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घर पर रोजगार मिला तो मुंबई लौटने की इच्छा नहीं

Sun, 07 Jun 2020 10:00 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 07 Jun 2020 10:00 PM IST
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Do not wish to return to Mumbai if you get employment at home
भदोही। लखनपुर अभयनपुर के पवन यादव का मुंबई के विक्रोली में अच्छे पगार पर नौकरी लग गई थी। उनका जीवन जब पूरी तरह से पटरी पर आ गया था। तभी एकाएक कोविड-19 रूपी महामारी उनके जीवन ऐसा भूचाल लेकर आया, जिससे एकाएक उनका काम छिन गया। उन्हें नहीं पता कि वे दोबारा मुंबई जाएंगे या नहीं लेकिन उनका कहना है कि घर पर नौकरी न मिली तो मजबूर होकर जाना ही पड़ेगा। उनके गांव के ही अजय पटेल मुंबई में फल बेच कर जीविका चलाते थे। मुंबई जैसे शहर को छोड़ना तो नहीं चाहते, लेकिन उन्हें नहीं पता कि नियति का क्या मंजूर है।
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पवन बताते हैं कि गत वर्ष नवंबर में मुंबई आए थे। काम मिल गया तो उन्हें लगा कि जीवन पटरी पर आ गया है। लॉकडाउन हुआ तो उन्हें इसका अंदाजा नहीं था कि समस्या इतनी बढ़ जाएगी। महाराष्ट्र चूंकि अत्यंत प्रभावित राज्यों में से था इसलिए हर रोज तेजी से कोरोना के मरीज बढ़ रहे थे। जब पूरी तरह से लॉकडाउन प्रभावी हो गया तो उन्हें समझ आया कि अब मुंबई में रुकना खतरे से खाली नहीं हैं क्योंकि जेब भी खाली हो चुका था। कंपनी ने काम पर आने से मना कर दिया था। इसी बीच गोरखपुर का एक मित्र अपनी बाइक से गोरखपुर जा रहा था सो उसके साथ हो लिए। रास्ते में तमाम झंझावतों को झेलते घर पहुंचे लेकिन समस्या बरकरार है। घर छोड़ने का मन नहीं करता लेकिन काम की खोज मुंबई लेकर चली गई थी। कहते हैं कि यदि यहां रोजगार मिला तो मुंबई जाने का इरादा नहीं है।
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गांव के दूसरे प्रवासी अजय पटेल मुंबई के घाटकोपर में फल की दुकान है। फल की दुकान से गुजारा हो जाता था। लेकिन लॉकडाउन के पहले दिन से ही परेशानी बढ़ने लगी। मरीज बढ़ने से चारो तरफ दहशत का माहौल बन गया था। लोग मदद भी करने को तैयार नहीं थे। खाने पीने की दुश्वारी हो गई। चिंता सताने लगी। घर से लोग टेलीफोन कर परेशान होने लगे। घर वालों ने अंतत: कहा कि किसी तरह घर लौट आओ तो जब कुछ न मिला तो मैं अपनी बाइक से ही घर के लिए चल दिया। छह दिन में घर पहुंचा। अब मेरे सामने रोजगार की समस्या है।
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