, माधोसिंह, नटवां, लालानगर, महाराजगंज, बाबूसराय, गोधना-सूफीनगर, ऊंज, वहिदानगर, नवधन, जयरामपुर-घोसिया के सामने नाला से निकलने वाले दुर्गंध के कारण लोग परेशान हो रहे हैं।
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राजमार्ग होने से लोग मुंबई, दिल्ली, गुजरात, सूरत, अहमदाबाद, कानपुर, नोएडा, गाजियाबाद, बरेली, प्रयागराज आदि महानगरों से यात्रा शुरू कर पूर्वी छोर तक पहुंचने में जल्दबाजी दिखाते हैं। जरूरत पड़ने पर वाहनों को रोककर कुछ देर के लिए खड़ा भी हो जाते हैं। बाइक चालक सुरेंद्र कुमार, राजीव सिंह, कुणाल, विमलेश आदि ने महामारी के दौर में बीमारी का कारण बन रहे नाले की सफाई को समय की मांग बताया। इस संबंध में एनएचएआई के परियोजना निदेशक एके राय का कहना है कि नाले की सफाई की जिम्मेदारी संबंधित पंचायतों व निकायों की है। अभी तक यह जानकारी नहीं थी कि लोगों ने घरों के शौचालयों की पाइप लाइन नाले से जोड़ दी है। अभियान चलाकर जांच कराई जाएगी। जिन लोगों ने ऐसा किया होगा, उन पर कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में डीएम आर्यका अखौरी से मिलकर विचार-विमर्श भी करेंगे।
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