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लवकुश मेले में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
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अद्भुत छटा: सीतामढ़ी के लवकुश मेले में 108 फीट के पवनसुत की प्रतिमा को देखकर भक्त भाव विभोर होते रहे?
- फोटो : BHADOHI
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काशी प्रयाग और विंध्य धाम की हृदय स्थली धार्मिक एवं पौराणिक स्थल के रूप में ख्यातिलब्ध सीतामढ़ी में शुक्रवार को भक्ति, आस्था और श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। मौका था भगवान श्री राम और जगत जननी माता सीता के सुपुत्रों लव व कुश कुमारों के प्राकट्य महोत्सव का। सुबह से शाम तक मेलार्थियों की भीड़ उमड़ी रही। मेले में महिलाओं ने घरेलू सामानों की खरीदारी की, तो बच्चों ने तरह-तरह के व्यंजन का लुत्फ उठाया।
शुक्रवार को सुबह से ही मेले में लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। दोपहर बाद तक मेले में हजारों की भीड़ पहुंच गई। श्रद्धालुओं ने मां गंगा की अविरल धारा में आस्था की डुबकी लगाई। तत्पश्चात महर्षि वाल्मीकि आश्रम में लवकुश कुमारों और श्री राम दरबार का दर्शन पूजन किया और धार्मिक मेले का आनंद उठाया।
नौ दिवसीय श्रीराम कथा में भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक के साथ कथा का भव्य समापन हुआ। श्री सीता समाहित स्थल मंदिर, बड़े हनुमान जी मंदिर परिसर, महर्षि वाल्मीकि आश्रम, गंगा तट, सीता वट, सीता केश वाटिका, सीता धाम मौनी बाबा आश्रम, उड़िया बाबा आश्रम, स्वयं भू बाबा धवासा नाथ आश्रम के विभिन्न मंदिरों में दर्शन पूजन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। लोगों ने मंदिरों में दर्शन पूजन कर मेले का भरपूर लुफ्त उठाया। जिला प्रशासन की ओर से मेले में सुरक्षा व्यवस्था के लिए चप्पे-चप्पे पुलिस बल की तैनाती की गयी थी। मेले में लगे सर्कस, झूले, मौत का कुआं, रंग-बिरंगी दुकानें, बच्चों के खेल-खिलौने की दुकानें, गृहस्थी के साजो सामान, तरह-तरह फल फ्रूट से लेकर, मिठाई, जलेबी, चोटहिया जलेबी, गुड़िया जलेबी, अनरसा, पकौड़ी के साथ लजीज व्यंजनों चाट फुलकी, बर्गर, चाउमीन आदि की दुकाने मेले की सुंदरता बढ़ा रही थीं। मेले में बच्चों की भीड़ झूले और खेल खिलौने की दुकानों पर अधिक रही तो महिलाओं की भीड़ चाट फुलकी आदि की दुकानों पर अधिक देखी गयी। नई नवेली सुहागिन महिलाओं और टीन एजर्स गोदना और टैटू गोदवाने में मस्त दिखे।
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सीता वट की परिक्रमा कर सुहागिनों ने किया केश का शृंगार
सुहागिन महिलाओं ने अपने अमर सुहाग के लिए सीता केश वाटिका में माता सीता केस का विधिवत सोलह शृंगार कर पूजन अर्चन किया। मान्यता है कि लव कुश जन्मोत्सव के शुभ दिन सीता केस वाटिका का शृंगार और पूजन अर्चन करने से सुहाग अमर रहता है, घर में सुख समृद्धि व शांति का आगमन होता है। इसी तरह महर्षि वल्मीकि आश्रम के प्राचीन वटवृक्ष (सीता वट) का महिला श्रद्धालुओं ने विधिवत पूजन अर्चन कर श्रद्धा पूर्वक परिक्रमा की।
मिलन बगीचा रहा गुलजार
मेला क्षेत्र में स्थित मिलन बगीचा गुलजार रहा। लोग अपनों से मिले तो पुरानी यादें ताजा हो गईं। दोनों ओर से प्रेमाश्रु की बारिश में आंखों से झरझर नीर बहे। किसी के मन का मलाल दूर हुआ तो किसी ने कसमें ली कि अब दूर नहीं रहेंगे। ससुराल में रह रही तमाम दुल्हनों के मायके से उनकी मां और परिजन मेले में आते है, फिर इसी मिलन बगीचे में उनका मिलन होता है। दु:ख सुख की बातें होती हैं। इस मिलन बगीचे में मेले में आए तमाम प्रेमी युगल और शादीशुदा नए जोड़े एक दूजे से मिल कर घंटो मन की बातें दो चार करते दिखे।
मेले की झलकियां
- सीतामढ़ी को जाने वाली सभी सड़कों, संपर्क मार्गों, चकरोडों, पगडंडियां लोगों से भरी रहीं। हजारों वाहनों से पार्किंग स्थल फुल रहे।
- गंगा तट पर हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी।
- महर्षि बाल्मीकि आश्रम से लेकर हनुमान मंदिर और सीता समाहित स्थल की सड़क मेलार्थियों से खचाखच भरा रहा।
- विश्व प्रसिद्ध हनुमान मंदिर परिसर से सीता समाहित स्थल मंदिर में मेलार्थियों की भारी भीड़ लगी रही।
- भीड़ को देखते हुए मंदिरों के परिक्रमा मार्ग को सुरक्षा के दृष्टिगत बंद रखा गया।
