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आधा अधूरा आया घी, कैसे सेहतमंद होंगी किशोरी
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ज्ञानपुर। स्कूल-कॉलेज से दूरी बना चुकीं गांव की किशोरियों को सेहतमंद बनाने के लिए सरकार की घी देने की योजना धरातल पर पहुंचने से पहले ही बेपटरी होती दिख रही है। किशोरी बालिका योजना के तहत करीब 1200 पैकेट घी आना था, लेकिन 600 पैकेट ही आया। इससे सभी चिह्नित बालिकाओं को 450-450 ग्राम घी दे पाना मुश्किल दिख रहा है।
कुपोषण को जड़ से खत्म करने को लेकर प्रदेश सरकार ने किशोरी बालिका योजना शुरू की है। अक्सर गरीबी की वजह से तमाम लड़कियां स्कूल छोड़ देती हैं। घर में खानपान का सही प्रबंध नहीं होने की वजह से वे कुपोषण से पीड़ित होने लगती हैं। शादी के बाद यह समस्या और बढ़ जाती है। शादी के बाद कुपोषण उनके बच्चों को भी प्रभावित करता है। इसी को लेकर प्रदेश सरकार ने 11 से 14 वर्ष तक की लड़कियों को आंगनबाड़ी केंद्र से अरहर की दाल, चना के साथ ही देशी घी देने का प्रावधान किया। जिले में पहली खेप आ गई है, लेकिन वह निर्धारित मात्रा से भी कम। डीघ ब्लॉक में 335 पैकेट के मुकाबले 152, औराई में 216 के बजाए 54, अभोली में 118 के बजाए 68, सुरियावां में 110 के सापेक्ष एक भी नहीं, भदोही ग्रामीण में 263 के सापेक्ष 171, भदोही नगर में 68 और ज्ञानपुर में 270 के सापेक्ष 100 पैकेट घी आया है। ऐसे में विभाग असमंजस में है कि चिह्नित बालिकाओं में किसे घी का पैकेट दें और किसे न दें। उच्चाधिकारियों से वार्ता करने के बाद विभाग की ओर से आर्थिक रूप से कमजोर बालिकाओं को पहले देने का निर्णय लिया गया। दूसरे चरण में घी आने पर अन्य किशोरियों को दिया जाएगा। जिला कार्यक्रम अधिकारी राजीव कुमार सिंह ने कहा कि मांग के सापेक्ष घी का पैकेट नहीं आया। पत्र लिखकर मांग की गई है। जितना आया है, उसका वितरण कराया जाएगा। हर चार महीने में 450-450 ग्राम घी किशोरियों को दिया जाना है।
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कुपोषण को जड़ से खत्म करने को लेकर प्रदेश सरकार ने किशोरी बालिका योजना शुरू की है। अक्सर गरीबी की वजह से तमाम लड़कियां स्कूल छोड़ देती हैं। घर में खानपान का सही प्रबंध नहीं होने की वजह से वे कुपोषण से पीड़ित होने लगती हैं। शादी के बाद यह समस्या और बढ़ जाती है। शादी के बाद कुपोषण उनके बच्चों को भी प्रभावित करता है। इसी को लेकर प्रदेश सरकार ने 11 से 14 वर्ष तक की लड़कियों को आंगनबाड़ी केंद्र से अरहर की दाल, चना के साथ ही देशी घी देने का प्रावधान किया। जिले में पहली खेप आ गई है, लेकिन वह निर्धारित मात्रा से भी कम। डीघ ब्लॉक में 335 पैकेट के मुकाबले 152, औराई में 216 के बजाए 54, अभोली में 118 के बजाए 68, सुरियावां में 110 के सापेक्ष एक भी नहीं, भदोही ग्रामीण में 263 के सापेक्ष 171, भदोही नगर में 68 और ज्ञानपुर में 270 के सापेक्ष 100 पैकेट घी आया है। ऐसे में विभाग असमंजस में है कि चिह्नित बालिकाओं में किसे घी का पैकेट दें और किसे न दें। उच्चाधिकारियों से वार्ता करने के बाद विभाग की ओर से आर्थिक रूप से कमजोर बालिकाओं को पहले देने का निर्णय लिया गया। दूसरे चरण में घी आने पर अन्य किशोरियों को दिया जाएगा। जिला कार्यक्रम अधिकारी राजीव कुमार सिंह ने कहा कि मांग के सापेक्ष घी का पैकेट नहीं आया। पत्र लिखकर मांग की गई है। जितना आया है, उसका वितरण कराया जाएगा। हर चार महीने में 450-450 ग्राम घी किशोरियों को दिया जाना है।
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