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Bhadohi News: कांशीराम आवास में विकास का कूड़ा
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कांशीराम शहरी आवास के सामने लगा गंदगी का अंबार। संवाद
- फोटो : Samvad
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ज्ञानपुर। सरकारी सिस्टम की अव्यवस्था और बदहाली देखनी है तो विकास भवन के सामने स्थित कांशीराम आवास आइए। यहां के आवंटियों की जिंदगी काफी जद्दोजहद भरी है। साफ-सफाई से लेकर सुविधाओं के लिए आवंटियों को तरसना पड़ता है। आलम यह है कि कॉलोनी में आठ महीने पहले सफाई हुई, जबकि कूड़े का उठान डेढ़ साल से नहीं हो सका है। इससे जहां-तहां लगे कूड़े के ढेर से उठ रही दुर्गंध के कारण संक्रमण फैलने का डर बना रहता है। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के कार्यकाल में शहरी गरीबों को आवास मुहैया कराने के लिए कांशीराम योजना शुरू हुई। 2008-09 में करीब 27 करोड़ रुपये से ज्ञानपुर के कंसापुर में 1500 आवासों का निर्माण किया गया। उनका आवंटन भी हो गया।
करीब 10 हजार से अधिक लोग रहते हैं। बसपा सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल होने के कारण इसकी गिनती वीआईपी कॉलोनी में होती थी। उस दौरान आवंटियों को अगर छींक भी आती तो अफसर पहुंचकर समस्या निस्तारित कराते थे।
2012 में सरकार बदली तो यहां के आवंटियों की किस्मत भी खराब हो गई। धीरे-धीरे 13 से 14 साल गुजर गए। दो बार भाजपा की सरकार बनी, लेकिन आवंटियों की दशा और दिशा नहीं सुधर सकी। करीब डेढ़ दशक पूर्व बनी नालियां जहां ध्वस्त हो चुकी हैं। सोमवार को हमारी टीम आवास के 56, 60 और 77 ब्लॉक में पहुंची, जहां आवंटियों का दर्द सामने आया। उनका कहना था कि यहां साफ-सफाई नहीं होती। बारिश होने पर कमरों तक पानी भर जाता है। आवास के आसपास कूड़े के ढेर होने के कारण बारिश के पानी से कूड़ा सड़ जाता है, जिससे उठने वाली दुर्गंध के कारण रहना मुश्किल हो जाता है। यहां सफाई आठ महीने पहले हुई थी और कूड़े का उठान तो डेढ़ साल से नहीं हो सका है। कांशीराम आवास की आवंटी रेशमा व्यवस्था को लेकर काफी खिन्न दिखीं। उन्होंने कहा कि यहां के आवंटी न राम में रहे, न रहीम में। निकाय चुनाव में सभासद आकर मतदाता सूची में नाम डलवाते हैं। ग्राम पंचायत चुनाव में कंसापुर के प्रत्याशी यहां नजर आते हैं।कांशीराम आवास कॉलोनी में 10 हजार से अधिक लोग रहते हैं। प्रतिदिन घरों से कूड़ा निकलता है। आठ महीने से यहां सफाई नहीं हो सकी है और कूड़े का उठान तो डेढ़ साल से नहीं हुआ। इससे जहां-तहां कूड़ा डंप है। - रेशमा, ब्लॉक 60
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आवास में कई जगह गंदगी है। नालियां चोक होने से कमरे के आसपास पानी जमा हो जाता है। शिकायत के बाद भी कोई कर्मचारी यहां नहीं आते। इससे गंदगी के बीच रहना मजबूरी है। - आशा देवी, ब्लॉक 55
कांशीराम आवास में रहना मुश्किल है, लेकिन मजबूरी में परिवार संग रहते हैं। किसी ब्लॉक में शादी होती है तो निकाय से सफाईकर्मी आकर साफ करते हैं, शेष स्थानों पर कुछ नहीं होता। आठ से 10 महीने पहले सफाई हुई थी। - मो. आरिफ
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करीब 10 हजार से अधिक लोग रहते हैं। बसपा सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल होने के कारण इसकी गिनती वीआईपी कॉलोनी में होती थी। उस दौरान आवंटियों को अगर छींक भी आती तो अफसर पहुंचकर समस्या निस्तारित कराते थे।
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2012 में सरकार बदली तो यहां के आवंटियों की किस्मत भी खराब हो गई। धीरे-धीरे 13 से 14 साल गुजर गए। दो बार भाजपा की सरकार बनी, लेकिन आवंटियों की दशा और दिशा नहीं सुधर सकी। करीब डेढ़ दशक पूर्व बनी नालियां जहां ध्वस्त हो चुकी हैं। सोमवार को हमारी टीम आवास के 56, 60 और 77 ब्लॉक में पहुंची, जहां आवंटियों का दर्द सामने आया। उनका कहना था कि यहां साफ-सफाई नहीं होती। बारिश होने पर कमरों तक पानी भर जाता है। आवास के आसपास कूड़े के ढेर होने के कारण बारिश के पानी से कूड़ा सड़ जाता है, जिससे उठने वाली दुर्गंध के कारण रहना मुश्किल हो जाता है। यहां सफाई आठ महीने पहले हुई थी और कूड़े का उठान तो डेढ़ साल से नहीं हो सका है। कांशीराम आवास की आवंटी रेशमा व्यवस्था को लेकर काफी खिन्न दिखीं। उन्होंने कहा कि यहां के आवंटी न राम में रहे, न रहीम में। निकाय चुनाव में सभासद आकर मतदाता सूची में नाम डलवाते हैं। ग्राम पंचायत चुनाव में कंसापुर के प्रत्याशी यहां नजर आते हैं।कांशीराम आवास कॉलोनी में 10 हजार से अधिक लोग रहते हैं। प्रतिदिन घरों से कूड़ा निकलता है। आठ महीने से यहां सफाई नहीं हो सकी है और कूड़े का उठान तो डेढ़ साल से नहीं हुआ। इससे जहां-तहां कूड़ा डंप है। - रेशमा, ब्लॉक 60
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आवास में कई जगह गंदगी है। नालियां चोक होने से कमरे के आसपास पानी जमा हो जाता है। शिकायत के बाद भी कोई कर्मचारी यहां नहीं आते। इससे गंदगी के बीच रहना मजबूरी है। - आशा देवी, ब्लॉक 55
कांशीराम आवास में रहना मुश्किल है, लेकिन मजबूरी में परिवार संग रहते हैं। किसी ब्लॉक में शादी होती है तो निकाय से सफाईकर्मी आकर साफ करते हैं, शेष स्थानों पर कुछ नहीं होता। आठ से 10 महीने पहले सफाई हुई थी। - मो. आरिफ