- देश के अन्य प्रांतों से आने वाले श्रद्धालुओं और सैलानियों को असुविधाओं का सामना करना पड़ा। उनके वाहन को दो किलोमीटर पहले ही रोक दिया गया।
- गंगा के पक्की सीढ़ी से सीतामढ़ी मंदिर तक, पैगहा गेट से मठहा चौराहे तक जाम की स्थिति रही।
- बड़े झूले, मौत का कुआं आदि मनोरंजन के संसाधनों पर युवाओं और युवतियों की भारी भीड़ लगी रही। मौत के कुएं में स्टंट देख लोग दांतों तले उंगलियां दबा लिए।
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शुक्रवार को सुबह से ही मेले में लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। दोपहर बाद तक मेले में हजारों की भीड़ पहुंच गई। श्रद्धालुओं ने मां गंगा की अविरल धारा में आस्था की डुबकी लगाई। तत्पश्चात महर्षि वाल्मीकि आश्रम में लवकुश कुमारों और श्री राम दरबार का दर्शन पूजन किया और धार्मिक मेले का आनंद उठाया।
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नौ दिवसीय श्रीराम कथा में भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक के साथ कथा का भव्य समापन हुआ। श्री सीता समाहित स्थल मंदिर, बड़े हनुमान जी मंदिर परिसर, महर्षि वाल्मीकि आश्रम, गंगा तट, सीता वट, सीता केश वाटिका, सीता धाम मौनी बाबा आश्रम, उड़िया बाबा आश्रम, स्वयं भू बाबा धवासा नाथ आश्रम के विभिन्न मंदिरों में दर्शन पूजन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। लोगों ने मंदिरों में दर्शन पूजन कर मेले का भरपूर लुफ्त उठाया। जिला प्रशासन की ओर से मेले में सुरक्षा व्यवस्था के लिए चप्पे-चप्पे पुलिस बल की तैनाती की गयी थी। मेले में लगे सर्कस, झूले, मौत का कुआं, रंग-बिरंगी दुकानें, बच्चों के खेल-खिलौने की दुकानें, गृहस्थी के साजो सामान, तरह-तरह फल फ्रूट से लेकर, मिठाई, जलेबी, चोटहिया जलेबी, गुड़िया जलेबी, अनरसा, पकौड़ी के साथ लजीज व्यंजनों चाट फुलकी, बर्गर, चाउमीन आदि की दुकाने मेले की सुंदरता बढ़ा रही थीं। मेले में बच्चों की भीड़ झूले और खेल खिलौने की दुकानों पर अधिक रही तो महिलाओं की भीड़ चाट फुलकी आदि की दुकानों पर अधिक देखी गयी। नई नवेली सुहागिन महिलाओं और टीन एजर्स गोदना और टैटू गोदवाने में मस्त दिखे।
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सीता वट की परिक्रमा कर सुहागिनों ने किया केश का शृंगार
सुहागिन महिलाओं ने अपने अमर सुहाग के लिए सीता केश वाटिका में माता सीता केस का विधिवत सोलह शृंगार कर पूजन अर्चन किया। मान्यता है कि लव कुश जन्मोत्सव के शुभ दिन सीता केस वाटिका का शृंगार और पूजन अर्चन करने से सुहाग अमर रहता है, घर में सुख समृद्धि व शांति का आगमन होता है। इसी तरह महर्षि वल्मीकि आश्रम के प्राचीन वटवृक्ष (सीता वट) का महिला श्रद्धालुओं ने विधिवत पूजन अर्चन कर श्रद्धा पूर्वक परिक्रमा की।
मिलन बगीचा रहा गुलजार
मेला क्षेत्र में स्थित मिलन बगीचा गुलजार रहा। लोग अपनों से मिले तो पुरानी यादें ताजा हो गईं। दोनों ओर से प्रेमाश्रु की बारिश में आंखों से झरझर नीर बहे। किसी के मन का मलाल दूर हुआ तो किसी ने कसमें ली कि अब दूर नहीं रहेंगे। ससुराल में रह रही तमाम दुल्हनों के मायके से उनकी मां और परिजन मेले में आते है, फिर इसी मिलन बगीचे में उनका मिलन होता है। दु:ख सुख की बातें होती हैं। इस मिलन बगीचे में मेले में आए तमाम प्रेमी युगल और शादीशुदा नए जोड़े एक दूजे से मिल कर घंटो मन की बातें दो चार करते दिखे।
मेले की झलकियां
- सीतामढ़ी को जाने वाली सभी सड़कों, संपर्क मार्गों, चकरोडों, पगडंडियां लोगों से भरी रहीं। हजारों वाहनों से पार्किंग स्थल फुल रहे।
- गंगा तट पर हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी।
- महर्षि बाल्मीकि आश्रम से लेकर हनुमान मंदिर और सीता समाहित स्थल की सड़क मेलार्थियों से खचाखच भरा रहा।
- विश्व प्रसिद्ध हनुमान मंदिर परिसर से सीता समाहित स्थल मंदिर में मेलार्थियों की भारी भीड़ लगी रही।
- भीड़ को देखते हुए मंदिरों के परिक्रमा मार्ग को सुरक्षा के दृष्टिगत बंद रखा गया।
- देश के अन्य प्रांतों से आने वाले श्रद्धालुओं और सैलानियों को असुविधाओं का सामना करना पड़ा। उनके वाहन को दो किलोमीटर पहले ही रोक दिया गया।
- गंगा के पक्की सीढ़ी से सीतामढ़ी मंदिर तक, पैगहा गेट से मठहा चौराहे तक जाम की स्थिति रही।
- बड़े झूले, मौत का कुआं आदि मनोरंजन के संसाधनों पर युवाओं और युवतियों की भारी भीड़ लगी रही। मौत के कुएं में स्टंट देख लोग दांतों तले उंगलियां दबा लिए।